ताजिकिस्तान के सुदूर खटलोन प्रांत में एक सुनसान गोल्ड माइन वाली पहाड़ी पर जोरदार हमला हुआ. इस हमले में सिर्फ तीन जानें ही नहीं गईं बल्कि उसने पूरे क्षेत्र की राजनीति हिला दी. एक हथियारों वाले ड्रोन ने अफगान-ताजिकिस्तान सीमा पर उड़ते हुए एक चीनी कंपनी से जुड़े सोना-खदान पर ग्रेनेड गिराए, जिसमें तीन चीनी नागरिक मारे गए. वहीं एक शख्स घायल हो गया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. असली हलचल इसके बाद मची, जब यह बात सामने आने लगी कि ड्रोन अफगान एयरस्पेस से आया लेकिन उसे ऑपरेट कोई और कर रहा था.
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने जांच बैठा दी है और शुरुआती संकेत यह बताते हैं कि ड्रोन या तो पाकिस्तान की सैन्य यूनिट्स या उनके किसी प्रॉक्सी नेटवर्क से संचालित किया गया हो सकता है. रूस भी अब इस जांच में शामिल हो गया है, खासकर इसलिए क्योंकि ताजिकिस्तान-अफगान बॉर्डर पर रूसी सैनिक तैनात रहते हैं. रूसी राष्ट्रपति हाल ही में ताजिकिस्तान के दौरे पर थे और दोनों देशों के रिश्ते बेहद करीबी हैं. ऐसे में रूस यह समझना चाहता है कि आखिर इस हमले के पीछे कौन-सी ताकत काम कर रही है. वह यह जांच कर रहा है कि इसके पीछे पाकिस्तान तो नहीं.
हमला हुआ कैसे?
ताजिकिस्तान सरकार ने बयान जारी कर कहा कि हमला ‘पड़ोसी देश में मौजूद आपराधिक गिरोहों’ ने किया, जो ‘क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.’ न तो ताजिकिस्तान ने तालिबान को सीधे दोषी कहा, और न ही तालिबान ने ताजिकिस्तान पर उंगली उठाई, लेकिन बयान ऐसे आए कि हर देश अपने-अपने तरीके से संकेत देता दिखा. अफगानिस्तान ने साफ-साफ कहा कि हमले के पीछे कोई और ‘सर्कल’ है अफगानिस्तान ने चीन और ताजिकिस्तान को संवेदना जताते हुए कहा कि हमला ऐसे लोगों ने किया जो ‘अराजकता, अविश्वास और क्षेत्रीय अस्थिरता’ फैलाने की कोशिश करता है.
तालिबान ने क्या कहा?
तालिबान के बयान का मतलब साफ है. वे कह रहे हैं कि ये किसी तीसरी ताकत ने कराया है, जिसका मकसद चीन, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच दरारें पैदा करना है. अफगान विदेश मंत्रालय ने ताजिकिस्तान को पूरी जांच में सहयोग, डेटा-शेयर करने और तकनीकी मदद देने का भरोसा दिया.
ड्रोन हमले पर क्या बोला पाकिस्तान?
अब आता है कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा. हमला ताजिकिस्तान में हुआ, लेकिन पाकिस्तान इसमें कूद पड़ा है. अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान शांत तरीके से बयान दे रहे थे. चीन सिर्फ जांच की बात कर रहा था और रूस सबूत जुटाने में लगा है. लेकिन इन तीनों से पहले पाकिस्तान ने सीधा प्रेस स्टेटमेंट जारी कर तालिबान पर हमला बोल दिया. पाकिस्तान ने को ‘अफगानिस्तान से उठे आतंकवादी खतरे’ का नतीजा बताया और कहा कि ‘अफगान सरजमीं से बार-बार हमले हो रहे हैं, यह गंभीर चिंता का विषय है.’
ध्यान देने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के पास अभी तक कोई सबूत नहीं है. न ही ताजिकिस्तान ने तालिबान को दोषी ठहराया. लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत तालिबान को निशाने पर लिया और खुद को ‘पीड़ित’ दिखाने की कोशिश की. उसी तरह जैसे वॉशिंगटन DC में एक अफगान शूटर की घटना पर उसने अमेरिका को बयान भेजकर खुद को आतंक का शिकार बताया था.
रूस क्यों चिंतित है?
रूस की चिंता के कई कारण है. हमला अफगान-ताजिक सीमा पर हुआ है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी रूसी सैनिक निभाते हैं. अगर क्रॉस-बॉर्डर ड्रोन हमले आम हो गए तो सेंट्रल एशिया अस्थिर हो सकता है इसीलिए रूस भी जांच में जुट गया है कि ड्रोन उड़ा कौन रहा था.
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