Rohat Mogar Kachori Winter Special: सर्दियों के आते ही राजस्थान के पाली ज़िले का एक छोटा-सा कस्बा लोगों की भूख और स्वाद दोनों का केंद्र बन जाता है. जोधपुर–पाली नेशनल हाईवे पर स्थित रोहट, अपनी मशहूर मोगर कचोरी के लिए देशभर में जाना जाता है. सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग सिर्फ इस छोटी-सी कचौरी का स्वाद लेने के लिए हाईवे पर गाड़ियाँ रोकते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कचौरी केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सर्दियों में सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मिलाए जाने वाले देसी मसाले ठंड में शरीर को गर्माहट देते हैं और सर्दी-जुकाम जैसी आम दिक्कतों से राहत पहुंचाते हैं. यह कचौरी खासकर सर्दियों के मौसम में एक परफेक्ट विंटर स्नैक बन जाती है. रोहट की मोगर कचोरी दिखने में भले ही आकार में छोटी होती है, लेकिन इसका स्वाद इतना दमदार है कि एक खाते ही दो और खाने का मन कर जाए. इस कचौरी का आविष्कार रोहट के रहने वाले प्रहलादचंद ने किया था. आज भी उनका परिवार उसी पारंपरिक रेसिपी को कायम रखते हुए कचौरी बनाता है. गुणवत्ता और सही मसाला मिश्रण के कारण इस कचौरी की डिमांड हर साल सर्दियों में कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि इसे विंटर स्पेशल कचौरी भी कहा जाता है. जोधपुर–पाली हाईवे पर टोल पार करते ही रोहट पहुंचते हैं, जहाँ प्रहलादचंद मांगीलाल प्रजापत की पुरानी दुकान आज भी सबसे ज्यादा मशहूर है. इस दुकान पर अक्सर ग्राहकों की भारी भीड़ लगी रहती है. हालांकि, रोहट में अब कई दुकानें मोगर कचोरी बेचने लगी हैं, लेकिन पुराने स्वाद के दीवाने लोग इसी दुकान पर आकर कचौरी खाते हैं. कई बार एनआरआई भी जब जोधपुर आते हैं, तो इस कचौरी को खास तौर पर खाने के लिए रोहट का चक्कर जरूर लगाते हैं, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बनती है. इस कचौरी की खासियत सिर्फ इसका स्वाद नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा भी है. मसालों में ऐसा संतुलन होता है कि यह शरीर को गर्म रखती है, पाचन को बेहतर करती है और ठंड में होने वाली दिक्कतों से राहत देती है. मोगर कचोरी अध्यात्म और भोजन के अनूठे मिश्रण को दर्शाती है, जहाँ स्वाद भी है और स्वास्थ्य भी. रोहट की यह मोगर कचोरी सर्दियों के मौसम में खाने वालों के लिए स्वाद और सेहत दोनों का परफेक्ट मेल बन चुकी है.
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