आमतौर पर 2 से 4 साल के बच्चों में बिस्तर पर यूरिन करने की परेशानी देखी जाती है. कुछ बच्चे समय के साथ इस पर कंट्रोल पा लेते हैं, लेकिन कुछ बच्चों में 5-7 साल की उम्र के बाद भी बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या देखी गई है. आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में इस समस्या को तन के अलावा मन से भी जोड़कर देखा गया है. आयुर्वेद में इस समस्या को शय्यामूत्र कहा गया है. यह केवल आदत नहीं, बल्कि शरीर व मन दोनों से जुड़ा विषय माना जाता है. तो चलिए इसके पीछे के कारण और कैसे इस समस्या को कम किया जा सकता है, इस बारे में जानते हैं.
सोते समय बच्चा बिस्तर क्यों कर देता है गीला
– आयुर्वेद कहता है कि बच्चों में बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या वात दोष और कफ दोष का असंतुलन है, जिससे नसें कमजोर होती हैं और किसी भी चीज का भार नहीं झेल पाती हैं. वात दोष और कफ दोष की वृद्धि से गहरी नींद आती है, जिसकी वजह से मस्तिष्क इसका संकेत ही नहीं दे पाता और बच्चे बिस्तर गंदा कर देते हैं. साथ ही कभी-कभी पाचन कमजोर होने से वात धातु असंतुलित होकर मूत्र नियंत्रण कमजोर कर देती है.
– वैज्ञानिक दृष्टिकोण में इसे ब्लेडर की कमजोरी, मूत्राशय का सही तरीके से विकसित न होना, गहरी नींद में संकेत न मिल पाना, रात के समय यूरिन ज्यादा बनना, कब्ज, यूटीआई और हॉर्मोन के असंतुलन से जोड़कर देखा गया है.
समस्या से बचने के आसान उपाय
– आयुर्वेद में इस समस्या को कम करने के कुछ तरीके बताए गए हैं. पहला है अजवाइन, काले तिल और गुड़ को मिलाकर जमा लीजिए और दूध के साथ बच्चे को सेवन कराएं. इसके सेवन से नसें मजबूत होती हैं.
– दूसरा आंवला और शहद का मिश्रण भी लाभकारी है. दिन में दो बार बच्चे को आंवला और शहद का मिश्रण खिलाएं.
– ध्यान रखने वाली बात ये है कि इस समय बच्चों को बिल्कुल भी डांटे नहीं और दूसरों के सामने शर्मिंदा न करें. ये समस्या सिर्फ मन की नहीं बल्कि तन की भी है. बच्चों में आदत डालें कि वे रात को सोने से पहले वॉशरूम जरूर जाएं. इसके अलावा बच्चों को प्यार से समझाएं कि वे अपने शरीर के संकेतों को समझें. कई बार बच्चे खेल में या नींद में होने की वजह से भी संकेतों को अनदेखा करते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है.