खटाई गांव पंचायत भवन के सामने खड़ी महिला सरपंच।
सिंगरौली जिले की खटाई ग्राम पंचायत में पिछले 16 महीने में रिकॉर्ड 10 बार पंचायत सचिव बदले गए हैं। यह मध्य प्रदेश की एकमात्र ऐसी पंचायत है, जहां मार्च 2023 से अब तक इतनी बार सचिवों का फेरबदल हुआ है।
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सचिवों के बार-बार तबादले से पंचायत के विकास कार्य पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गए हैं। इससे सरपंच और ग्रामीणों में जिला पंचायत सीईओ की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। जनपद पंचायत क्षेत्र चितरंगी के ग्राम पंचायत खटाई की सरपंच हिरामन देवी साहू ने बताया कि इस पंचायत में मार्च 2023 से अब तक 10 बार पंचायत सचिव बदले जा चुके हैं।
तीन दिन में किया ट्रांसफर
सरपंच ने बताया कि जिले की प्रभारी मंत्री संपतिया उईके के निर्देश और अनुमोदन के बाद 28 जुलाई को अरविंद कुमार शर्मा का बोदाखूंटा पंचायत से खटाई और भगवान सिंह का खटाई पंचायत से कोरसर कोठार के लिए तबादला किया था।
लेकिन तीन दिन बाद जिला पंचायत सीईओ ने इस आदेश को निरस्त कर भगवान सिंह को यथावत खटाई में ही रखने का निर्णय लिया। सरपंच का आरोप है कि इतनी जल्दी तबादला निरस्त करने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप है।
सचिव के माध्यम से पंचायत में दखल का प्रयास
हिरामन देवी साहू ने यह भी आरोप लगाया कि जब से वह सरपंच बनी हैं, तब से पंचायत के कुछ लोगों को यह बात नागवार गुजर रही है। उन्होंने कहा कि उन पर कोई दबाव नहीं है, लेकिन सचिव के माध्यम से पंचायत में दखल देने के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सचिवों के लगातार बदलने से प्रशासनिक कार्य में अस्थिरता आई है और योजनाओं का क्रियान्वयन बाधित हो रहा है।
सरपंच ने आगे कहा कि सचिव भगवान सिंह पूर्व में सात वर्षों तक पदस्थ थे। उस दौरान लाखों रुपए की अनियमितता की गई है। यदि इन्हें फिर से खटाई पंचायत में भेजा जाता है तो ग्रामीण आंदोलन एवं धरना प्रदर्शन करेंगे।
सचिव के ट्रांसफर की कॉपी।
16 माह में 10 सचिवों की हुई अदला-बदली
ग्राम पंचायत खटाई की सरपंच हिरमन देवी ने बताया कि 16 महीने में 10 सचिवों का अदला-बदली की गई है। इस पंचायत में राजनीति के चलते कोई सचिव नहीं रह पा रहे हैं। क्योंकि इस पंचायत में जिलास्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक की राजनीति की सियासत के दांव पेच लगते हैं।
वर्ष 2024 फरवरी महीने में रामाधार केवट सेवानिवृत्त हुये थे, उसके बाद अतिरिक्त प्रभार श्यामसुन्दर बैस को दिया गया था। उसके बाद अरविन्द शर्मा को पदस्थ किया गया। फिर श्यामसुन्दर बैस को वित्तीय प्रभार दिया गया। इसके बाद भगवान सिंह को राजनीतिक रसूख के बल पर बुलाया गया।
इसके बाद 28 फरवरी 2025 को अरविन्द शर्मा को खटाई में पदस्थ किया गया। लेकिन तीन दिन के अंदर फिर से 1 अगस्त को भगवान सिंह की पदस्थापना की गई। ऐसे में पंचायत में राजनीतिक भुचाल दिखाई दे रहा है।
प्रभारी मंत्री से तबादला अनुमोदन लिया
मप्र के सीएम डॉ. मोहन यादव के सरकार ने 17 जून से तबादला पर रोक लगा दी है। तबादला पर प्रतिबंध लगने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश या फिर विषम परिस्थिति में ही प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के उपरांत तबादला किया जा सकता है।
हालांकि यहां पर 28 जुलाई के आदेश में जिले के प्रभारी मंत्री से अनुमोदन जरूर लिया गया है। लेकिन आरोप लगाया जा रहा है कि जब एक बार भगवान सिंह का तबादला खटाई से ग्राम पंचायत कोरसर कोठार कर दिया गया। अब निरस्त करने की कवायद क्यों की जा रही है।
CEO बोले- नियमों में ढील नहीं दी
जिला पंचायत के सीईओ गजेंद्र सिंह मगेश ने बताया कि अभी जो सचिव का ट्रांसफर हुआ है, उसकी फाइल सीधे जिले की प्रभारी मंत्री के यहां से चली थी। इसके बाद तबादला हुआ है। इसके पहले जो तबादले हुए हैं, उनके लिए फाइल देखनी पड़ेगी। लेकिन तबादला में किसी भी तरह के नियमों ढील नहीं दी गई है।
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