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Bone Problems Among Working Women: देश में नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी नौकरी का असर सेहत पर देखने को मिल रहा है. कम उम्र में हड्डियां कमजोर हो रही हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो नौकरी करने वाली 20 से 40 साल की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस, विटामिन D की कमी, कम बोन डेंसिटी, पीठ और घुटनों का दर्द तेजी से बढ़ जा रहा है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, धूप की कमी, अनहेल्दी खान-पान और तनाव इसके बड़े कारण हैं.
Poor Bone Health in Working Women: आज हमारे देश की महिलाएं हर क्षेत्र में बुलंदियों को हासिल कर रही हैं. किसी भी क्षेत्र में अब वे पुरुषों से पीछे नहीं हैं. भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. हालांकि नौकरी के चक्कर में कम उम्र में वे कई समस्याओं का शिकार भी हो रही हैं. एक जमाने में मेनोपॉज के बाद महिलाओं की हड्डियां कमजोर होती थीं, लेकिन अब 20-30 साल में ही उन्हें इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह खतरनाक ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और तमाम महिलाओं को इसका अंदाजा भी नहीं है. महिलाओं को हड्डियों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए.
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि नौकरी करने वाली 20 से 40 साल की महिलाओं में हड्डियों की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस, विटामिन D की कमी और बोन डेंसिटी में कमी देखने को मिल रही है. इसकी वजह भी बिल्कुल साफ है. आजकल ऑफिस में एक ही जगह बैठकर घंटों काम करना, धूप के संपर्क में न आना, खान-पान को लेकर लापरवाही और अत्यधिक तनाव महिलाओं की हड्डियों पर काफी असर डाल रहा है. कई महिलाएं व्यस्तता की वजह से खाना छोड़ देती हैं और पर्याप्त कैल्शियम नहीं ले पाती हैं. कई बार वे घर परिवार और नौकरी के चक्कर में सेहत को प्रायोरिटी ही नहीं देती हैं. इसके कारण शरीर में धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जो भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकती हैं.
महाराष्ट्र के पुणे के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अनूप गडेकर ने Mid Day को बताया कि कामकाजी महिलाएं लंबे समय तक एक ही पोश्चर में बैठी रहती हैं और वे कैफीन का सेवन ज्यादा करने लगती हैं. इसके अलावा उनके शरीर में विटामिन D और कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से जोड़ों के दर्द की समस्या हो रही है. 45 वर्ष से कम उम्र की लगभग 40% महिलाएं लगातार घुटनों के दर्द, पीठ में जकड़न, थकान और पोश्चर से जुड़ी समस्याओं की शिकायत लेकर अस्पताल आती हैं. 25 से 35 साल की हर तीन में से एक महिला की बोन डेंसिटी कम है या विटामिन D की कमी पाई जा रही है. यह स्थिति एक साइलेंट हेल्थ एपिडेमिक बन चुकी है. कमर दर्द, घुटने का दर्द, शरीर में जकड़न और लगातार थकान जैसे लक्षण शुरुआत में हल्के लगते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करने पर फ्रैक्चर, पोश्चर बिगड़ना और लंबे समय तक चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती हैं.
अब सवाल है कि महिलाएं इन गंभीर परेशानियों से कैसे बच सकती हैं? एक्सपर्ट्स का कहना है कि अच्छी लाइफस्टाइल, हेल्दी खानपान और रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी से इन समस्याओं से बचा जा सकता है. महिलाओं को अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, सोयाबीन, टोफू, नट्स, हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स और फिश शामिल करनी चाहिए. इसके अलावा बैठने का पोश्चर सुधारना चाहिए. विटामिन D की कमी दूर करने के लिए कुछ समय धूप में जरूर बिताना चाहिए. समय समय पर विटामिन D और कैल्शियम टेस्ट कराना चाहिए. अगर इन चीजों की कमी हो, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स ले सकती हैं.
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें