गल्फ न्यूज के मुताबिक विस्फोट के साथ बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) भी निकली है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है. इंडिया मेट स्काई वेदर अलर्ट ने बताया कि राख का यह गुबार जोधपुर–जैसलमेर की ओर से भारत में एंट्री कर चुका है और अब उत्तर-पूर्व की तरफ बढ़ रहा है.
दिल्ली प्रदूषण की वजह से हांफ रही है. लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली से 4300 किलोमीटर दूर घटी एक घटना ने राजधानी को तड़पने के लिए मजबूर कर दिया है. इथियोपिया के उत्तरी हिस्से में रविवार को 12,000 साल से सोया हायली गुभी ज्वालामुखी अचानक फट गया है. ये घटना इतनी दुर्लभ है कि वैज्ञानिक हैरान हैं. राख ने आसपास के गांवों को ढक लिया, लेकिन कोई हादसा नहीं हुआ. पर इस राख ने अब दिल्ली के आसमान में फैलना शुरू कर दिया है. पर सवाल ये है कि आखिर ये ज्वालामुखी फटा क्यों?
क्यों दिल्ली के आसमान पर छाया खतरा? सोमवार रात करीब 11 बजे यह राख इथियोपिया से 4300 किमी दूर दिल्ली के आसमान पर भी छा गई. इंडिया मेट स्काई वेदर अलर्ट ने बताया कि राख का यह गुबार जोधपुर–जैसलमेर की ओर से भारत में एंट्री कर चुका है और अब उत्तर-पूर्व की तरफ बढ़ रहा है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह राख का गुबार पूर्व दिशा में लगातार बढ़ रहा है. ज्वालामुखी की राख हजारों किलोमीटर दूर तक जा सकती है, इसलिए कई देशों की एजेंसियां मिलकर इसकी ट्रैकिंग कर रही हैं.
गल्फ न्यूज के मुताबिक विस्फोट के साथ बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) भी निकली है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है. अगर ज्वालामुखी अचानक ज्यादा SO₂ छोड़ रहा है, तो यह बताता है कि अंदर दबाव बढ़ रहा है, मैग्मा हिल रहा है और आगे और विस्फोट हो सकता है.
दीपिका शर्मा पिछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें
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आखिर क्यों 12,000 साल बाद फटा है इथियोपिया का हायली गुभी ज्वालामुखी?
कहां और कब फटा ये ज्वालामुखी? हायली गुभी ज्वालामुखी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित है, जो राजधानी अदीस अबाबा से करीब 800 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है. ये एक शील्ड ज्वालामुखी है, जो रविवार को फटा. फटने से कई घंटों तक राख की ऊंची-ऊंची लकीरें निकलीं, जो आसमान में छा गईं. राख ने पड़ोसी गांव अफदेरा को ढक दिया. फ्रांस के टूलूज वॉल्कैनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर (VAAC) के मुताबिक, राख की धूल 15 किलोमीटर तक ऊपर तक गई और रेड सी पार यमन, ओमान, भारत और उत्तरी पाकिस्तान तक फैल गई.
इथियोपिया के उत्तरी हिस्से में रविवार को 12,000 साल से सोया हायली गुभी ज्वालामुखी अचानक फट गया है. (फोटो साभार AP)
एक्सपर्ट्स की राय: आखिर क्यों फटा इतने साल बाद? उत्तरी कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी की वॉल्केनोलॉजिस्ट एरियाना सोल्डाती ने साइंटिफिक अमेरिकन मैगजीन को बताया, “जब तक मैग्मा बनने की स्थितियां बनी रहें, तो ज्वालामुखी 1,000 या 10,000 साल बाद भी फट सकता है.” ये क्षेत्र पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट जोन में है, जहां अफ्रीकी और अरेबियन टेक्टॉनिक प्लेट्स सालाना 0.4 से 0.6 इंच की रफ्तार से अलग हो रही हैं. बिग्स ने जोड़ा, “इस इलाके में इतनी बड़ी राख की छतरी जैसी धूल देखना बहुत दुर्लभ है.” वैज्ञानिकों का कहना है कि ये क्षेत्र कम अध्ययन वाला है. हेली गुब्बी, अफार रिफ्ट का हिस्सा है. यह एक ऐसा इलाका जहां धरती की टेक्टॉनिक प्लेटें लगातार खिसक रही हैं. इस क्षेत्र के दूसरे ज्वालामुखी, जैसे एर्टा एले को पहले से ही लगातार मॉनिटर किया जाता है. ऐसे में हेली गुब्बी की अचानक सक्रियता इस बात पर सवाल उठाती है कि धरती के भीतर मैग्मा में कौन से गहरे बदलाव हो रहे हैं.
जुलाई से ही था फटने का खतरा वैज्ञानिकों को पहले से संकेत मिले थे. जुलाई में पास का एर्ता अले ज्वालामुखी फटा, जिससे हायली गुभी के नीचे जमीन हिली. मैग्मा 30 किलोमीटर नीचे घुस आया. बिग्स और उनकी टीम ने समिट पर सफेद बादल और हल्की जमीन ऊंचाई देखी. साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के अर्थ साइंटिस्ट डेरेक किर सोमवार को राख के नमूने लेने इथियोपिया पहुंचे. बिग्स ने कहा, “ये नमूने मैग्मा का प्रकार बताएंगे और ये पक्का करेंगे कि ज्वालामुखी वाकई 12,000 साल से सोया था.” बिग्स ने कहा, “ये घटना दिखाती है कि ये क्षेत्र कितना कम अध्ययन वाला है.” वैज्ञानिक अब राख के नमूनों से मैग्मा का इतिहास खंगालेंगे. ये फटना पूर्वी अफ्रीका की ज्वालामुखी गतिविधियों पर नई रोशनी डालेगा.
इंडिया मेट स्काई वेदर अलर्ट ने बताया कि राख का यह गुबार जोधपुर–जैसलमेर की ओर से भारत में एंट्री कर चुका है और अब उत्तर-पूर्व की तरफ बढ़ रहा है. (फोटो साभार AP)
स्थानीय अधिकारीयों ने कहा कि कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन राख का असर पड़ोसी पशुपालक समुदायों पर गंभीर हो सकता है. ज्वालामुखी रिफ्ट वैली में है, जहां टेक्टॉनिक प्लेट्स टकराती हैं. राख की धूल ने हवाई यात्रा प्रभावित की. ये फटना क्षेत्र की भूवैज्ञानिक सक्रियता को दिखाता है.
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