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Eurasian Griffin Vulture: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 8 माह पहले छोड़ा गया गिद्ध वापस प्रदेश आ गया है. इस दौरान उसने पाकिस्तान, अफगानिस्तान सहित चार देशों की यात्रा की है. जानें रोचक तथ्य…
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के हलाली डैम से 29 मार्च 2025 को छोड़ा गया गिद्ध अब वापस अपने वतन आ गया है. करीब 15 हजार किलोमीटर की यात्रा कर गिद्ध 8 माह बाद वापस लौट आया है. वन विभाग ने गिद्ध को सेटेलाइट रेडियो कॉलर लगाया था, जिसके चलते गिद्ध की लगातार लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी.

वन विभाग की ओर से पिछले 8 माह से इस यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध की ट्रेकिंग की जा रही थी. इस दौरान गिद्ध ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देशों की यात्रा की है. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अभी यह गिद्ध राजस्थान के धौलपुर जिले के पास मौजूद है.

बता दें, यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध को विदिशा के हलाली डैम से 29 मार्च को छोड़ा गया था. इससे पहले गिद्ध का करीब 2 माह तक भोपाल के वन विहार में इलाज भी चला. दरअसल, गिद्ध 29 जनवरी को सतना जिले के नागौद में घायल अवस्था में मिला था.
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इसके बाद इसे इलाज के लिए पहले मुकुंदपुर चिड़ियाघर लाया गया. यहां आराम नहीं लगने पर इसे भोपाल स्थित वन विहार लाया गया. यहां गिद्ध के इलाज-देखरेख के बाद पूरी तरह से स्वस्थ होने पर 29 मार्च को खुले आसपान में छोड़ा गया.

वन विहार के डिप्टी डायरेक्टर का कहना है कि गिद्ध को सेटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाया गया था, ताकि इनके प्रवास और संरक्षण से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके. साथ ही इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके.

हलाली डेम से छोड़े जाने के एक महीने में ही यह गिद्ध कजाकिस्तान पहुंच गया था. मई में कजाकिस्तान पहुंचने के बाद 4 महीनों तक गिद्ध ने वहीं डेरा डाले रहा. इसके बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान होता हुआ वापस भारत आ गया है.

फिलहाल, यह गिद्ध राजस्थान के पास धौलपुर में डेरा डाले हुए है. यूरेषियन ग्रिफिन गिद्ध मूल रूप से एशिया के पर्वतीय और एशिया इलाकों के अलावा उत्तर अफ्रीका और यूरोप में भी पाए जाते हैं.

करीबन 6 से 11 किलो वजनी इस गिद्ध की पहचान इसके पंख होते हैं, जिस पर सफेद रंग इस तरह होता है, जैसे गले में सफेद माला हो. इसके पंखों का फैलाव 2.5 से 2.8 मीटर तक होता है.
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