सागर में 30 साल पुरानी अग्निकुंड परंपरा, नंगे पैर अंगारों पर चलते श्रद्धालु

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Sagar News: सागर के आदिवासी अंचल में स्थित एक छोटे से गांव में पिछले 30 सालों से चली आ रही परंपरा आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम बनी हुई है. यहां लोग धधकते अग्निकुंड से हर साल नंगे पैर निकलते हैं. यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है

सागर के आदिवासी अंचल में स्थित एक छोटे से गांव में पिछले 30 सालों से चली आ रही परंपरा आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम बनी हुई है. यहां लोग धधकते अग्निकुंड से हर साल नंगे पैर निकलते हैं. यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है कभी 1 घंटे लगने वाला मेला है. अब दो दिन तक चलता है. अगहन माह की अमावस्या और प्रतिपदा तिथि को यहां अग्नि कुंड के नाम से मिला लग रहा है.

हनुमान जी महाराज को कलयुग का देवता कहा जाता है.  वह आज भी इस चराचर जगत में भगवान राम का भजन करते हुए विचरण करते हैं. यही वजह है कि हनुमान जी के मंदिरों को सबसे ज्यादा सिद्ध माना जाता है. ऐसे ही सागर के आदिवासी अंचल देवरी में सिलारी गांव है. जहां हनुमान जी की मां अंजनी माता का प्रसिद्ध मंदिर है. यहां 30 साल पहले एक खेती हर मजदूर किसान को रात के समय स्वप्न आया था कि अगर वह लाल दहकते अंगारों के ऊपर से निकलेगा तो मनोकामना पूर्ण होगी.

अंजनी माता का नाम लेकर इन अंगारों से निकले
स्वर्गीय राजाराम पटेल ने उसी रात अग्नि कुंड बनाए. वह अंजनी माता का नाम लेकर इन अंगारों से निकले थे जब वह हर साल ऐसा करने लगे तो इसे चमत्कार कहने लगे और फिर राजा राम पटेल के साथ कई लोग जोड़ने गए जिनकी मनोकामनाएं पूर्ण हो रही हैं. आज भी मन्नत पूरी होने के बाद इन अंगारों से निकलते हैं.  11वीं की छात्रा साधना लोधी ने बताया कि दसवीं में अच्छे अंक आने के लिए उसने मनोकामना की थी. इस बार उसकी अच्छी परसेंट आई थी. इसलिए वह पहली बार लाल अंगारों से निकली. पैरों में ना तो जलन हो रही ना किसी तरह के छाले पड़ रहे, यह देखकर हमें खुद विश्वास नहीं हो रहा यही हनुमान जी का चमत्कार है.

पिछले 4 साल से निकल रहा अग्निकुंड से
अग्नि मेला में आए सीताराम ठाकुर ने बताया कि उन्होंने यहां पर प्रत्यक्ष चमत्कार देखा है. उनके बेटे की बचपन में दिमाग की नस दब गई थी वह कई जगह पर इसका इलाज कर चुके थे. कहीं कोई आराम नहीं मिल रहा था 5 साल पहले यहां पर मैंने मन्नत मांगी थी अब मेरा बेटा पूरी तरह से ठीक हो चुका है. इसी वजह से पिछले 4 साल से में इस अग्निकुंड से निकल रहा हूं. अब जब तक मुझ में समर्थ होगा में इस अग्निकुंड से निकालता रहूंगा.

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