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Health Fact: सड़क के किनारे, घर में या रास्ते पर चलते हुए मिर्गी आती हैं तो लोग प्याज सुंघाने लगते हैं. या कोई जूता तो कोई मोजा का उपयोग करते हैं. एक्सपर्ट ने इन सबके जवाब दिए है.
सागर: पिछले कुछ महीनो से सागर सहित बुंदेलखंड में मिर्गी के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में ही हर महीने मिर्गी बीमारी से ग्रसित 30 से 40 मरीज हर माह पहुंच रहे हैं. जहां उनके इलाज किया जा रहे, लेकिन आज हम बुंदेलखंड के उन मिथ के बारे में जानने की कोशिश करेंगे जो अक्सर लोगों के द्वारा घर से लेकर गली और बाजार तक में अपनाय जाते हैं.
जब किसी व्यक्ति को अचानक मिर्गी आई है तो वह कहीं पर भी किसी भी हाल में गिर जाता है जिससे कभी-कभी बड़ी अनहोनी भी हो जाती हैं. लेकिन अगर वह सड़क के किनारे घर में या रास्ते पर चलते हुए मिर्गी आई हैं तो लोग प्याज सुंघाने लगते हैं, कोई जूता तो कोई मौजा तो कोई गोबर या गोबर के उपले सुंघाने लगते हैं कई लोग पानी पिलाते हैं. कई लोग चम्मच को मुंह में डाल देते हैं तो इसको लेकर सबसे बड़ी भ्रांति यह भी है कि मिर्गी छुआछूत से फैलता है. यहां तक की कई लोग झाड़ फूंक के चक्कर में भी फस जाते हैं. इन्हीं सब मिथक को लेकर लोकल 18 ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी और दमा स्वांस टीवी एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सौरभ जैन बात की.
डॉक्टर सौरभ जैन ने बताया मिर्गी बेसिकली एक इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी होती है जो ब्रेन में उसका डिस्टरबेंस होता है. उसकी वजह से मिर्गी आती हैं इसमें लोग पानी पिलाते, मुंह में प्याज देते, या अन्य चीज करते हैं यह पुराने जमाने के मिथ हैं. इनसे कोई फायदा नहीं होता है, क्यों कि मिर्गी जब आती है तो ब्रेन में इलेक्ट्रिकल फायरिंग होती है. उसके कारण जो स्मेल के स्पेक्टर होते हैं वह काम नहीं करते हैं तो गंदा मौजा सुंघाने से या प्याज मुंह में डालने से कुछ अलग से फायदा नहीं होने वाला है.
मिर्गी नेचुरल प्रोसेस
मर्गी एक नेचुरल प्रोसेस है ब्रेन की एक्टिविटी के कारण होता है उसे होने देना चाहिए, उसमें आप प्रिकॉशन ले सकते हैं आप देख रहे हैं कि आपके सामने कोई गिर जाता है. मिर्गी आने लगती है तो आप उसको एक किसी भी करवट पर लिटा दें लेफ्ट साइड ज्यादा अच्छा रहता है. इसके अलावा मुंह में भी कुछ ना डालें उसको ऑब्जर्व करें सबसे ज्यादा जरूरी उसका ड्यूरेशन होता है अगर ड्यूरेशन 2 मिनट से कम है ऑटोमेटिक सही हो जाता है तो ठीक है नहीं तो चार-पांच मिनट का डेकोरेशन है तो जल्द से ही अस्पताल ले जाएं.
मिर्गी कई प्रकार की होती
मिर्गी के कई प्रकार होते हैं जब किसी को मिर्गी आती है तो बॉडी पर कंट्रोल होता है, लेकिन केवल घूरते रह जाते हैं कई बार मिर्गी में ऐसा होता है कि आपके हाथ पैर मुंह में मूवमेंट होते हैं मुंह से झाग निकलता है मुंह टेढ़ा हो जाता है. किसी की बॉडी अकड़ जाती है यह सब नेचुरल प्रोसेस है. मिर्गी के अगर किसी की बॉडी अकड़ रही है तो उसको रोकना नहीं है क्योंकि जब हम किसी के हाथ पैर पकड़ते हैं तो पता चलता है कि उसे फैक्चर हो गया या अन्य चीज हो गई तो और ज्यादा नुकसान हो जाता है.
इन बातों का रखे ध्यान
भीड़भाड़ का माहौल न बनाएं और रोगी को शांत और खुले माहौल में रखें. आसपास से वह चीजें हटा दें, जिससे चोट लगने की आशंका हो.
सिर के नीचे तकिया रख दें और वो कपड़े हटा दें जिससे रोगी को सांस लेने में पेरशानी हो रही हो. रोगी को बांई या दाहिनी किसी भी करवट लिटाएं, ध्यान रहे रोगी पीठ के बल नहीं लेता होना चाहिए. मुंह से निकलने वाली झाग (थूक) या उल्टी को साफ करते रहें, जिससे सांस लेने में परेशानी न हो. अगर बस स्टैंड रेलवे स्टेशन या भीड़ वाली जगह पर है तो सुरक्षित जगह पर ले जाना चाहिए.
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह… और पढ़ें