जरूरत की खबर- ठंड से बढ़ता 10 बीमारियों का रिस्क: सर्दियों में सेहत का रखें ख्याल, डॉक्टर से जानें बचाव के 15 जरूरी टिप्स

6 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सर्दियों का मौसम खाने-पीने और आराम करने के लिए एक अच्छा महौल देता है, लेकिन यह अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और सांस संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। हवा में नमी कम होने से स्किन रूखी होने लगती है और बच्चों-बुजुर्गों में वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बढ़ता प्रदूषण और स्मॉग रेस्पिरेटरी बीमारियों को और गंभीर बना देते हैं।

हालांकि कुछ सावधानियों और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। सही खान-पान, पर्याप्त पानी और इम्यूनिटी मजबूत करने वाले उपाय सर्दियों में होने वाली बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम सर्दियों में सेहत से जुड़ी आम चुनौतियों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • सर्दियों में किन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है?
  • इससे बचने के क्या उपाय हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. सौरभ टंडन, कंसल्टेंट फिजिशियन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर

सवाल- सर्दियों में बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

जवाब- अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल कानपुर के फिजिशियन डॉ. सौरभ टंडन बताते हैं कि सर्दियों में तापमान कम होने से लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। साथ ही हवा में नमी कम होने से वायरस लंबे समय तक एक्टिव रहते हैं। यही कारण है कि सर्दियों में बीमारियों का रिस्क ज्यादा होता है। इसके अलावा ठंड के दिनों में लोग ज्यादातर समय घरों के भीतर रहते हैं। इससे इन्फेक्शन के एक-दूसरे में फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल- सर्दियों में किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है?

जवाब- इस मौसम में सर्दी-जुकाम, फ्लू, खांसी, ड्राई स्किन, साइनस व रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, अस्थमा ट्रिगर, जोड़ों का दर्द और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं आम हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

आइए, अब इन बीमारियों के बारे में जानते हैं।

सर्दी-जुकाम

सर्दियों में ठंडी व सूखी हवा नाक और गले की नमी को कम कर देती है। इससे वायरस आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। इम्यूनिटी भी थोड़ी कमजोर होती है। ऐसे में सर्दी-जुकाम होना आम है।

वायरल इन्फेक्शन

कम तापमान में वायरस लंबे समय तक हवा और सतहों पर टिके रहते हैं। बंद कमरों में रहने से संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति तक जल्दी फैलता है।

इन्फ्लुएंजा

फ्लू वायरस ठंडे और ड्राई मौसम में तेजी से फैलता है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों में ये बुखार, थकान और बदन दर्द का कारण बनता है।

बुखार-खांसी

ठंडी हवा गले और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को सूखा बनाती है, जिससे इन्फेक्शन जल्दी होता है। इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने से बार-बार बुखार और खांसी की शिकायत बढ़ती है।

ब्रोंकाइटिस

ठंडी हवा और प्रदूषण से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में सूजन हो जाती है। इससे लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ और बलगम जैसी समस्याएं होती हैं।

जोड़ों में दर्द

सर्द मौसम में ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने से जोड़ों की फ्लैक्सिबिलिटी कम हो जाती है। इससे पुराने दर्द और आर्थराइटिस के लक्षण बढ़ जाते हैं।

स्किन प्रॉब्लम्स

ठंड, शुष्क हवा और कम नमी के कारण स्किन का मॉइश्चर कम हो जाता है। इससे स्किन ड्राई, रूखी और खुजलीदार हो जाती है।

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD)

सर्दियों में धूप कम मिलने से मूड और एनर्जी लेवल भी प्रभावित होते हैं। इससे थकान, उदासी या डिप्रेशन जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

निमोनिया

ठंड में फेफड़ों की कार्यक्षमता घट जाती है और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

हार्ट डिजीज का रिस्क

सर्दी में ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ठंड का अचानक एक्सपोजर या स्ट्रेस भी ट्रिगर कर सकता है।

सवाल- सर्दियों में बीमारियों से बचने के क्या उपाय हैं?

जवाब- डॉ. सौरभ टंडन बताते हैं कि इस दौरान हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ बदलाव और थोड़ी सावधानी अपनाकर खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक में इसे विस्तार से समझिए-

सवाल- कमजोर इम्यूनिटी ही बीमारियों की जड़ है, तो सर्दियों में इसे कैसे मजबूत बना सकते हैं?

जवाब- नियमित एक्सरसाइज, पौष्टिक डाइट, सुबह की हल्की धूप में 10–15 मिनट बैठना, पर्याप्त नींद और तनाव कम रखने की कोशिश इम्यूनिटी को मजबूत करती है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि मजबूत इम्यूनिटी के लिए सर्दियों में क्या खाना चाहिए।

सवाल- सर्दियों में हाइड्रेशन मेंटन रखना कितना जरूरी है?

जवाब- ठंड में प्यास भले ही कम लगती हो, लेकिन शरीर को पानी की उतनी ही जरूरत रहती है जितनी गर्मियों में। पानी की कमी से स्किन ड्राई हो जाती है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है और थकान महसूस होती है।

हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए गुनगुने पानी में अदरक, तुलसी या अजवाइन मिलाकर पिएं। ये डाइजेशन सुधारते हैं और शरीर को गर्म रखते हैं। पर्याप्त पानी पीने से स्किन हेल्दी रहती है, इम्यूनिटी मजबूत होती है और संक्रमण से बचाव होता है।

सवाल- सर्दियों में विटामिन D की कमी से बचने के लिए क्या करें?

जवाब- सर्दियों में धूप कम मिलती है, इसलिए विटामिन D की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए सुबह 15–20 मिनट धूप में बैठें। साथ ही डाइट में अंडा, मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, दही, चीज, फैटी फिश (सार्डिन, साल्मन) जैसी चीजें शामिल करें। डॉक्टर की सलाह से विटामिन D का सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

सवाल- सर्दियों में रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से बचने के लिए क्या करें?

जवाब- डॉ. सौरभ टंडन बताते हैं कि इसके लिए ठंडी हवा और प्रदूषण से बचाव जरूरी है। घर के कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें, ताकि हवा का आवागमन बना रहे। हाइजीन मेंटेन रखना, भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी और बीमार लोगों के संपर्क से बचना संक्रमण का जोखिम कम करता है। गुनगुना पानी-काढ़ा पीना और भाप लेना भी रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से बचाने में मदद करता है।

सवाल- सर्दियों में बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल कैसे करें?

जवाब- डॉ. सौरभ टंडन बताते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। इससे वे बीमारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसलिए उन्हें लेयर वाले गर्म कपड़े पहनाएं, खासकर सिर, कान, हाथ और पैर ढककर रखें। बुजुर्गों को गुनगुना पानी, हल्की धूप और नियमित दवाएं समय पर दें। बच्चों को ठंडी चीजें खाने को न दें और उन्हें हाथ धोने की आदत जरूर सिखाएं। दोनों को इम्यूनिटी बूस्ट करने वाली चीजें खिलाएं।

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