ढोल-नगाड़ों पर नाचते-गाते अस्पताल पहुंचे आदिवासी, ले जाने आए थे ‘आत्मा’

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Ratlam News: दरअसल आदिवासी समाज के व्यक्ति की जिस जगह पर मौत होती है, ऐसा माना जाता है कि उसी स्थान पर उसकी आत्मा मौजूद होती है. उसी आत्मा को लेने के लिए परिवार के लोग आते हैं.

आदिवासी समाज के लोग नाचते-गाते मेडिकल कॉलेज पहुंचे.

रिपोर्ट- सुधीर जैन, रतलाम. विज्ञान के युग में आज भी कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या वाकई आज भी ऐसा हो रहा है. दरअसल ऐसा ही एक वाकया मध्य प्रदेश के रतलाम मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला, जहां कुछ लोग ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते हुए पहुंचे थे. इन्हें देख आसपास के लोगों को लगा कि मामला किसी बच्चे के जन्म की खुशी से जुड़ा है या फिर किसी मरीज के ठीक होकर घर जाने की खुशी का है लेकिन दोनों में इसकी कोई वजह नहीं थी. ये लोग मेडिकल कॉलेज में आत्मा लेने आए थे. सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन आदिवासी समाज में यह एक परंपरा है.

आदिवासी समाज में मान्यता है कि परिवार के किसी व्यक्ति की जिस स्थान पर मौत होती है, उसी स्थान पर उसकी आत्मा मौजूद होती है और परिवार के लोग उसी आत्मा को लेने आते हैं. इस आत्मा को खेत में या गांव के बाहर गातिया (प्रतिमा) लगाकर स्थापित किया जाता है.

रतलाम मेडिकल कॉलेज में हुई थी मौत
दरअसल कुछ दिनों पहले छावनी झोड़ियां गांव के शांतिलाल नामक व्यक्ति की कीटनाशक पीने से इलाज के दौरान रतलाम मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी. उसी की आत्मा लेने के लिए परिवार के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे. परिजन एक सांकेतिक पात्र में मृतक की आत्मा को लेकर घर की ओर रवाना हो गए.

मेडिकल कॉलेज में किसी ने नहीं रोका
परिजनों के आदिवासी समाज का होने की वजह से मेडिकल कॉलेज में उन्हें किसी ने भी नहीं रोका. समाज की इस तरह की परंपरा कई क्षेत्रों में नजर आती है. जहां पर भी किसी आदिवासी व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है, उसकी आत्मा को इसी तरह ले जाया जाता है. हालांकि समय के साथ अब यह मान्यता धीरे-धीरे खत्म भी हो रही है. कुछ परिवार ही ऐसे हैं, जो इस परंपरा पर आज भी कायम हैं लेकिन पढ़ी-लिखी आदिवासी समाज की पीढ़ी अब इस मान्यता को पीछे छोड़ रही है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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