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Mulethi Benefits for Cough: अगर आपको भी सर्दियों में खांसी और गले की जलन दिक्कत देती है? तो परेशान होने की जरूरत नहीं है इस खबर में हम आपको बताएंगे कैसे आप मुलेठी के टुकड़े को सिर्फ़ चबाने या चाय में डालने भर से गले की इस समस्या से राहत पा सकते हैं. पहाड़ों और गांवों में पीढ़ियों से इस्तेमाल होती यह जड़ी-बूटी आज भी हर घर में सुरक्षा की तरह रखी जाती है.
सर्दियों में बढ़ने वाली खांसी से राहत पाने के लिए लोग हमेशा सुरक्षित और आसान घरेलू उपाय खोजते हैं. इन्हीं में से एक है आयुर्वेद में अत्यधिक प्रभावी मानी जाने वाली मुलेठी. इसे मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसने से गले पर प्राकृतिक परत बनती है, जो जलन और सूखापन कम करती है. यह परत खांसी की तीव्रता को घटाती है. गले की खराश को शांत करती है. इसलिए पहाड़ों और ग्रामीण इलाकों में लोग इसे तुरंत राहत देने वाले उपाय के रूप में आज भी खूब इस्तेमाल करते हैं.

मुलेठी में मौजूद ग्लाइसीराइजिन और अन्य यौगिक गले की सूजन को तेजी से कम करने में मदद करते हैं. ये तत्व बलगम को ढीला करते हैं, जिससे खांसी कम होती है. सांस लेने में राहत मिलती है. यही वजह है कि मुलेठी को खांसी, ब्रोंकाइटिस और गले के संक्रमण में प्राकृतिक उपचार माना जाता है. लोग इसे चबाकर, चाय में मिलाकर या काढ़ा बनाकर इस्तेमाल करते हैं. इसका प्राकृतिक गुण गले को शांत करता है. बार-बार होने वाली खांसी में आराम देता है.

मुलेठी सिर्फ खांसी नहीं, बल्कि आवाज बैठने की समस्या में भी बेहद लाभकारी मानी जाती है. गायक, शिक्षक और आवाज का अधिक उपयोग करने वाले लोग इसका छोटा टुकड़ा नियमित रूप से चूसते हैं. मुलेठी गले की सूजन कम कर स्वरयंत्र को मुलायम बनाती है. जिससे आवाज तुरंत बेहतर होने लगती है. इसकी शीतल प्रकृति गले पर कोमल परत चढ़ाती है, जिससे जलन और खराश दोनों में राहत मिलती है.
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उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में मुलेठी पीढ़ियों से घरेलू नुस्खों का हिस्सा रही है. बुजुर्ग राम सिंह जोशी बताते हैं कि पहले डॉक्टर और दवाइयों की कमी के समय लोग सबसे पहले मुलेठी का ही सहारा लेते थे. इसे रखने से गला तुरंत खुलने लगता है और खांसी काफी हद तक बैठ जाती है. आज भी सर्दी के मौसम में घरों में मुलेठी का स्टॉक पहले से तैयार रखा जाता है, ताकि जरूरत पड़ते ही इसका उपयोग किया जा सके.

कई लोग मुलेठी को सीधे चूसने के अलावा चाय और काढ़े में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं. गर्म पानी में मुलेठी का काढ़ा बलगम को ढीला करने और गले की सूजन कम करने में बेहद प्रभावी माना जाता है. आयुर्वेद में इसे अदरक, दालचीनी और काली मिर्च के साथ उबालकर पीने की सलाह दी जाती है. यह मिश्रण शरीर को गर्माहट देता है और सर्दी-जुकाम को जल्दी ठीक करता है. पहाड़ी इलाकों में इसे सर्दियों की हीलिंग ड्रिंक कहा जाता है.

हालांकि मुलेठी कई समस्याओं में फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में लेने पर यह रक्तचाप बढ़ा सकती है. शरीर में सोडियम असंतुलन का कारण बन सकती है. हफ्ते में सीमित मात्रा ही सुरक्षित है. गर्भवती महिलाएं, उच्च रक्तचाप वाले लोग और लंबे समय से दवाएं ले रहे व्यक्ति इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें.

मुलेठी का उल्लेख आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथों-चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में मिलता है. इसे वात-पित्त को संतुलित करने, गले की सूजन और सांस संबंधी समस्याओं में श्रेष्ठ औषधि बताया गया है. प्राचीन वैद्य इसे कंठनाथ यानी गले का रक्षक भी कहते थे. आज भी आयुर्वेदिक दवाइयों में मुलेठी खांसी की गोलियों, सिरप और काढ़ों में प्रमुख रूप से शामिल की जाती है. इसकी प्राकृतिक मिठास इसे बच्चों के लिए भी सहज बनाती है.

सर्दियों और बदलते मौसम में जब खांसी-जुकाम बढ़ने लगते हैं, तो मुलेठी की मांग में भी तेजी आ जाती है. आयुर्वेदिक दुकानों, स्थानीय बाजारों और पहाड़ी हाटों में लोग इसे बड़ी मात्रा में खरीदते दिखाई देते हैं. इसकी लोकप्रियता का कारण है इसका तत्कालिक असर और दुष्प्रभाव न के बराबर होना. लोग इसे घरों में हमेशा रखे जाने वाली जरूरी जड़ी-बूटी मानते हैं, जो किसी भी समय गले की समस्या में तुरंत राहत देती है.