Marvel Success Story: 1980 के दशक के अंत और 1990 के शुरुआती वर्षों में कई सुपरहीरो की दुनिया का बादशाह मार्वल कॉमिक्स (Marvel Comics) की जर्नी भी किसी सुपरहीरो से कम नहीं रही है. कभी ये कंपनी काफी छोटी थी. फिर अपनी कॉमिक्स के माध्यम से जबरदस्त क्रेज पैदा किया और सुपरहिट हो गई. 1996 आते आते बुरी तरह पिट गई और दिवालिया होने की कगार तक पहुंच गई. कॉमिक मार्केट का बुलबुला फूट गया था, कंपनी का बेवजह विस्तार किया गया था, और निवेशक रोनाल्ड पेरलमैन के कुछ गलत फैसले कंपनी को डुबा देने के लिए काफी थे.
दिवानगी इस कद्र थी कि 1990 के शुरुआती सालों में लोग कॉमिक्स को पढ़ने से ज्यादा निवेश की चीज समझने लगे थे. लोग एक ही कॉमिक की कई-कई कॉपी खरीदते थे, ताकि भविष्य में उन्हें महंगे दामों पर बेच सकें. उदाहरण के तौर पर एक्स-फोर्स #1 (X-Force #1) की 1991 में लाखों कॉपियां छपीं थी. उस समय स्पाइडर-मैन और एक्स-मेन जैसे टाइटल पूरी तरह छाए हुए थे. 1993 तक मार्वल ने अमेरिकी कॉमिक मार्केट का 70 फीसदी हिस्सा कब्जा लिया था.
पतन शुरू होने से पहले की घटना भी समझनी चाहिए. 1989 में रोनाल्ड पेरलमैन ने मार्वल को 82.5 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था. 1991 में कंपनी को स्टॉक मार्केट में लिस्ट करवा दिया. कंपनी को लिस्ट कराने के बाद रोनाल्ड पेरलमैन ने तेजी से कई अधिग्रहण करने शुरू कर दिए. 1992 में Fleer Corporation का अधिग्रहण 200 मिलियन डॉलर में किया. 1993 में Panini Stickers और फिर 1994 में Heroes World Distribution को खरीदना. हीरोज़ वर्ल्ड डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए वे खुद की डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी स्थापित करना चाहते थे. मगर इससे इंडस्ट्री में भारी विवाद पैदा हो गया. पेरलमैन के समय में मार्वल का शेयर 12 से बढ़कर 35.75 डॉलर तक चला गया और कंपनी की इनकम 415 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई. इसी समय एक लेखक नील गैमन ने 1993 में चेतावनी दी कि यह सब “ट्यूलिप मैनिया” जैसा बुलबुला है और यह जल्द फटेगा.
गिरावट का दौर शुरू हुआ 1993 में. यहां कॉमिस्क की मार्केट धंसने लगी. 1993 के बाद निवेशकों ने कॉमिक्स बेचना शुरू कर दिया. कॉमिक की सेल अचानक 70 फीसदी तक गिर गई. इनकम 1993 में 300 मिलियन डॉलर से 1996 में 100 मिलियन डॉलर से भी कम रह गई थी. Fleer और Panini जैसी कंपनियां भी लगभग पूरी तरह बैठ गईं.
इसके बाद मार्वल कंपनी ने कमाई बढ़ाने का अलग तरीका अख्तियार किया. उसने कॉमिक की कीमतें बहुत बढ़ा दीं. जो कॉमिस 0.75 डॉलर में मिलती थी, वह बढ़कर 1.95 डॉलर की हो गई थी. यह दोगुने से भी ज्यादा की वृद्धि थी. कुछ बातें ऐसी भी उठने लगी कि कॉमिक की कहानियों की क्वालिटी भी गिर गई. जल्दी-जल्दी क्रॉसओवर (जैसे क्लोन सागा) होने लगे, जिसे लोगों ने खास पसंद नहीं किया. हीरोज वर्ल्ड डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह असफल हो गया. कमीशन और खर्च बढ़ गए, जिसके चलते दुकानें बंद होने लगीं. 1990 का दशक खत्म होते-होते लगभग 4,000 कॉमिक शॉप्स बंद हो गईं. उधर, कंपनी ने अपने विस्तार करने के लिए 700 मिलियन से लेकर लगभग 1 बिलियन डॉलर तक का कर्ज उठा लिया था, जिसे पाटना अब नामुमकिन होने लगा था.
कंपनी इतने भारी कर्ज में आ गई कि उसे अपने ऐसे सुपरहीरो तक बेचने पड़ गए जो बेस्ट सेलर थे. स्पाइडर-मैन (Spider-Man) जा चुका था, एक्स-मैन (X-man) भी नहीं रहा, हल्क (Hulk) और फैंटास्टिक फोर (Fantastic Four) के लाइसेंस भी बेचे जा चुके थे. कुल मिलाकर, कंपनी ने जो सुपरहीरो बनाए थे, अब उसका इन पर भी नियंत्रण नहीं था. मार्वल कंपनी के निवेशकों का भरोसा बिखर चुका था. पेरलमैन ने बिना शेयरहोल्डर की अनुमति के दिवालियापन के पेपर फाइल कर दिए, जिससे उनके खिलाफ निवेशकों (जैसे कार्ल आईकन) ने केस कर दिया. शेयर 35 डॉलर से टूटकर 2 डॉलर तक आ गए थे. और तो और मार्वल कॉमिक्स के फैन तक निराश हो गए थे. यह वह समय था, जब दुनिया ने सोच लिया था कि मार्वल अब खत्म हो गई है.
एवी अराद की एंट्री और फिर से गेम शुरू
एवी अराद एक इसराइली टॉय डिज़ाइनर थे. वे कॉमिक दुनिया के नहीं, बल्कि बिज़नेस और खिलौनों के आदमी थे, लेकिन मार्वल की किस्मत बदलने में उनका सबसे बड़ा हाथ रहा. कैसे? चलिए बताते हैं. एवी अराद ने Toy Biz की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्हें मार्वल के टॉय बनाने का लाइसेंस मिला. 1993 में जब कॉमिक मार्केट ढहने लगी, मार्वल ने Toy Biz में 46% हिस्सेदारी खरीद ली. अराद को मार्वल टॉय और मार्वल फिल्म्स (Marvel Films) का सीईओ बनाया गया. मार्वल को बचाने के लिए एवी अराद ने मैनेजमेंट को आइडिया दिया कि वे अपने करेक्टर हॉलीवुड को न बेचकर, खुद हॉलीवुड बने. मतलब मार्वल खुद फिल्में बनाए.
मैनेजमेंट बोर्ड को पहली नजर यह आइडिया बड़ा ही फिजूल नजर आया. मार्वल के पास अपना स्टूडियो नहीं था. न कोई एक्टर थे, न ही कोई डायरेक्टर. कोई डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम भी नहीं था. अब तो कंपनी के पास कैश भी नहीं. ऐसे में इस तरह का विचार फिजूल लगना ही था. लेकिन एवी ने भरसक प्रयास करके बोर्ड को मना लिया और कहा कि एक बार टेस्ट तो करना चाहिए. ज्यादा बजट के साथ नहीं, कम बजट के साथ. एक छोटी सी फिल्म बनाई गई- ब्लेड (Blade), करेक्टर भी ज्यादा मशहूर नहीं थे. ब्लेड से किसी को उम्मीद नहीं थी, लेकिन इसने 131 मिलियन डॉलर का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर दिया. इस फिल्म ने मार्वल के साहस को बढ़ा दिया.
इसके बाद वर्ष 2000 में एक्स-मैन और 2002 में स्पाइडरमैन पर्दे पर उतरीं. इन फिल्मों से मार्वल को कुछ खास फायदा नहीं मिला, क्योंकि उनके खुद के पास मूवी के राइट्स नहीं थे. 2005 में कंपनी ने एक और रणनीति अपनाई. कंपनी ने अपने 10 करेक्टर (जो बहुत अधिक जाने-पहचाने नहीं थे) को गिरवी रखकर 525 मिलियन डॉलर का लोन उठाया. सोचा कि अगर मूवीज़ फ्लॉप भी हुईं तो ज्यादा दिक्कत नहीं होगी.
नशेड़ी और कंट्रोवर्शियल अभिनेता को बनाया ‘आयरन मैन’
कंपनी ने अच्छा पैसा लगाकर मार्वल स्टूडियो बनाया. आयरन मैन (Iron Man) बनाने का विचार था. लेकिन कंपनी ने इसके लिए टियर-बी अभिनेता को चुना, न कि टॉप एक्टर को. मार्वल ने आयरन मैन के लिए रॉबर्ट डॉउनी जूनियर (Robert Downey Jr.) को लिया, जिन्हें आरडीजे (RDJ). रॉबर्ट एक कंट्रोवर्शियल अभिनेता थे, उन्हें कोई साइन नहीं करना चाहता था.
रॉबर्ट डॉउनी जूनियर 1980-90 के दशक में हॉलीवुड के उभरते सितारों में से एक थे, लेकिन उनकी नशे की लत (ड्रग एडिक्शन) और इससे जुड़ी कानूनी परेशानियों ने उन्हें कंट्रोवर्शियल बना दिया था. यह सब उनकी बचपन से शुरू हुई लत का नतीजा था, जो 1990 के दशक में चरम पर पहुंच गई. इन घटनाओं ने उनकी करियर को बुरी तरह प्रभावित किया. उन्हें जेल हुई, उन्होंने कई नौकरियां गंवाईं, और इंश्योरेंस कंपनियां उन्हें ‘अनहायरेबल’ (नौकरी न देने लायक) मानने लगीं.
जब मार्वल ने आयरन मैन फिल्म के लिए आरडीजे को बतौर अभिनेता साइन किया, तब बाकी स्टूडियो इसे भारी गलती बता रहे थे. लेकिन मार्वल को यकीन था. फिल्म बनी और 2008 में पर्दे पर आई. आरडीजे ने ऐसा काम किया कि उन्होंने न केवल आयरन मैन में अभिनय किया, बल्कि वे खुद एक ‘आयरन मैन’ बनकर उभरे. बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 585 मिलियन डॉलर. ऑडियंस ने इस खूब पसंद किया. इसी फिल्म के अंत में एक ऐसा सीन आया, जिसने जनता को दीवाना बना दिया.
उस सीन में निक फ्यूरी (Nick Fury) आते हैं और कहते हैं, “मैं यहां एवेंजर्स इनिशिएटिव के बारे में बात करने आया हूं.” इसी सीन ने बता दिया कि मार्वल के पास बड़े प्लान हैं और आने वाले समय में काफी कुछ देखने को मिलेगा.
यहां तो मार्वल की एक नई शुरुआत थी. इसके बाद आयरमैन की 2 और फिल्में, कैप्टन अमेरिका, डॉक्टर स्ट्रेंज, गार्डियन्स ऑफ गैलेक्सी, ब्लैक पैंथर और एंडगेम तक लंबी कतार है, जो हिट ही नहीं, सुपरहिट गईं. अब लोगों को मार्वल की फिल्मों का इंतजार रहता है. 2009 में डिज्नी ने मार्वल को 4 बिलियन डॉलर में खरीद लिया. मार्वल का शेयर फिर से रिबाउंड हुआ. जनवरी 2025 में इसने लगभग 125 डॉलर प्रति शेयर का हाई बनाया. 19 नवंबर को नैस्डैक पर 81.32 डॉलर पर बंद हुआ. मार्वल की जर्नी अभी भी जारी है.
.