बालाघाट में मलाजखंड ताम्र परियोजना के अंडरग्राउंड माईंस में 11 नवंबर को हुए बस हादसे में घायल मजदूर मंगलेश यादव की मौत पर विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्रबंधन ने मंगलेश की मौत की जानकारी सात दिनों तक छिपाई। इस मामले को लेकर क्षेत
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यह घटना 11 नवंबर को मलाजखंड ताम्र परियोजना में हुई थी, जब एसएमएस कंपनी की एक बस के ब्रेक फेल होने से वह सैकड़ों मीटर घिसटकर पलट गई। इस हादसे में 27 मजदूर घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल मंगलेश यादव को पहले भिलाई और फिर रायपुर रेफर किया गया था। मॉयल प्रबंधन ने बुधवार, 19 नवंबर को उनकी मौत की पुष्टि की।
हालांकि, परिजनों का आरोप है कि मंगलेश यादव की मौत खदान में ही हो चुकी थी, लेकिन प्रबंधन ने सात दिनों तक उन्हें जीवित बताया। परिजनों के अनुसार, डीजीएमएस (खान सुरक्षा महानिदेशालय) की जांच पूरी होने तक मौत की खबर को जानबूझकर छिपाया गया।

19 नवंबर को मंगलेश की मौत की पुष्टि होते ही ग्रामीणों में आक्रोश भड़क उठा। उन्होंने परियोजना के मुख्य द्वार पर चक्काजाम कर दिया। जिला पंचायत सदस्य दलसिंह पन्द्रे और समाजसेवी रामेश्वर कटरे ने प्रदर्शन का समर्थन किया और पूरी रात मौके पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने 2 करोड़ रुपये का मुआवजा, बच्चों की शिक्षा, पत्नी को आजीवन पेंशन और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

19 नवंबर की शाम को मंगलेश का शव पहुंचने के बाद, एचसीएल कार्यालय के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू किया गया। यह प्रदर्शन पूरी रात जारी रहा। इस दौरान एसडीएम अर्पित गुप्ता और एसडीओपी अरविंद शाह की मध्यस्थता में प्रदर्शनकारियों और मॉयल प्रबंधन के बीच तीन बार बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
अंततः, लगभग 20 घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने प्रदर्शनकारियों की मांगें मान लीं। इसमें 57 लाख रुपये की बीमा राशि, मृतक की पत्नी को नौकरी और पेंशन, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार तथा लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई शामिल थी। इसके बाद ही प्रदर्शन समाप्त किया गया।