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Tips and Tricks : यूपी का कन्नौज अपने इत्र के लिए दुनियाभर में अलग पहचान रखता है. माना जाता है कि यहीं पर सबसे पहले गुलाब की खुशबू तैयार हुई थी, जिसने शहर की पहचान में चार चांद लगा दिए. लेकिन समय के साथ हालात बदलते गए. बाजार में नकली और सस्ते इत्र की भरमार ने असली और शुद्ध इत्र की पहचान मुश्किल कर दी है.
How to Check real perfume/कन्नौज. इत्र नगरी के नाम से मशहूर कन्नौज अपनी अनोखी खुशबुओं के लिए जाना जाता है. सैकड़ों वर्षों से यहां के घरोट्टियों में जो सुगंध तैयार होती है, वह भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर का हिस्सा मानी जाती है. माना जाता है कि कन्नौज में सबसे पहले गुलाब की खुशबू तैयार हुई थी, जिसने शहर की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयां दीं. समय के साथ इत्र उद्योग का विस्तार तो हुआ, लेकिन बाजार में नकली और सस्ती खुशबुओं की भरमार ने असली और शुद्ध गुलाब इत्र की पहचान मुश्किल बना दी है. यही वजह है कि कन्नौज के असली इत्र कारोबारी अब सबसे बड़ी चुनौती ‘शुद्धता बनाए रखने’ और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने को मानते हैं.
कैसे पहचानें
इत्र व्यापारियों के अनुसार, गुलाब का असली इत्र अपनी खुशबू और बनावट से स्वयं अपनी पहचान करा देता है. पहला संकेत इसकी मध्यम और सौम्य खुशबू होती है. असली गुलाब इत्र की महक हल्की होती है, जो लगाने के कुछ देर बाद इतनी कोमल हो जाती है कि व्यक्ति उसे खुद महसूस नहीं कर पाता, जबकि आसपास के लोग उसके हल्के प्रभाव को महसूस कर लेते हैं. दूसरी ओर, तेज और चुभन वाली महक वाला गुलाब इत्र अधिकतर नकली या रासायनिक मिश्रण वाला होता है. शुद्धता पहचानने का एक पारंपरिक तरीका इत्र की मिठास भी है.
नकली इत्र ऐसा
अनुभवी व्यापारी बताते हैं कि असली गुलाब इत्र जीभ पर हल्का लगाने पर बेहद मंद, स्वाभाविक मिठास देता है, जबकि नकली इत्र में यह गुण बिल्कुल नहीं होता. गुलाब इत्र की स्थिरता भी महत्त्वपूर्ण संकेत है. असली इत्र लंबे समय तक अपना रंग, सुगंध और गाढ़ापन बनाए रखता है, जबकि नकली इत्र कुछ महीनों में ही रंग बदलने लगता है. महक में खट्टापन आता है और वह हल्का या पानी जैसा हो जाता है.
ये काम जरूरी करें
कन्नौज के इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि इत्र की खरीदारी करते समय शुद्ध इत्र की इन विशेषताओं को ध्यान में रखें और प्रमाणित दुकानों से ही उत्पाद लें. सही जानकारी और जागरूकता से न सिर्फ उपभोक्ता असली इत्र की पहचान कर सकते हैं, बल्कि कन्नौज की सदियों पुरानी इत्र-परंपरा को सुरक्षित रखने में भी योगदान दे सकते हैं.
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें
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