‘पैर हमारे शरीर का दूसरा दिल’ अगर ये नहीं चलते तो! चेन्नई के टॉप डॉक्टर ने बताई हैरान करने वाली बात

Walking benefits for heart Health: युवाओं में और खासतौर पर 25-30 साल की उम्र में हार्ट अटैक के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके पीछे लाइफस्टाइल, डायबिटीज और अन्य कई कारकों को जिम्मेदार माना जाता है, साथ ही डॉक्टरों की ओर से लगातार लापरवाही न करने, सही समय पर जांचें कराने की सलाह दी जाती है, लेकिन हाल ही में हील फाउंडेशन की ओर से इंड‍ियाज टॉप 75 इंटरवेंशनल कार्ड‍ियोलॉज‍िस्‍ट (India’s Top 75 Interventional Cardiologists) नाम की कॉफी टेबल बुक में शामिल किए गए देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट ने दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं, जिनमें चेन्नई के टॉप इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजाराम आनंदरमन ने एक चौंकाने वाली बात कही.

भारत और चीन के हालिया क्लिनिकल विश्लेषणों का हवाला देते हुए डॉ. राजाराम ने पैरों का इस्तेमाल बढ़ाने और रोजाना पैदल चलने को दिल की सेहत के लिए रामबाण बताया है. उनका मानना है कि अगर लोग रोजाना पैदल नहीं चलते हैं और बैठे रहते हैं या इसी जीवनशैली के अभ्यस्त हो जाते हैं तो यह दिल के लिए सबसे ज्यादा खराब है. डॉ. राजाराम ने बताया,’40 वर्ष से कम उम्र के 40 फीसदी हार्ट अटैक मरीजों में पारंपरिक रिस्क कारक नहीं पाए जाते. 25 और 30 साल के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. यह एक अभूतपूर्व महामारी है. इसके लिए बैठी-बैठी जीवनशैली सबसे घातक है. हमारे पैर शरीर का दूसरा दिल हैं.जब वे नहीं चलते, तो असली दिल इसकी कीमत चुकाता है.’

वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री के जे अल्फोंस ने कहा कि खुश रहिए. यही सबसे अच्छी हार्ट मेडिसिन है. भारतीयों को डॉक्टरों पर अत्यधिक निर्भर रहना बंद कर अपनी सेहत की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए. यहां तक कि केरल, जिसे भारत का सबसे स्वस्थ राज्य माना जाता है, वहां भी डायबिटीज़ दर 24% है. हमें चलने-फिरने, खुशी और दैनिक शारीरिक गतिविधि को अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा.’

जबकि सर गंगा राम अस्पताल नई दिल्ली के प्रसिद्ध इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. मोहसिन वली ने बताया, ‘हमारी हर सांस और हर निवाला हमारी सेहत को प्रभावित करता है. ज्यादातर लोग हृदय-रोकथाम को जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग इसे वास्तव में अपनाते हैं. नींद, तनाव नियंत्रण और रोज का व्यायाम ही वास्तविक दवाएं हैं. हम सलाह देने वाले बन गए हैं, पालन करने वाले नहीं.’

बता दें कि इन सभी डॉक्टरों ने हार्ट के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन चुकी डायबिटीज को लेकर भी कई जरूरी बातें बताईं. मेदान्ता के चेयरमैन इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, डॉ. रजनीश कपूर ने कहा कि डायबिटीज़ हृदय रोगों को और जटिल बना देती है. डायबिटिक मरीजों की धमनियां पतली, नाज़ुक और व्यापक रूप से प्रभावित होती हैं. हर इंटरवेंशन अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इसलिए डायबिटीज़ के मरीजों के लिए जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी है.

वहीं हर तीसरे महीने पर जांचें कराने की प्रवृत्ति को भी खराब बताते हुए मैक्स अस्पताल के चेयरमैन, कार्डियोलॉजी, डॉ. नकुल सिन्हा ने कहा कि लोग हर तीन महीने में 50-पेज की रिपोर्ट लेकर आते हैं, जबकि उन्हें कोई लक्षण भी नहीं होता. हर जांच जरूरी नहीं होती. कई बार सबसे सही सलाह बस इतनी होती है कि आराम करें और एक साल बाद दोबारा आएं. उन्होंने ‘डॉ. गूगल’ के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई, जिसे उन्होंने गैर जरूरी चिंता और गलत जानकारी का कारण बताया.

इस दौरान हील फाउंडेशन के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. स्वदीप श्रीवास्तव ने बताया कि यह किताब उन नायकों को समर्पित है जो विज्ञान और करुणा से दिलों को ठीक करते हैं. उनका कार्य आशा जगाता है, जीवन बचाता है और कार्डियक नवाचार में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत करता है. इस दौरान डॉ. नगेंदर चौहान, डॉ. अंजन कुमार, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. नवीन म्हामिदी, डॉ. श्याम कुंडा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. श्याम कुंडा बंसल, डॉ. गुरप्रीत सिंह और डॉ. राकेश राय सपरा आदि को सम्मानित भी किया गया.

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