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Sheikh Hasina Residence Permit: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में रेजिडेंस परमिट पर रह रही हैं,.बांग्लादेश ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. उनकी भारत में रहने की अवधि और भविष्य अनिश्चित है.
Sheikh Hasina Residence Permit: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 में छात्रों पर हुए हिंसक दमन के लिए मौत की सजा सुनायी है. यह अदालत शेख हसीना के राजनीतिक विरोधियों द्वारा नियंत्रित है जो अपनी शासन संबंधी विफलताओं से ध्यान हटाना चाहते हैं. छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का पतन हो गया था. उसी दिन शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और वह भारत आ गईं.
भारत ने शेख हसीना की सजा पर सतर्कता के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की. उसने एक बयान में कहा कि वो बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के फैसले से अवगत है. वो एक करीबी पड़ोसी के रूप में बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें उस देश में शांति, लोकतंत्र, समावेश और स्थिरता शामिल है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हम हमेशा इस मामले में सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे.” लेकिन भारत में रह रही अपदस्थ प्रधानमंत्री के प्रत्यर्पण के लिए सजा के तुरंत बाद ढाका द्वारा अपनी मांग को पूरा करने के बारे में कुछ भी नहीं बताया.
क्या है भारत सरकार का रुख
सरकार ने अब तक अंतरिम सरकार द्वारा उनकी प्रत्यर्पण की अपील को स्वीकार नहीं किया है. ना ही उसने इस बारे में कोई प्रतिबद्धता नहीं जतायी है कि वह इस बारे में क्या करने का प्रस्ताव रखती है. पिछले साल दिसंबर से ही जब ढाका ने आधिकारिक तौर पर उनके प्रत्यर्पण की मांग की थी, सरकार का यही रुख रहा है. और अब इस तरह के किसी भी अनुरोध को जल्दबाजी में पूरा करने की संभावना नहीं है. क्योंकि शेख हसीना को नाटकीय ढंग से सुनायी गयी मौत की सजा भारत के लिए जमीनी स्थिति को बदलने में कोई खास मददगार नहीं होगी.
भारत ने हसीना को दिया रेजिडेंस परमिट
शेख हसीना को भारत में रेजिडेंस परमिट मिला हुआ है, जो उन्हें लंबे समय तक रहने की पात्रता प्रदान करता है. यह स्थिति उनके डिप्लोमैटिक पासपोर्ट रद्द होने के बाद भी बनी हुई है और भारत सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से अनुमति दी है. जनवरी 2025 में भारत ने उनके वीजा को तकनीकी रूप से बढ़ाया, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अब एक अलग रेजिडेंस परमिट के रूप में काम कर रहा है, जो वीजा से भिन्न है. इससे वे दिल्ली के एक सुरक्षित सरकारी आवास में रह रही हैं, जहां पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था है. भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे जितने समय चाहें यहां रह सकती हैं.
राजनीतिक शरण जैसी सुविधा
दिसंबर 2024 में बांग्लादेश ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया जिसके बाद वीजा संबंधी मुद्दे अप्रासंगिक हो गए. हालांकि भारत ने इस पर कोई असर नहीं पड़ने दिया और रेजिडेंस परमिट जारी रखा. बांग्लादेश ने कई बार प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की प्रत्यर्पण संधि में राजनीतिक अपराधों या मौत की सजा वाले मामलों में अस्वीकार करने का अधिकार है. यह व्यवस्था (रेजिडेंस परमिट) शेख हसीना को राजनीतिक शरण जैसी सुविधा देती है, हालांकि भारत इसे औपचारिक रूप से ‘शरण’ नहीं कहता. स्थिति कूटनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई है.
रेजिडेंस परमिट विस्तार पर स्पष्टता नहीं
जनवरी 2025 में, ऐसी खबरें आईं थीं कि भारत ने शेख हसीना के वीजा की अवधि बढ़ा दी है. कुछ रिपोर्टों में इसे तकनीकी आधार पर किया गया विस्तार बताया गया. जनवरी 2025 की कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया था कि वह पिछले साल अगस्त से रेजिडेंस परमिट पर भारत में रह रही हैं. जनवरी 2025 में हुए वीजा/रेजिडेंस परमिट विस्तार की अंतिम वैधता तिथि या अवधि सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गयी है. वह अगस्त 2024 में बांग्लादेश से आने के बाद से लगातार भारत में ठहरी हुई हैं. उनका वर्तमान निवास स्टेटस भारत सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध पर निर्णय लेने पर निर्भर करता है.
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