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What Cause Long Covid Symptoms: कोविड-19 की महामारी के दौरान यदि आप भी इस वायरस से संक्रमित हुए थे, तो मुमकिन है कि आपको इसके साइड इफेक्ट्स ठीक होने के कई महीनों तक बाद तक महसूस हुए हो. इसमें थकान, कमजोरी या फोकस करने में परेशानी मुख्य रूप से शामिल है. इसके पीछे का कारण अब विज्ञानिकों को मिल गया है, जो इसके उपचार की संभावनाओं को बढ़ाता है.
कोविड-19 वायरस के इंफेक्शन से ठीक होने के कई साल बितने के बावजूद भी लोग इसके साइड इफेक्ट्स का परेशान है.मेडिकल भाषा में इसे लॉन्ग कोविड भी कहा गया है. इसमें कोविड का मरीज ठीक होने के कई साल बाद तक थकान, कमजोरी और ब्रेन फॉग जैसी परेशानियां करता है.
इसे लेकर हाल ही में Journal of Medical Virology में एक नई रिसर्च प्रकाशित हुई है. जिसमें विज्ञानिकों ने ये खुलासा किया है कि लॉन्ग कोविड के लक्षणों से पीड़ित लोगों के खून में एक अलग तरह का स्ट्रक्चर मौजूद है. इसका क्या मतलब है? चलिए इस लेख में समझते हैं.
क्या है लॉन्ग कोविड?
लांग कोविड का मतलब है, कोरोना संक्रमण के कई हफ्तों या महीनों बाद भी शरीर में कमजोरी, थकान, ठीक से सोच न पाना, शरीर दर्द, सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां रहना. इसकी सही वजह अभी साफ नहीं थी, लेकिन अब विज्ञानिकों को इसका जवाब मिलता नजर आ रहा है.
नई रिसर्च में क्या पाया गया?
फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने लान्ग कोविड से पीड़ित 50 लोगों और पूरी तरह स्वस्थ 38 लोगों के खून की जांच की. उन्होंने खून के अंदर बेहद छोटे और असामान्य थक्कों को देखा. ये माइक्रोक्लॉट्स बहुत ज्यादा मात्रा में लान्ग कोविड मरीजों में पाए गए– स्वस्थ लोगों की तुलना में लगभग 20 गुना ज्यादा. खास बात यह थी कि इन माइक्रोक्लॉट्स में एक और चीज मिली “नेट्स” ये एक तरह के जाल होते हैं, जिन्हें शरीर के सफेद रक्त कोशिकाएं बाहर निकालती हैं ताकि शरीर पर हमला करने वाले वायरस या बैक्टीरिया को पकड़ सकें. लेकिन लान्ग कोविड मरीजों में यह जाल माइक्रोक्लॉट्स के साथ चिपककर बड़ी समस्या बना रहा है.
क्या है इसका असर?
सामान्य तौर पर जब शरीर में क्लॉट या थक्का बनता है, तो खास प्रक्रियाओं से वह टूटकर खत्म हो जाता है. लेकिन रिसर्च के मुताबिक, अगर नेट्स और माइक्रोक्लॉट्स आपस में जुड़ जाएं, तो शरीर उन्हें आसानी से खत्म नहीं कर पाता. इसका नतीजा यही होता है कि शरीर के अलग–अलग हिस्सों में खून का सर्कुलेशन ठीक से नहीं होता और थकान, दिमागी भ्रम, कमजोर याददाश्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
इलाज की उम्मीद
रिसर्चरों ने बताया कि यही माइक्रोक्लॉट्स और नेट्स लान्ग कोविड की पहचान के लिए एक तरह के “बायोमार्कर” बन सकते हैं. इससे भविष्य में डॉक्टर नया इलाज और पहचान की तकनीक विकसित कर सकते हैं. फिलहाल यह रिसर्च शुरुआती स्तर पर है, आगे और शोध बहुत जरूरी हैं.
शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया … और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.