Last Updated:
New Drug-Delivering Microrobots: स्विटजरलैंड की ETH Zurich यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक माइक्रो रोबोट बनाए हैं, जो शरीर के अंदर जाकर दवा को बिल्कुल सटीक जगह पर पहुंचा सकते हैं. ये रोबोट स्ट्रोक के थक्कों और ट्यूमर तक पहुंच सकते हैं और ट्रीटमेंट को बेहतर बना सकते हैं. शुरुआती ट्रायल्स में ये माइक्रो रोबोट जानवरों और जटिल ब्लड वेसल्स में पहुंचने में सफल रहे हैं, जिससे ये भविष्य में मेडिकल फील्ड में बेहद कारगर हो सकते हैं.
Future Stroke and Cancer Treatment: दुनियाभर में हर साल 1.20 करोड़ से ज्यादा लोग स्ट्रोक (Stroke) का शिकार हो जाते हैं. स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें मरीज के ब्रेन तक खून नहीं पहुंच पाता है या जरूरत से कम पहुंचता है. इसकी वजह से ब्रेन की सेल्स को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और ब्रेन की सेल्स मरने लगती हैं. इससे मरीज को लकवा मार जाता है या सीवियर मामलों में मौत हो जाती है. स्ट्रोक के कुछ मामलों में खून का थक्का (Clot) ब्लड वेसल्स को ब्लॉक कर देता है, जबकि कई मामलों में ब्रेन के अंदर की कोई ब्लड वेसल्स फट जाती है. दोनों ही वजह से लोगों को स्ट्रोक आ जाता है. स्ट्रोक का इलाज करना मुश्किल होता है, क्योंकि दवाओं के जरिए ब्लड वेसल्स के क्लॉट को हटाना आसान नहीं होता है.
अभी तक स्ट्रोक के इलाज के लिए डॉक्टर बहुत ताकतवर क्लॉट डिजॉल्विंग दवाएं देते हैं, जिससे ब्लड वेसल्स में जमे थक्के साफ हो सकें. ये दवाएं पूरे शरीर में घूमकर ब्रेन तक पहुंचती हैं और इसके कई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. हालांकि अब वैज्ञानिकों ने ऐसी चीज डेवलप कर ली है, जो स्ट्रोक के इलाज को आसान बना सकती है. स्विटजरलैंड की ETH ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने मैग्नेटिक माइक्रो रोबोट्स (magnetic microrobots) विकसित किए हैं, जो स्ट्रोक और ट्यूमर के इलाज में काफी मदद कर सकते हैं. ये बेहद छोटे रोबोट हमारे शरीर के अंदर जाकर सटीक जगह पर दवा रिलीज कर सकते हैं, जिससे दवा के साइड इफेक्ट कम हो जाएंगे और यह तेजी से असर दिखाएगी.
कैसे काम करते हैं माइक्रो रोबोट्स?
नई माइक्रो-रोबोट तकनीक स्ट्रोक के ट्रीटमेंट में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है. ये बेहद छोटे रोबोट दवा से भरे छोटे कैप्सूल की तरह होते हैं, जिन्हें बाहर से हाई फ्रीक्वेंसी मैग्नेटिक फील्ड के जरिए कंट्रोल किया जाता है. ये माइक्रो रोबोट्स शरीर में जाकर अपने टारगेट तक दवा पहुंचाते हैं और डॉक्टर्स के निर्देश पर दवा रिलीज कर देते हैं. इस दौरान कैप्सूल के चुंबकीय कण गरम होकर उसकी बाहरी जेल परत को तोड़ देते हैं और दवा केवल उस जगह पर निकलती है, जहां उसकी जरूरत है. इस तरह दवा की मात्रा कम रखी जा सकती है और इलाज बेहतर हो सकता है.
टारगेट तक दवा पहुंचाने में 95% तक कारगर
वैज्ञानिकों की मानें तो ये मैग्नेटिक माइक्रो-रोबोट शरीर के भीतर जाकर दवाइयों को बिल्कुल सटीक स्थान पर पहुंचा सकते हैं. इनके जरिए स्ट्रोक पैदा करने वाली नसों में जमे हुए थक्के या कठिन स्थानों पर बने ट्यूमर का इलाज ज्यादा प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा. दावा है कि ये रोबोट 95% से ज्यादा सटीकता के साथ टारगेट तक दवा पहुंचाने में सफल रहे हैं. शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को जांचने के लिए सबसे पहले इंसानों और जानवरों की ब्लड वेसल्स की नकल करके सिलिकॉन मॉडल बनाए. इनमें रोबोट ने सही रास्ता तय किया और कृत्रिम ब्लड क्लॉट को भी सफलतापूर्वक साफ कर दिया. इसके बाद इस टेक्निक को सूअर और भेड़ों पर आजमाया गया. भेड़ों के जटिल ब्रेन में सेरेब्रोस्पाइन फ्लूड में इन माइक्रो रोबोट्स के सफल नेविगेशन को बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. ये रोबोट बेहद सेंसिटिव जगहों पर भी सेफ तरीके से काम कर सकते हैं.
अभी क्लीनिक ट्रायल्स होना बाकी
अब इस माइक्रो-रोबोट तकनीक का क्लीनिकल ट्रायल्स होना है. अगर ट्रायल्स में सफलता मिलती है, तो यह अस्पतालों और ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर्स के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक लाखों जिंदगियां बचाने और ट्रीटमेंट को ज्यादा तेज, सुरक्षित और सटीक बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस स्ट्रोक का इलाज था, लेकिन भविष्य में यही तकनीक ट्यूमर या किसी इंफेक्शन पर भी दवा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. इससे कैंसर जैसी बीमारियों के लिए दी जाने वाली पूरे शरीर पर असर करने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट कम किए जा सकते हैं.
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें