39 हजार साल पुराने मैमथ से निकला दुनिया का सबसे पुराना RNA, वैज्ञानिक भी हैरान

वैज्ञानिकों को साइबेरिया की जमा हुई बर्फ से एक ऐसा खजाना मिला है, जिसने पुरानी मान्यताओं को हिला दिया है. ऊन वाले मैमथ के एक 39 हजार साल पुराने बच्चे से अब तक का सबसे पुराना RNA निकाला गया है. वैज्ञानिकों को खुद भी उम्मीद नहीं थी कि RNA जैसी नाजुक चीज इतनी लंबी उम्र तक टिकी रह सकती है.

2010 में जब ‘यूका’ नाम का यह मैमथ साइबेरिया के ओयोगोस यार तट के पास मिला था, तब इसकी बॉडी बेहद अच्छी हालत में थी. ठंड ने इसे ऐसे बचाए रखा जैसे किसी फ्रीजर में रखी चीज सुरक्षित रहती है. अब उसी बॉडी से रिसर्चर्स ने RNA निकाला और करीब 5 से 10 साल के इस छोटे मैमथ के शरीर के अंदर उस समय क्या-क्या चल रहा था, इसका अंदाजा लगा लिया.

वैज्ञानिकों को मिला शरीर के अंदरूनी ‘लाइव’ डेटा
DNA से हमें पता चलता है कि किसी जीव का जेनेटिक कोड कैसा था. लेकिन RNA एक कदम आगे जाता है. RNA बताता है कि मौत के समय शरीर के कौन-कौन से जीन्स काम कर रहे थे, कौन सा सेल क्या कर रहा था, कौन सा प्रोटीन बनने वाला था.

यूका के RNA को पढ़कर समझ आया कि उसकी मांसपेशियों के जीन्स एक्टिव थे और शरीर में तनाव यानी स्ट्रेस से जुड़े संकेत भी मिले. यह जानकारी इसलिए खास है क्योकि इससे पता चलता है कि मैमथ सिर्फ बाहरी दिखावट से नहीं, अंदर से कैसे काम करते थे.

इस स्टडी के लीड रिसर्चर एमिलियो मार्मोल कहते हैं कि RNA की मदद से हमें मैमथ की बॉडी के असली मेटाबॉलिक फंक्शन दिखते हैं. यानी शरीर में हो रही गतिविधियों की सीधे झलक मिलती है, जो DNA या प्रोटीन के सहारे पूरी तरह संभव नहीं थी.

RNA मिनटों में खत्म हो जाता है…
अब तक की समझ यह थी कि RNA बेहद नाजुक होता है और मौत के बाद मिनटों या घंटों में खराब हो जाता है. लेकिन यूका से मिला RNA इस सोच को बदल देता है. इससे पहले सबसे पुराना RNA सिर्फ 14 हजार साल पुराना मिला था. यूका ने यह रिकॉर्ड सीधे डबल कर दिया.

सह-लेखक और जेनेटिसिस्ट लव डालेन का कहना है कि यह रिसर्च एक ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ है. यानी इससे साबित हो गया कि सही माहौल मिले तो लाखों साल पुराने जीवों से भी RNA मिलने की उम्मीद बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि यह रास्ता खोलता है आइस एज के और दूसरे प्राचीन जीवों की ‘जीवन गतिविधियों’ का अध्ययन करने का.

यूका पर हमले के निशान भी मिले
यूका की बॉडी पर गहरे कट मिले थे, जो किसी गुफा-शेर के हमले जैसे लगते हैं. लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि ये चोटें जानलेवा नहीं थीं. असली मौत किस वजह से हुई, यह अब भी एक रहस्य है. RNA में जो प्रोटीन-कोडिंग संकेत मिले they बताते हैं कि शरीर चोट और तनाव से जूझ रहा था.

DNA सीक्वेंसिंग से यह भी तय हुआ कि यूका नर था और कंधे तक इसकी लंबाई करीब 1.6 मीटर यानी पांच फीट से थोड़ी ज्यादा थी.

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