कुछ लोगों को धनिया से क्यों होती है नफरत? इसके पीछे छिपी वैज्ञानिक वजह, जानकर उड़ जाएंगे होश

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Coriander Controversy: कई लोगों को धनिया पसंद नहीं होता है और उन्हें इसका स्वाद साबुन जैसा लगता है. अगर आपको भी धनिया खाने पर ऐसा ही स्वाद आता है, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में OR6A2 नामक विशेष जीन मौजूद है. यह जीन धनिया के अल्डिहाइड यौगिकों को साबुन जैसी गंध के रूप में पहचानता है. हालांकि कुछ लोग धीरे-धीरे इसे पसंद करना सीख सकते हैं, लेकिन जेनेटिक कारणों वाले लोग इसके स्वाद को बदल नहीं पाते हैं.

अधिकतर लोगों को धनिया पसंद नहीं आता है.

Science Behind Coriander Aversion: धनिया को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. धनिया में कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के कामकाज में मदद करते हैं. तमाम लोग अपनी सब्जी में धनिया डालकर खाना पसंद करते हैं. धनिया की गंध काफी तेज होती है और यह खाने की खुशबू बढ़ा देता है. कुछ लोगों को इसका खट्टेपन जैसा स्वाद बेहद पसंद आता है, जबकि कई लोग इसका स्वाद साबुन जैसा बताते हैं. यह पसंद-नापसंद सिर्फ स्वाद का मामला नहीं है. वैज्ञानिकों के अनुसार धनिया को नापसंद करने की वजह आपके जीन्स से जुड़ी हो सकती है. इसी वजह से धनिया को लेकर लोगों की राय इतनी अलग होती है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक धनिया खाने पर अगर आपको साबुन जैसा स्वाद आता है, तो यह जेनेटिक्स से जुड़ा मामला है. हमारे शरीर में सैकड़ों तरह के स्मेल रिसेप्टर जीन होते हैं, जो अलग-अलग सुगंधित रसायनों को पहचानते हैं. रिसर्च बताती हैं कि जिन लोगों को धनिया पसंद नहीं होता, उनमें OR6A2 नामक ओलफैक्टरी रिसेप्टर जीन का एक विशेष प्रकार पाया जाता है. यह जीन अल्डिहाइड नामक यौगिकों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होता है. यह वही यौगिक हैं, जो धनिया की तेज महक के साथ-साथ कई साबुन और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में भी मौजूद होते हैं. इसी कारण इन लोगों का दिमाग धनिये की महक को साबुन से जुड़ी गंध की तरह पहचानता है. इसकी वजह से कई लोग धनिया खाना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं.

यह जीन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में बढ़ता जाता है. इसलिए अक्सर देखा जाता है कि अगर माता-पिता में से किसी एक को धनिया से नफरत है, तो बच्चों में भी धनिया का स्वाद असहज लगने की संभावना ज्यादा होती है. धनिया के प्रति यह नापसंदगी कभी-कभी पूरी तरह से विरासत में मिलती है. यह भी देखा गया है कि जिन लोगों में यह जीन वैरिएंट होता है, वे धनिया को केमिकल जैसा या परफ्यूम जैसा भी बताते हैं. धनिया पसंद करने या न करने में आपका बचपन और सांस्कृतिक अनुभव भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. जिन लोगों ने बचपन से भारतीय, मैक्सिकन, थाई या मिडिल ईस्ट फूड खाया है, उनमें धनिये की खुशबू और स्वाद बहुत प्राकृतिक लगता है. वे इसे लगातार अपने खाने में यूज करते हैं. यह परिचित स्वाद दिमाग को अच्छा लगता है.

शोधकर्ताओं की मानें तो जिन लोगों का बचपन ऐसे इलाकों में बीता जहां धनिये का इस्तेमाल कम होता है, उनके लिए इसकी तेज महक अचानक और असहज लग सकती है. कई बार यह नापसंदगी जन्मजात नहीं, बल्कि अनुभव से भी विकसित होती है. मानव विकास का इतिहास भी इस मामले में अपना प्रभाव दिखाता है. प्राचीन मनुष्य भोजन चुनते समय स्वाद और गंध पर अत्यधिक निर्भर थे. तेज, कड़वे या अनजाने पौधों को खतरे का संकेत माना जाता था. इसलिए कुछ लोग प्राकृतिक रूप से तेज गंध वाले पौधों जैसे धनिये, तुलसी या पुदीना से शुरुआत में दूरी बनाते हैं. बच्चे ऐसे स्वादों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने पर बार-बार सेवन से पसंद विकसित हो जाती है.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें

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