Animal Husbandry: मध्य प्रदेश शासन ने आदिवासी समुदाय से आने वाली विशेष जनजातियों के उन्मूलन के लिए एक अनोखी योजना शुरू की है. इसमें न सिर्फ पशुपालन की ट्रेनिंग दी जा रही, बल्कि 90 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जाएगा. राज्य सरकार की मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय कार्यक्रम ने योजना में आंशिक बदलाव किया है. इसके तहत पूरे प्रदेश से विशेष पिछड़ी जनजाति के 660 कैंडिडेट को योजना का लाभ दिया जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना में भी लक्ष्य की पूर्ति के लिए हितग्राहियों के नाम बुलाए जा रहे हैं. ऐसे में सरकार की योजना क्या है और उसमें क्या और क्यों बदलाव किए जा रहे हैं, इस बारे में इस रिपोर्ट में जानें…
साल 2023 में शुरू हुई थी योजना
राज्य सरकार ने साल 2023 में मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना की शुरुआत की थी. इसमें राज्य के 14 आदिवासी बहुल जिलों को चिन्हित किया था. इसमें अनूपपुर, उमरिया, मंडला, डिंडोरी, शिवपुरी, गुना, छिंदवाड़ा, बालाघाट, झाबुआ, धार, बडवानी सहित 14 जिले शामिल थे. इसमें खासतौर से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के कैंडिडेट को 90 प्रतिशत अनुदान पर एक गाय और भैंस दी गई थी.
इसलिए किया बदलाव
अधिकारियों के मुताबिक, साल 2023 में योजना शुरू हुई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी थी. दरअसल, योजना के लाभार्थियों के यहां पर निरीक्षण के लिए अधिकारी पहुंचे तो वह खुद हैरान रह गए. जब विभाग की टीम निरीक्षण करने पहुंची, तो उन्हें कई आदिवासियों के घर पर गाय-भैंस मिली ही नहीं. किसी ने गाय-भैंसों को कौड़ियों के दाम पर बेच दिया था, तो कुछ ने किसी और को पशु दे दिए. ऐसे मामले आने के बाद सरकार ने योजना में आंशिक बदलाव किया.
योजना में मिलेगा तगड़ा अनुदान
जिला पशु चिकित्सालय बालाघाट के वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन डॉक्टर बादल पटले ने बताया, बालाघाट में चार ब्लॉक लांजी, बिरसा, बैहर और परसवाड़ा में योजना चलेगी. दरअसल, वहीं पर बैगा जनजाति निवासरत है. ऐसे में दो गाय के लिए 1 लाख 90 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा. वहीं, शासन की तरफ 2 लाख 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता और हितग्राही को 25 हजार रुपए जमा करेंगे होंगे. आपको बता दें कि इसमें 660 हितग्राहियों को इसका लाभ मिलेगा. वहीं, बालाघाट में सिर्फ 20 हितग्राहियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा.
भैंस से पहले मिलेगी ट्रेनिंग
इस योजना में पहले पशुपालन यानी हितग्राही को भैंस पालने से पहले ट्रेनिंग दी जाएगी. इसमें भैंस या गाय के अलावा पशु बीमा तीन सालों के लिए, दवा के लिए, पशु आहार तीन महीने तक और पशु के ट्रांसपोर्ट का भी खर्च दिया गया.
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