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Balaghat News: एसपी आदित्य मिश्रा ने लोकल 18 से कहा कि अगर आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली नक्सल विरोधी अभियान में सहयोग देता है, नक्सलियों के सहयोगियों की जानकारी देता है या फिर नक्सलियों को सरेंडर करवाया या उन्हें गिरफ्तार करवाने में सही जानकारी देत है, तो राज्य सरकार उसके खिलाफ चल रहे केस वापस ले सकती है.
बालाघाट. महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में नक्सली लगातार सरेंडर कर रहे हैं. अब मध्य प्रदेश में भी एक महिला नक्सली ने सरेंडर किया है. ऐसे में सरेंडर करने वाली सुनीता ओयाम को शासन की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का फायदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिल सकता है. यह प्रक्रिया 30 दिन के भीतर राज्य-स्तरीय समिति करती है. आप सभी के मन में एक सवाल उठ रहा होगा कि क्या सरेंडर करने वाले नक्सली के सारे गुनाह माफ हो जाते हैं. दरअसल मुख्यधारा में लौटने से पहले वह ऐसे अपराधों में शामिल होते हैं, जो दूसरों के अधिकारों का उल्लघंन करते हैं. ऐसे में गंभीर अपराध करने के बावजूद सरेंडर करने पर क्या सारे अपराध माफ हो जाते हैं, यहीं जानने के लिए लोकल 18 ने बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा से बातचीत की.
सरेंडर पॉलिसी में क्या हैं प्रावधान?
मध्य प्रदेश नक्सली आत्मसमर्पण पुनर्वास सह राहत नीति 2023 के मुताबिक, सरेंडर नक्सली अगर कोई जघन्य अपराधों में शामिल रहते हैं, तो उनके अपराधों की सुनवाई अदालतों में जारी रहती है लेकिन किसी जनहित में काम करता है, तो राज्य शासन केस वापस लेने का फैसला कर सकता है. इस मामले में लोकल 18 ने एसपी आदित्य मिश्रा से बातचीत की. उन्होंने बताया कि अगर सरेंडर करने वाला नक्सली किसी गंभीर अपराध में संलिप्त है और कोर्ट में केस चल रहा है, तो वह प्रक्रिया चलती रहेगी और कोर्ट के फैसले के मुताबिक सजा का प्रावधान हो सकता है.
ऐसे हो सकती है सजा माफ
एसपी ने आगे कहा कि अगर सरेंडर करने वाले नक्सली नक्सल विरोधी अभियान में सहयोग देते हैं. नक्सलियों के सहयोगियों की जानकारी देते हैं या फिर नक्सलियों को सरेंडर करवाया या उन्हें गिरफ्तार करने में सही जानकारी देते हैं, तो राज्य सरकार उनके खिलाफ चल रहे केस वापस ले सकती है लेकिन इसमें भी अलग-अलग मामलों की समीक्षा की जाती है और राज्य शासन की समिति फैसला लेती है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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