आपका पैसा- जॉइंट होम लोन क्या है: किन फैमिली मेंबर्स के साथ ले सकते हैं, जानें जॉइंट लोन के फायदे, लोन लेने का पूरा प्रोसेस

2 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के चलते अकेले होम लोन लेना कई बार मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जॉइंट होम लोन एक ऐसा विकल्प है, जो न सिर्फ आपकी लोन लेने की क्षमता बढ़ाता है, बल्कि कई टैक्स बेनीफिट भी देता है।

अगर आप अपने पार्टनर, माता-पिता, बेटे या अन्य करीबी पर भरोसा करते हैं और मिलकर कोई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, तो जॉइंट लोन लेना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

यह सिर्फ एक साथ मिलकर EMI चुकाने की बात नहीं है, बल्कि फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा भी बन सकता है। इसमें कुछ जरूरी शर्तें होती हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

ऐसे में आज हम आपका पैसा कॉलम में जानेंगे कि जॉइंट होम लोन क्या होता है। साथ ही जानेंगे कि-

  • जॉइंट होम लोन लेने का तरीका क्या है?
  • इसके फायदे क्या हैं?
  • किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है?

सवाल- जॉइंट होम लोन क्या होता है?

जवाब- जॉइंट होम लोन एक ऐसा लोन होता है, जो दो या दो से ज्यादा लोग मिलकर लेते हैं। इस लोन को लेने वाले सभी लोग मिलकर उसकी किस्त (EMI) चुकाते हैं। आमतौर पर जब पति-पत्नी, मां-बाप और बच्चे मिलकर एक साथ कोई घर खरीदना चाहते हैं तो वे जॉइंट होम लोन लोन लेते हैं।

जॉइंट लोन लेने वाले सभी लोग घर के सह-मालिक भी होते हैं और सभी की बराबर जिम्मेदारी होती है। घर खरीदना बड़ी प्लानिंग और पैसों का काम होता है। ऐसे में अगर आपकी कमाई कम है या अकेले लोन नहीं मिल पा रहा है, तो आप अपने किसी करीबी के साथ मिलकर जॉइंट होम लोन ले सकते हैं।

सवाल- किन लोगों के साथ मिलकर जॉइंट होम लोन लिया जा सकता है?

जवाब- जॉइंट होम लोन आप अपने परिवार के साथ के लोगों के साथ मिलकर ले सकते हैं। इसमें परिवार के ये लोग शामिल हो सकते हैं।

सवाल- जॉइंट होम लोन लेने के क्या फायदे हैं?

जवाब- जॉइंट होम लोन लेने के कई सारे फायदे हैं। इसमें दोनों लोगों को टैक्स में छूट मिलती है, लोन जल्दी अप्रूव होता है और साथ ही लोन अमाउंट भी ज्यादा मिल सकता है। आइए जॉइंट होम लोन के फायदे ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

इन पॉइंट्स को विस्तार से समझें

  • जॉइंट होम लोन लेने पर आपको ज्यादा लोन अमाउंट मिल सकता है, जिससे बड़ा घर खरीदना आसान हो जाता है।
  • इसका अप्रूवल भी तेजी से होता है और 48 घंटे के भीतर पैसा खाते में ट्रांसफर हो सकता है।
  • कम ब्याज दरों का फायदा लेकर सस्ती EMI में लोन चुकाया जा सकता है।
  • लंबी अवधि वाला रिपेमेंट टेन्योर चुनने से मासिक किश्तें हल्की रहती हैं।
  • अप्रूवल के तुरंत बाद पूरा अमाउंट एक साथ ट्रांसफर होने की सुविधा भी मिलती है।
  • साथ ही हर साल 3.5 लाख रुपए तक का टैक्स बेनिफिट प्राप्त किया जा सकता है।

सवाल- जॉइंट होम लोन लेने के लिए एलिजिबिलिटी क्या है?

जवाब- जॉइंट होम लोन के लिए कुछ मापदंडों को पूरा करना जरूरी है। आइए इन्हें ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

आयु सीमा

होम लोन के लिए जॉइंट एपलीकेंट की न्यूनतम उम्र 21 साल और अधिकतम उम्र 65–70 साल तक हो सकती है। रिटायरमेंट के बाद लोन अप्रूवल मुश्किल होता है। इसलिए उम्र का ध्यान रखना जरूरी है।

रिश्ते की वैधता

जॉइंट होम लोन उन्हीं लोगों के साथ लिया जा सकता है, जिनका रिश्तेदारी का कानूनी आधार हो। जैसे – पति-पत्नी, माता-पिता और संतान, या कुछ बैंकों में भाई-बहन को भी लोन मिलता है। सभी एप्लिकेंट्स को को-ओनर्स बनना होता है।

आय का स्रोत

दोनों एप्लिकेंट्स की इनकम स्टेबल होनी चाहिए- जैसे नौकरी, बिजनेस या प्रोफेशनल आय। बैंक ये देखता है कि दोनों की आय लोन चुकाने के लिए पर्याप्त है या नहीं।

क्रेडिट स्कोर

लोन अप्रूवल में क्रेडिट स्कोर अहम भूमिका निभाता है। अगर किसी एक का स्कोर बहुत कम है, तो लोन मिलने में परेशानी आ सकती है। 700 या उससे ऊपर का स्कोर बेहतर माना जाता है।

रिपेमेंट क्षमता

लोन की EMI मिलकर चुकाई जाती है, इसलिए दोनों की संयुक्त इनकम को देखा जाता है। बैंक यह सुनिश्चित करता है कि आपकी मासिक आय से EMI भरना संभव हो।

सवाल- जॉइंट होम लेते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

जवाब- जॉइंट होम लेने से पहले कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

आपसी समझ और भरोसा

जॉइंट लोन लेने से पहले दोनों एप्लिकेंट्स के बीच मजबूत आपसी समझ होनी चाहिए। क्योंकि लोन की रकम, EMI और प्रॉपर्टी से जुड़ा हर फैसला दोनों को मिलकर लेना होता है।

प्रॉपर्टी में हिस्सा

लोन पर टैक्स छूट तभी मिलती है जब दोनों लोग प्रॉपर्टी में हिस्सेदार भी हों। केवल गारंटर या को-बॉरोअर होने से यह लाभ नहीं मिलेगा।

EMI बंटवारा

EMI कौन चुकाएगा या किस अनुपात में चुकाई जाएगी। यह पहले से स्पष्ट कर लें। इससे भविष्य में किसी तरह का विवाद या गलतफहमी नहीं होगी।

डिफॉल्ट की स्थिति

अगर किसी कारणवश EMI नहीं चुकाई जाती है, तो दोनों की क्रेडिट रिपोर्ट पर असर पड़ेगा। इसलिए समय पर भुगतान की जिम्मेदारी साझा होनी चाहिए।

टैक्स छूट की योजना

सेक्शन 80C और 24(b) के तहत दोनों को टैक्स में छूट मिल सकती है, लेकिन उसके लिए यह जरूरी है कि दोनों एपलीकेंट लोन और प्रॉपर्टी दोनों में हिस्सेदार हों।

वित्तीय फैसलों में सहमति

अगर भविष्य में लोन को ट्रांसफर करना हो, प्री-पेमेंट करना हो या टॉप-अप लेना हो, तो दोनों की सहमति जरूरी होती है। इसलिए हर बड़ा फैसला मिलकर लें।

रिश्तों में अनबन

अगर रिश्ते में किसी कारण तनाव आता है, जैसे पति-पत्नी के मामले में, तो लोन और प्रॉपर्टी की जिम्मेदारी विवाद का कारण बन सकती है। इसलिए कानूनी सलाह भी ले सकते हैं।

बैंक की शर्तें ध्यान से पढ़ें

हर बैंक या फाइनेंस कंपनी की शर्तें अलग होती हैं। प्रोसेसिंग फीस, ब्याज दर, डॉक्यूमेंटेशन, फोर क्लोजर चार्ज जैसे सभी नियमों को पहले ही समझ लें।

………………

ये खबर भी पढ़िए

आपका पैसा- क्या चेक बाउंस होने पर खराब होता सिबिल:बाउंस होने की 8 वजहें, क्रेडिट स्कोर बढ़ाना है तो ध्यान रखें ये 10 बातें

हम सब जानते हैं कि सिबिल स्कोर किसी भी लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए कितना जरूरी है। अगर यह खराब हो जाए तो न सिर्फ नया लोन लेना मुश्किल हो जाता है, बल्कि बैंक ऊंची ब्याज दर भी वसूल सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *