Last Updated:
Asthma in Youth Age : अस्थमा की बीमारी आमतौर पर बच्चों में होती है और जवान होते-होते इसके लक्षण ठीक हो जाते हैं. लेकिन क्या अस्थमा की बीमारी युवा उम्र में भी हो सकती है. हाल के दिनों में वयस्कों में अस्थमा के मामले देखे जा रहे हैं. अस्थमा के इस बढ़ते मामलों पर क्लीवलैंड क्लिनिक की डॉ. रेचेल टालियर्सियो बताती हैं कि उम्र के साथ सांस की बीमारी अधिक गंभीर और कठिन क्यों हो जाती है.यहां इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में जानते हैं.
हम सब जानते हैं अस्थमा या दमा की बीमारी बचपन में होती है. समय के साथ जवान होते ही इसके लक्षण कम हो जाते हैं. कुछ व्यक्तियों में जवानी के बाद अस्थमा की बीमारी एकदम खत्म हो जाती है जबकि कुछ लोगों में इसके लक्षण मौजूद रहते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि अस्थमा बड़ा होने के बाद भी यानी जवानी में भी शुरू हो सकता है? यह मुद्दा इसलिए मौजूं हो गया है क्योंकि आजकल कई लोग 30 या 40 साल की उम्र के बाद पहली बार अस्थमा से ग्रसित हो रहे हैं. अमेरिका की क्लीवलैंड क्लिनिक की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ.रेचेल टालियर्सियो बताती हैं कि वयस्क अवस्था में शुरू होने वाला अस्थमा यानी एडल्ट-ऑनसेट अस्थमा ज्यादा गंभीर होता है तथा यह लंबे समय तक बना रह सकता है.
बचपन और एडल्ट अस्थमा में बड़ा फर्क
डॉ.टालियर्सियो बताती हैं कि अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन जब यह बचपन की बजाय वयस्क अवस्था में शुरू हो तो इसे कंट्रोल करना ज्यादा मुश्किल हो जाता है. बचपन का अस्थमा अक्सर समय के साथ कम या पूरी तरह गायब हो जाता है लेकिन वयस्क में अगर अस्थमा हो तो यह लंबे समय तक बना रह सकता है. वयस्कों में यह इसलिए भी गंभीर होता है क्योंकि वे अक्सर शुरुआती लक्षणों जैसे सांस फूलना, खांसी या छाती में जकड़न को अनदेखा कर देते हैं. बहुत से लोग इसे थकान का असर समझ लेते हैं. लेकिन अगर आप इस बीमारी की पहचान और उपचार में देर करते हैं तो समय से पहले लंग्स की कार्यक्षमता बहुत कमजोर हो सकती है. यही कारण है कि जब किसी को जवानी में अस्थमा शुरू होता है तो उसे अस्पतालों का चक्कर ज्यादा लगाना पड़ता है.
जवानी में क्यों शुरू होता है अस्थमा
डॉ. रेचेल टालियर्सियो बताती है कि जवानी में अस्थमा शुरू होने की कई वजहें हो सकती हैं. इसके लिए परिवारिक इतिहास जिम्मेदार हो सकता है. अगर परिवार में किसी को अस्थमा है, तो आपको भी इसका खतरा रहता है.वहीं स्मोकिंग, वेपिंग या तंबाकू के धुएं से फेफड़ों में सूजन होती है और अस्थमा का जोखिम बाद में भी बढ़ जाता है. ज्यादा वजन वाले व्यक्ति को भी इसका खतरा रहता है. इसके अलावा अगर बाद में अस्थमा महिलाओं में होता है तो उसमें गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल परिवर्तन इसका कारण हो सकते हैं. धूल, परागकण, फफूंदी या पालतू जानवरों की एलर्जी से भी जवानी में अस्थमा का खतरा रहता है. जहां आप काम करते हैं, अगर वहां की फैक्ट्रियों से खतरनाक केमिकल, धूल और धुआं निकलते हैं तो इससे लंग्स सेंसेटिव हो जाता है और उस स्थिति में भी अस्थमा का खतरा रहता है.
एडल्ट अस्थमा को कैसे मैनेज करें
डॉ. रेचेल के मुताबिक सबसे पहले तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए. अस्थमा के मरीजों को अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन सख्ती से करना चाहिए और अपने ट्रिगर्स से बचना चाहिए. इसे मैनेज करने के लिए नियमित दवाओं का सेवन करें. इनहेलर या बायोलॉजिक दवाओं को समय से लें. अपने डॉक्टर को हमेशा बताएं कि आप कौन-कौन सी दवाएं या सप्लीमेंट ले रहे हैं. लंग्स फंक्शन पर निगरानी रखें.डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराएं या घर पर पीक फ्लो मीटर से फेफड़ों की क्षमता मापें. रिस्क्यू इनहेलर का सही उपयोग करें. अगर मांसपेशियों की कमजोरी से उपयोग मुश्किल हो, तो नेब्युलाइजर पर चर्चा करें. सर्दी, फ्लू या COVID जैसे संक्रमण फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए इस स्थिति में तुरंत परामर्श लें. किसी भी हाल में स्मोकिंग, तंबाकू, गुटखा को हाथ न लगाएं. रोजाना एक्सरसाइज करें.
Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at News18. His role blends in-dep…और पढ़ें
Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at News18. His role blends in-dep… और पढ़ें