भारत रूस से कच्चे तेल का आयात घटाएगा: रिलायंस रूस की सरकारी कंपनी से तेल खरीदना कम करेगी; अमेरिकी प्रतिबंधों का असर

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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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भारत अब रूस से कच्चे तेल के आयात में कटौती करने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक सरकार ने यह फैसला अमेरिका के रूस पर नए प्रतिबंधों के बाद लिया है। ये प्रतिबंध 21 नवंबर से लागू हो रहे हैं।

वहीं डेटा रिसर्च फर्म केप्लर के मुताबिक भारत के प्रमुख रिफाइनर अब अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस से तेल नहीं खरीदेंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट से तेल खरीद बंद करेगी।

वहीं मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड भी रुसी तेल खरीदी को घटाएगी। इसके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम की कंपनी एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL) पहले ही रूसी तेल का आयात बंद कर चुकी है।

इन तीनों कंपनियों की हिस्सेदारी भारत के कुल रूसी कच्चे तेल आयात में 50% से ज्यादा ज्यादा रही है। हालांकि देश में बीते महीने अक्टूबर में रशियन क्रूड ऑयल का इंपोर्ट 2.5% बढ़ा है।

भारत तेजी से घटाएगा रूसी तेल की खरीद

केप्लर के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रतोलिया ने बताया कि ज्यादातर भारतीय रिफाइनर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करेंगे और रूस से सीधी खरीद घटाएंगे या बंद करेंगे। दिसंबर में आयात में तेज गिरावट होगी, जो 2026 की शुरुआत तक धीरे-धीरे सुधर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में रूसी तेल की डिलीवरी में बड़ी गिरावट दिखेगी, हालांकि 2026 की पहली तिमाही में नए बिचौलियों और वैकल्पिक रूट्स के जरिए सप्लाई फिर शुरू होने की उम्मीद है।

रूसी कंपनियों पर सैंक्शंस 21 नवंबर से लागू

अमेरिकी ट्रेजरी ने 21 नवंबर 2025 तक का समय दिया है। इस अवधि में कंपनियों को रोसनेफ्ट और लुकोइल के साथ लेन-देन समाप्त करने होंगे। अगर पालन न किया गया, तो जुर्माना, ब्लैकलिस्टिंग या व्यापार प्रतिबंध लग सकते हैं। अमेरिकी संस्थाओं को अब इन कंपनियों के साथ किसी भी तरह का व्यापार करने से रोक दिया गया है।

महंगे कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं

रूसी तेल सस्ता था, अब मध्य पूर्व या अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल लेना पड़ेगा, जो महंगे हैं। भारत की कुल आयात में रूसी तेल का बड़ा हिस्सा था, इसलिए रिफाइनिंग लागत बढ़ेगी और पेट्रोल-डीजल के दामों पर भी इसका असर दिख सकता है।

रूस-यूक्रेन जंग के बाद से भारत रूसी तेल खरीद रहा

2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद रूसी तेल सस्ता हो गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, और रूसी तेल ने इसकी जरूरतों को सस्ते में पूरा किया। लेकिन अब सैंक्शंस के कारण उसे रूसी तेल खरीद कम करनी पड़ सकती है।

भारतीय सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 से देश ने लगभग 140 अरब डॉलर मूल्य का डिस्काउंटेड रूसी तेल खरीदा है। इसे रिलायंस और दूसरी कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल में प्रोसेस किया और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा।

ट्रम्प बोले- भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा

व्हाइट हाउस में बुधवार, 22 अक्टूबर को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने 5वीं बार कहा, “तेल खरीदना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे तुरंत रोकना संभव नहीं है, लेकिन साल के अंत तक वे इसे जीरो कर देंगे। मेरी प्रधानमंत्री मोदी से इस बारे में बातचीत हुई है।

ट्रम्प ने भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था

इससे पहले अगस्त में ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया था। 27 अगस्त से भारत पर कुल 50 टैरिफ लग रहा है। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है।

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