ये है असली देसी मिठास! महेश्वर की मावा बर्फी खाते ही आ जाएगी बरेली की याद, 55 सालों से स्वाद का बेताज बादशाह

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Khargone News: सबको पता है कि बरेली की बर्फी का स्वाद बहुत ही लाजवाब होता है, लेकिन आज हम आपको महेश्वर की मावा बर्फी चखाएंगे, जिसका स्वाद 55 सालों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है.

हाइलाइट्स

  • कृष्णा स्वीट्स की मावा बर्फी
  • सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि स्वाद
  • देसी दूध से बने ताजे मावे
खरगोन. मिठाई वो चीज है, जो हर किसी को पसंद है. किसी को काजू कतली लुभाती है, तो किसी को गुलाब जामुन, लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगरी महेश्वर में एक ऐसी मिठाई है, जिसने बरसों से लोगों की जुबान पर अपनी मिठास कायम रखी है. यहां की मावा बर्फी उतनी ही फेमस है, जितनी बरेली की बर्फी. आज भी उतनी ही स्वादिष्ट है, जितनी 55 साल पहले थी. दरअसल, महेश्वर के किला के नजदीक कृष्णा स्वीट्स नाम की दुकान को स्थानीय लोग आज भी ‘प्यारा भाई की मिठाई’ कहते हैं.

यहां मिलने वाली मावा बर्फी सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती आ रही परंपरा, भरोसा और स्वाद की मिशाल है. दुकान की नींव प्यारेलाल सोलंकी ने 1960 के दशक में रखी थी. आज उनके बेटे प्रीतम सोलंकी उसी स्वाद और गुणवत्ता को बिना बदले आगे बढ़ा रहे हैं. प्रीतम बताते हैं, हमारी मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें न दिखावे का तामझाम है, न ब्रांडिंग, सिर्फ शुद्धता और वही पुरानी रेसिपी, जो स्वाद बचपन में लोगों ने खाया था, वही स्वाद आज भी मिलता है.

बर्फी के लिए लगती है लाइन
यहां हर सुबह करीब 7 किलो मावा बर्फी बनाई जाती है. खास बात यह है कि बनते ही चंद घंटों में मिठाई पूरी बिक जाती है. मिठाई की डिमांड इतनी है कि कई बार ग्राहक दुकान खुलने से पहले ही लाइन में लग जाते हैं.  बता दें कि, मात्र 400 रुपये किलो की कीमत वाली यह बर्फी दिखने में साधारण नजर आती है, लेकिन स्वाद ऐसा कि एक बार खाकर कोई दूसरा विकल्प सूझता ही नहीं. ग्राहकों का कहना है कि “यह बर्फी बाकी मावा बर्फियों से अलग है. इसमें मिठास संतुलित है, मावा की खुशबू ताजी रहती है और खाकर हलकापन महसूस होता है.

मावा बर्फी की खास रेसिपी
दुकानदार बताते है कि, इस मिठाई को बनाने की विधि कोई बहुत स्पेशल नहीं है, लेकिन इसमें जो खास नुस्खा प्रयोग होता है, वो किसी को नहीं बताते. यही खानदानी राज इसे दूसरों से अलग बनाता है. प्रीतम का कहना है कि, हम इसमें मिलावटी या बाजार से खरीदा हुआ मावा इस्तेमाल नहीं करते हैं. देशी दूध से बना ताजा मावा और हमारा परंपरागत तरीका ही मिठाई के स्वाद का राज़ है. तभी तो पूरे जिले में मिठाई ले स्वाद के चर्चे होते है. यहां आने वाले पर्यटक भी एक बार मिठाई जरूर चखते है.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digiatal), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked …और पढ़ें

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महेश्वर की मावा बर्फी खाते ही आ जाएगी बरेली की याद, 55 सालों से स्वाद का राजा

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