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- Lesson Of Ramayana, Ram Sita And Laxman Story, Life Management Tips In Hindi, To Maintain Peace And Happiness In The Family, We Should Keep Talking About Detachment, Knowledge And Devotion.
4 घंटे पहले
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रामायण में श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का वनवास चल रहा था। इस दौरान वे पंचवटी पहुंच गए थे। पंचवटी में इनकी मुलाकात जटायु से हुई। श्रीराम जटायु से बड़े प्रेम से मिले थे।
जटायु भी श्रीराम से मिलकर बहुत प्रसन्न थे। इसके बाद श्रीराम ने पंचवटी में अपना निवास बनाया, राम जी के आने से इस क्षेत्र के सभी ऋषि-मुनि बहुत सुखी हो गए थे, क्योंकि वहां राक्षसों का आतंक खत्म हो गया था।
श्रीराम का व्यक्तित्व बहुत दिव्य था। इस कारण पंचवटी का प्राकृतिक वातावरण भी बहुत अच्छा हो गया था और कई नए पशु-पक्षी पंचवटी के आसपास आकर रहने लगे थे।
एक दिन श्रीराम, लक्ष्मण और सीता अपनी कुटिया में बैठे थे तो उस समय लक्ष्मण ने श्रीराम से कहा कि मेरे मन में एक प्रश्न है। आप उत्तर दीजिए। माया क्या है?
श्रीराम बोले कि मैं तुम्हें संक्षेप में समझाऊंगा, क्योंकि तुमने जो प्रश्न पूछा है, उसका उत्तर तो बहुत विस्तार से भी दिया जा सकता है, लेकिन मैं तुम्हें संक्षिप्त में बताऊंगा। माया में ही मन उलझा रहता है और जहां तक हमारा मन जाता है, वहां तक माया रहती है। माया से बचना हो तो हमें मन को नियंत्रित करना चाहिए।
इसके बाद श्रीराम ने लक्ष्मण को वैराग्य, ज्ञान और भक्ति के बारे में भी बताया। श्रीराम ने पंचवटी में तीन खास काम किए थे। सबसे पहले श्रीराम जटायु से मिले। फिर ऋषि-मुनियों से मिले, पशु-पक्षियों को आनंदित किया। इसके बाद अपने परिवार में बैठकर ज्ञान, वैराग्य, नीतियों की बातें कीं।
श्रीराम की सीख
- रिश्तों में प्रेम और सम्मान बनाए रखें। पंचवटी में श्रीराम की मुलाकात जटायु से हुई। जटायु एक वृद्ध पक्षी था, जिसने बाद में सीता हरण के समय रावण से युद्ध किया और अपने प्राणों की आहुति दी। श्रीराम ने जब जटायु को देखा, तो वे उनसे बड़े प्रेम से मिले। श्रीराम ने संदेश दिया है कि रिश्तों में उम्र, स्थिति या रूप देखकर प्रेम नहीं करना चाहिए, बल्कि सभी से प्रेम और सम्मान के साथ मिलना चाहिए। अपने आसपास के लोगों से समानता और स्नेह के साथ व्यवहार करें।
- अपने आसपास सकारात्मकता बनाए रखें। श्रीराम के आगमन से पंचवटी का वातावरण सकारात्मक हो गया था। पहले जहां राक्षसों का आतंक था, वहां अब ऋषि-मुनि शांति का अनुभव करने लगे थे। पशु-पक्षी भी आनंदित होकर वहां आने लगे। श्रीराम ने संदेश दिया है कि हमें सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए। हमारे विचार अच्छे होंगे तो हमारे आसपास का वातावरण सुखद रहेगा।
- परिवार में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की बातें करनी चाहिए। ऐसी बातों में सुख-शांति बनी रहती है। एक दिन पंचवटी में श्रीराम, लक्ष्मण और सीता अपनी कुटिया में बैठे थे। उस समय लक्ष्मण ने श्रीराम से प्रश्न किया, “माया क्या है?” ये प्रश्न केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि जीवन के मूल स्वभाव से जुड़ा हुआ था। श्रीराम ने कहा था कि जहां तक मन जाता है, वहां तक माया रहती है। इसका अर्थ ये है कि जब तक हमारा मन बाहरी संसार की इच्छाओं में उलझा रहता है, हम भ्रम और असंतोष में जीते हैं। लेकिन जब मन शुद्ध होता है, तब ज्ञान और शांति आती है।
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