ये चमगादड़ अंधेरे में चमकते हैं, वो भी हरे रंग में; वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाए

अमेरिका में इस बार हैलोवीन पर सिर्फ प्लास्टिक या कागज के बने नकली चमगादड़ ही नहीं, बल्कि असली चमगादड़ भी सबका ध्यान खींच रहे हैं. वजह है उनकी चमक. यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के वैज्ञानिकों ने अपनी नई रिसर्च में बताया है कि कुछ असली चमगादड़ अल्ट्रावॉयलेट लाइट (UV Light) में हरे रंग की अजीब सी रोशनी बिखेरते हैं.

रिसर्च ‘इकोलॉजी एंड इवॉल्यूशन’ नाम की वैज्ञानिक पत्रिका में छपी है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका की छह अलग-अलग प्रजातियों के चमगादड़ों में यह खास चमक देखी गई है. यानी यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि नेचर का छिपा हुआ पुराना राज़ है.

हर चमगादड़ में दिखी एक जैसी हरी चमक
वैज्ञानिकों ने बताया कि हर चमगादड़ में यह रोशनी बिल्कुल एक जैसी दिखी. उम्र, लिंग या प्रजाति से कोई फर्क नहीं पड़ा. हर एक चमगादड़ के पंख, पिछले पैर और पूंछ के हिस्से से हरे रंग की रोशनी निकलती दिखाई दी.

इससे वैज्ञानिकों को शक हुआ कि यह गुण शायद किसी कॉमन एंसेस्टर यानी पुरखों से आया है. यानी, बहुत पहले यह चमक किसी काम की रही होगी लेकिन वक्त के साथ इसकी ज़रूरत खत्म हो गई. अब यह गुण बस एक पुराने निशान की तरह रह गया है, जैसे किसी मशीन में पुराना बटन जो अब दबाने पर काम नहीं करता.

चमक दिखती है, पर शायद कोई नहीं देखता
इस पूरी खोज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये चमगादड़ ऐसी जगह रहते हैं जहां अल्ट्रावॉयलेट लाइट होती ही नहीं. मतलब उनके आसपास मौजूद दूसरे चमगादड़ भी इस चमक को देख ही नहीं पाते.

तो फिर ये चमक आखिर क्यों है?
रिसर्च टीम के सदस्य स्टीवन कैसलबेरी का कहना है कि यह एक तरह का इवॉल्यूशनरी फॉसिल हो सकता है यानी प्रकृति की पुरानी खासियत जो अब काम की नहीं रही, लेकिन मिटाई भी नहीं गई.

उड़ान के दौरान दिखने वाले हिस्से ही चमकते हैं
वैज्ञानिकों ने एक और दिलचस्प बात नोट की शरीर के वही हिस्से ग्लो करते हैं जो उड़ान के दौरान सबसे ज़्यादा दिखते हैं. इससे यह शक और गहरा हो गया कि कभी यह चमक किसी अहम काम की रही होगी.

संभावना यह है कि कभी यह रोशनी चमगादड़ों को उड़ान के दौरान झुंड में रहने, साथी चमगादड़ों से बात करने या फिर शिकारी जानवरों को भ्रमित करने में मदद करती रही हो. हालांकि, अभी तक इन सब बातों की पुष्टि नहीं हुई है.

अब जिंदा चमगादड़ों पर होगी अगली जांच
अब वैज्ञानिकों की टीम अगला कदम उठाने जा रही है. वे यह रिसर्च अब जिंदा चमगादड़ों पर करेंगे. वे देखना चाहते हैं कि क्या यह ग्लो चांदनी या दूसरी हल्की रोशनी में भी दिखाई देता है और क्या चमगादड़ एक-दूसरे की इस रोशनी पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं.

अगर ऐसा होता है तो यह एक नई खोज होगी- शायद चमगादड़ एक-दूसरे से बिना आवाज़ किए कोई लाइट लैंग्वेज यानी रोशनी की भाषा में बात करते हों.

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