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Apple Growth Tips: बागवानी का शौक रखने वाले लोग अब घर बैठे ही सेब उगा सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, छतरपुर की जलवायु को देखते हुए सेब की हरिमन 99 किस्म बेस्ट साबित हो रही है. अपने घर के बगीचे या गमले में कैसे लगाएं सेब? आइए जानते हैं एक्सपर्ट से.
आजकल लोग अपने घरों में बहुत से पौधे लगाते हैं जिसमें फूल से लेकर फलदार पौधे होते हैं. यहां तक कि अब लोग अपने घरों में आम-अमरूद से लेकर अंगूर केले जैसे फल भी तैयार कर रहे हैं. लेकिन इन फल-फूल पौधों के अलावा घर में सेब पौधा भी तैयार कर सकते हैं.

छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ डॉक्टर कमलेश अहिरवार लोकल18 को बताते हैं कि छतरपुर की जलवायु को देखते हुए सेब की हरिमन 99 किस्म बेस्ट साबित हो रही है. यह गर्म और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों सहित भारत के विभिन्न जलवायु में भी उगाया जा सकता है. यह एक बौनी किस्म है जो बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है और मीठे-तीखे स्वाद वाले, रसदार सेब देती है.

डॉ कमलेश बताते हैं कि इस पौधे को लगाने से पहले उसकी <!–StartFragment –><span class=”cf0″>पॉलीथीन </span>को सावधानी से हटाना जरूरी है. इसके बाद गमले की मिट्टी में वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर खाद अच्छी तरह मिलाकर पौधे को सेट कर लेना चाहिए.

गमले का आकार कम से कम 18 से 20 इंच होना चाहिए, तभी पौधा स्वस्थ रूप से विकसित हो पाएगा. शुरुआती चरण में गोबर खाद का उपयोग अधिक लाभकारी होता है लेकिन शहरों में इसकी कमी के चलते वर्मी कम्पोस्ट भी इस्तेमाल किया जा सकता है. दोनों खाद का मिश्रण पौधे की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है.

उन्होंने कहा कि पौधा लगाने के एक से दो महीने बाद इसमें पोषण के लिए नीम खली, सरसों खली, डीएपी, बोन मील और सुपर फॉस्फेट जैसी खाद डालना जरूरी है. ये खाद पौधे की ग्रोथ को तेज करती है और फल आने की प्रक्रिया को बढ़ावा देती है. सही देखभाल के साथ यह पौधा लगभग एक साल बाद फल देना शुरू कर देता है और दूसरे साल खाने लायक हो जाता है.

घर में सेब पौधा उगाने का जीगता-जागता उदाहरण छतरपुर के नौगांव जनपद के नेगुवां गांव में देखने को मिला है, जहां एक किसान रिंकू पाठक ने 2 साल पहले 5 सेब के पौधे लगाए थे. आज 5 में से 3 सेब के पौधे फल दे रहे हैं.

रिंकू बताते हैं कि सेब के पौधे लगाने के लगभग 1 साल बाद ही यह फलने लगे थे. पिछले 3 साल से सेब के पौधों में फल आ रहे हैं. इस बार सबसे ज्यादा फल आए हैं. हालांकि, अभी फल छोटे साइज के हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद ये बड़े हो जाएंगे. इनका कहना है कि छतरपुर जैसे गर्म इलाके में भी ठंडे प्रदेश का ये फल उगाया जा सकता है.

हालांकि, डॉ कमलेश का ये भी कहना है कि छतरपुर बुंदेलखंड की जलवायु गर्म है. पूरे बुंदेलखंड रीजन के साथ ही कोई सा भी रीजन हो वहां सेब लगाना पॉसिबल तो है लेकिन उसमें प्रोडक्शन नहीं मिल पाता है. अगर आप खेती करना चाहते हैं तो आपको कश्मीर जैसा सेब का प्रोडक्शन नहीं मिलेगा. क्वालिटी में भी फर्क देखने को मिलता है. क्योंकि सेब एक टेंपरेट फ्रूट है यानी कि शीतोष्ण मौसम वाला फ्रूट है.
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