फेफड़ों, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाए ये प्राणायाम, उम्र भी करे लंबी, जानें फायदे और अभ्यास का सही तरीका

Dirga pranayama Benefits: फिल्म ‘अवतार: द वे ऑफ वाटर’ अगर आपने देखी है, तो आपको एक सीन याद होगा, जिसमें हीरो के बच्चों को पानी के नीचे सांस लेने की कला सिखाई जाती है. इसमें उन्हें ‘दीर्घ प्राणायाम’ करना भी सिखाया जाता है. दरअसल, दीर्घ प्राणायाम एक खास तरह का श्वास अभ्यास है, जिससे फेफड़ों को मजबूती मिलती है. इसकी ताकत बढ़ती है. शरीर में ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है. ‘दीर्घ प्राणायाम’ भारतीय परंपरा का हिस्सा है, जिसे सदियों से योग में जगह मिली हुई है. दीर्घ प्राणायाम के फायदे क्या होते हैं, जानिए यहां.

दीर्घ प्राणायाम के फायदे

-दीर्घ प्राणायाम करने से आपकी उम्र लंबी हो सकती है. यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. हर दिन इस सांस लेने वाले योगासन का अभ्यास करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है. शरीर को सही से और भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है. इससे न केवल शरीर तंदुरुस्त रहता है, बल्कि बुढ़ापा भी देरी से आता है.

-यह प्राणायाम छाती, फेफड़ों और मांसपेशियों को मजबूत करता है. गहरी सांस भरने से फेफड़े पूरी तरह फैलते हैं. इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है. सांस से जुड़ी मांसपेशियां भी सक्रिय हो जाती हैं. इससे शरीर को अच्छा सपोर्ट मिलता है.

-दीर्घ प्राणायाम करने से तनाव कम हो सकता है. इससे मन शांत होता है. दिमाग रिलैक्स होता है. जब हम गहराई से सांस लेते हैं, तो दिल की धड़कन सामान्य होती है. चिंता, चिड़चिड़ापन या बेचैनी दूर होती है.

-जब फेफड़े पूरी क्षमता से काम करते हैं, तो हर अंग तक ऑक्सीजन ठीक से पहुंचता है. इससे थकान कम होती है. शरीर ऊर्जावान महसूस करता है. शरीर में जमा दूषित तत्व बाहर निकलते हैं. इससे शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है.

-दीर्घ प्राणायाम दिमाग को स्थिर करता है. इससे ध्यान केंद्रित रहता है. पढ़ाई या काम में मन लगता है. एकाग्रता बढ़ाने और अनिद्रा से छुटकारा दिलाने में भी बहुत कारगर है.

दीर्घ प्राणायाम करने की विधि

दीर्घ प्राणायाम करने के लिए शांत जगह पर आसन बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं. दोनों हाथों की हथेलियां पेट पर रखें. दोनों हाथों की बीच की उंगलियां नाभि के पास एक-दूसरे को छू रही हों. धीरे-धीरे सांस छोड़ें. पेट को ढीला छोड़ दें. सांस लेते हुए पेट को धीरे-धीरे फुलाएं. इस क्रिया को करीब 5 मिनट तक दोहराएं. सांस लेते वक्त ध्यान दें कि पहले सांस छाती में जाए, फिर पसलियों में और आखिर में पेट तक पहुंचे. सांस छोड़ते वक्त भी इसी क्रम का ध्यान रखें. सांस लेते वक्त कंधे ऊपर की ओर उठेंगे और छोड़ते वक्त नीचे आएंगे.

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