कितने दिन जिंदा रहता है 1 किडनी के साथ जन्मा बच्चा? दूसरी करानी पड़ती है ट्रांसप्लांट? एक्सपर्ट ने दिया जवाब

Can a person live normally with one kidney: आजकल बढ़ती किडनी की बीमारियों के चलते ऐसे बहुत सारे मामले सामने आते हैं जब मरीजों की एक किडनी काम करना बंद कर देती है या खराब होने की वजह से निकाल दी जाती है और मरीज को सिर्फ एक किडनी और दवाओं के सहारे जीवन जीना होता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी दुनिया में जन्म लेने वाले प्रति 1 हजार बच्चों में से एक बच्चा ऐसा भी होता है जो दो के बजाय सिर्फ एक ही किडनी लेकर पैदा होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा बच्चा कितने दिन तक जिंदा रह सकता है? क्या उस बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए दूसरी किडनी ट्रांसप्लांट करानी पड़ती है? या उसे जीवन भर दवाएं खानी पड़ती हैं?

इस बारे में बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बच्चों का जन्म एक ही किडनी के साथ होता है , उसे मेडिकल भाषा में यूनिलैटरल रीनल एजेनेसिस कहा जाता है. वैश्विक स्तर पर, लगभग हर 1,000 बच्चों में से 1 बच्चा केवल एक किडनी के साथ जन्म लेता है, जबकि उतने ही मामलों में दो किडनी होने के बावजूद केवल एक ही सही तरीके से काम करती है, लेकिन इन्हें दूसरी किडनी ट्रांसप्लांट कराने की जरूरत नहीं होती.

मेदांतामेडिसिटी गुरुग्राम के पीडियाट्रिक सर्जरी और पीडियाट्रिक यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. संदीप कुमार सिन्हा कहते हैं कि जब अभिभावकों को पता चलता है कि उनके बच्चे के पास एक ही किडनी है तो वे अक्सर चिंतित हो जाते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि इनमें से अधिकांश बच्चे बिल्कुल सामान्य जीवन जीते हैं. एक स्वस्थ किडनी दोनों का काम कर सकती है. क्योंकि यह एक ही किडनी अक्सर अपने आकार में बढ़ जाती है ताकि दोनों किडनियों के भार को संभाल सके. इस प्रक्रिया को कंपेंसेटरी हाइपरट्रॉफी कहा जाता है.

डॉ सिन्हा आगे कहते हैं कि नियमित जांच और कुछ जीवनशैली सावधानियों के साथ, वे किसी भी अन्य बच्चे की तरह सभी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं और उनका लुत्फ उठा सकते हैं. आजकल आधुनिक प्रेनेटल इमेजिंग (गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड) तकनीकों के चलते अब कई मामलों का पता जन्म से पहले ही लग जाता है, जिससे परिवार शुरू से ही पर्याप्त देखभाल करना शुरू कर देता है, लेकिन जिन मामलों में पता बाद में लगता है तो उस स्थिति में भी जीवन सामान्य चल सकता है.

पता चलने पर क्या करना चाहिए

बाल रोग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन बच्चों में एक किडनी का पता चल गया है तो ऐसे बच्चों का ब्लड प्रेशर और यूरीन में प्रोटीन की मात्रा की हर साल जांच कराई जानी चाहिए. ताकि उनकी किडनी की कार्यक्षमता पर नजर रखी जा सके. इन जांचों को करने से किडनी पर तनाव या शुरुआती नुकसान के संकेत (जैसे प्रोटीन का रिसाव या बढ़ा हुआ बीपी) का जल्द पता लगाकर उसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है.

ऐसे बच्चों को नियमित निगरानी जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बच्चों को सावधानी में ही जीना होगा. हम ऐसे बच्चों को खेलकूद, सामाजिक गतिविधियों और सामान्य जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, बस थोड़ी अतिरिक्त जागरूकता की जरूरत होती है.

क्या खान-पान पर लग जाती है रोक

इंडियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी के एक्सपर्ट्स के अनुसार एक किडनी वाले बच्चों को आमतौर पर किसी विशेष आहार या लाइफस्टाइल बैन की जरूरत नहीं होती. अधिकांश खेल पूरी तरह सुरक्षित हैं, हालांकि कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स जैसे फुटबॉल या मार्शल आर्ट्स में सुरक्षा उपकरण या चिकित्सकीय परामर्श जरूरी हो सकता है. फुटबॉल, तैराकी और साइक्लिंग जैसे खेल आमतौर पर सुरक्षित और लाभदायक होते हैं, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होते हैं.

एक किडनी की क्या है वजह?

रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित अग्रवाल कहते हैं कि कभी-कभी, एक किडनी के साथ जन्म लेना किसी बड़े सिंड्रोम का हिस्सा हो सकता है, जिसमें अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में यह स्थिति अकेले होती है और बच्चे के विकास पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालती. कुछ विशेष मामलों में जेनेटिक काउंसलिंग की सलाह दी जाती है ताकि परिवार में संभावित रिस्क का आकलन किया जा सके. हालांकि परिवारों को सटीक जानकारी देकर सशक्त बनाना सबसे जरूरी है. एक किडनी वाला बच्चा किसी सीमा से परिभाषित नहीं होता, बल्कि अपनी दृढ़ता और जीवन शक्ति से आगे बढ़ता है.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *