सातवीं पास युवा किसान गेंदे के फूलों की खेती कर हर साल करीब चार लाख रुपए तक कमा रहा है। इसके अलावा, सब्जियों को मिलाकर हर साल 10 लाख रुपए की कमाई कर रहा है। वह मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र में फूलों की सप्लाई करता है।
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इस बार दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में बात बड़वानी के सेंधवा से 35 किलोमीटर दूर चाचरिया के नवाड फलिया के रहने वाले सुनील अलावे की। सुनील चार एकड़ जमीन में फूलों की खेती करते हैं। दूर-दूर से उन्हें ऑर्डर मिलते हैं। उनकी सफलता की कहानी खुद सुनील की जुबानी जानते हैं…
युवा किसान सुनील अलावे ने तीन एकड़ में गेंदा लगाया है।
यूट्यूब और दूसरे किसानों से सीखे गुर… 30 साल के किसान सुनील बताते हैं कि 7वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। परिवार में माता-पिता, पत्नी और छोटा भाई है। सभी लोग खेती में हाथ बंटाते हैं। पिता की पांच एकड़ जमीन है। वह पारंपरिक फसल कपास और सोयाबीन) करते थे। पांच साल पहले उन्होंने आसपास के किसानों को सब्जी और फूलों की खेती करते देखा था। इसके बाद इस खेती में हाथ आजमाया।
साल 2018 में खेती शुरू की। सब्जियों की खेती भी कर रहे थे। कोरोना के कारण ज्यादा ध्यान दिया। पहले स्थानीय स्तर पर बीज खरीदकर करीब एक हजार पौधे लगाए। अच्छा उत्पादन नहीं मिला। नुकसान भी हुआ। फिर भी हार नहीं मानी। अलग-अलग नर्सरी से जानकारी ली। किसानों से खेती के गुर सीखे।
महाराष्ट्र के पुणे से ड्रीम येलो वैरायटी के 10 हजार पौधे बुलाए। इसके अलावा, रतलाम से किमको ओ प्लस वैरायटी के पौधे बुलाए। इसके बाद मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद मल्चिंग पद्धति से खेती शुरू की। सिंचाई के लिए ड्रिप का इस्तेमाल किया। साल 2020 के बाद से लगातार फूलों की खेती कर रहे हैं।
सालभर एक एकड़ में फूल उगाते हैं। इसके अलावा तरबूज, खीरा, ककड़ी समेत अन्य सब्जियों की खेती करते हैं। त्योहारी सीजन को देखते हुए फूलों की खेती को बढ़ा देते हैं। नवरात्रि से पहले करीब तीन एकड़ में गेंदा लगाते हैं, जिससे नवरात्रि, दशहरा, दिवाली पर अच्छा मुनाफा मिलता है।

सुनील ने महाराष्ट्र के नंदुरबार में भी तीन एकड़ पर गेंदा लगाया है। इससे चार लाख मुनाफे की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश समेत महाराष्ट्र तक सप्लाई सुनील ने बताया कि वर्तमान में फूल खरगोन, बड़वानी, इंदौर समेत महाराष्ट्र में भी सप्लाई किए जाते हैं। खरगोन जिला मुख्यालय पर रोजाना 40 से 50 किलो फूल भेजते हैं। दिवाली जैसे त्योहारों पर दूर-दूर से ऑर्डर मिलते हैं। हर साल तीन से चार एकड़ में फूलों की खेती करते हैं, जिस पर करीब एक लाख रुपए का खर्च आता है। खेती के लिए महाराष्ट्र से तैयार पौधे लाकर रोपाई करते हैं।
फसल को कीटों से बचाने के लिए दो से तीन बार दवा का छिड़काव किया जाता है। गेंदे की फसल 90 दिनों में तैयार हो जाती है। 60 दिन में उत्पादन शुरू हो जाता है। इसका उत्पादन करीब दो महीने तक चलता है, जो आमतौर पर नवरात्रि से लेकर दीपावली के बाद तक जारी रहता है। हमसे प्रेरणा लेकर आसपास के 20 से अधिक किसानों ने भी फूलों की खेती शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र में तीन एकड़ खेती में गेंदा उगाया सुनील अलावे ने बताया कि इस साल करीब 150 किमी नंदुरबार जिले के दौंडाइचा के पास करीब तीन एकड़ खेत किराए पर लिया है। वहां सिर्फ गेंदे की खेती की है। वहां से करीब 30 से 40 क्विंटल से ऊपर उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे करीब 4 लाख रुपए तक मुनाफा होगा। दिवाली पर करीब 20 क्विंटल से अधिक का उत्पादन हो चुका है। करीब 80 से 100 प्रति किलो तक का भाव मिला है।

पौधों को फफूंद से बचाने की चुनौती गेंदे के पौधों में केवल फफूंद रोग लगता है। इससे इसके पत्तों पर सफेद रंग की परत जमने लगती है। इसके अलावा तने के अंदर काले रंग का रोग शुरू होता है। हालांकि, यह रोग कभी-कभी आता है। तने काले होने का रोग लगने के बाद से फसलें चौपट होने लगती हैं, जबकि सफेद रंग की फफूंदी कई बार हो जाती है, लेकिन वह आसानी से सही हो जाती है।
जून-जुलाई में लगाए जाते हैं पौधे जून के आखिरी और जुलाई के शुरुआती दिनों में गेंदा फूल के पौधे लगाए जाते हैं, जो अगस्त के आखिरी दिनों में फूल देने लगते हैं। इसके बाद ढाई महीने तक इन पौधों से फूल मिलता रहता है। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में भी कुछ दिनों तक फूल लगते रहते हैं। शुरुआती दिनों में अधिक फूल टूटते हैं।

सुनील ने बताया कि गेंदे की फूल की डिमांड 12 महीने रहती है।
अगस्त के महीने में भी लगा दिए फूलों की डिमांड बाजार में 12 महीने बनी रहती है। इस वजह से दो महीने के अंतर से फूलों की खेती करते रहते हैं। अगस्त के महीने में भी नए पौधे लगाए, जो अक्टूबर तक फूल देने लगते हैं। शादी का सीजन शुरू होते ही फूलों की डिमांड अधिक हो जाती है। इसमें गेंदा के साथ और भी कई प्रकार के फूलों की मांग रहती है।
मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.6 तक होना चाहिए ठंड के मौसम में गेंदा की बढ़ोतरी और फूलों की गुणवत्ता दोनों अच्छी होती है। इस वजह से यह मौसम इसके लिए अनुकूल माना गया है। वैसे इसकी खेती मानसून, सर्दी और गर्मी तीनों मौसम में की जा सकती है। गेंदा की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है।
गेंदा के लिए मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.6 के बीच होना चाहिए। गेंदा की फसल को धूप की बहुत जरूरत होती है। छांव में होने पर इसके पौधों में बढ़ोतरी अच्छी होती है, लेकिन फूल नहीं लगते, इसलिए गेंदा की खेती खुले जगह पर करनी चाहिए।


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