हॉर्वर्ड, McKinsey को छोड़ा, ऐप बनाया… बन गया 20,000 करोड़ की कंपनी का मालिक

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हॉर्वर्ड और McKinsey जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं को छोड़कर सीजर कार्वाल्हो ने एक वेलनेस ऐप शुरू किया. आज उनकी कंपनी Wellhub की वैल्यू 20 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है.

वेलहब के सह-संस्थापक और सीईओ सीजर कार्वाल्हो. (Image:Wellhub)
न्यूयॉर्क. क्या आप सोच सकते हैं कि कोई शख्स हॉर्वर्ड बिजनेस स्कूल की पढ़ाई और McKinsey जैसी टॉप कंपनियों की नौकरी को छोड़कर खुद का ऐप बनाए और कुछ ही सालों में वो कंपनी ₹20 हजार करोड़ (करीब 2.4 अरब डॉलर) की हो जाए? यह कहानी है ब्राजील में पले-बढ़े और अब न्यूयॉर्क में बसे 41 साल के सीजर कार्वाल्हो की, जो आज Wellhub नाम की वेलनेस कंपनी के CEO हैं. हाल ही में Fortune से बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे उनकी परवरिश ने उन्हें एक ऐसा ऐप बनाने की प्रेरणा दी, जो अब दुनियाभर के करोड़ों कर्मचारियों की सेहत को बेहतर बना रहा है.

बचपन की याद से आया आइडिया
कार्वाल्हो ने बताया कि ब्राजील में उनका बचपन हरियाली, पार्कों और ओपन जिम्स के बीच बीता. वहां वेलनेस एक आम बात थी. इसके लिए ना पैसा चाहिए, ना ज्यादा वक्त. लेकिन जब उन्होंने कॉर्पोरेट शहरों में देखा कि हेल्दी रहना सिर्फ अमीरों के लिए संभव है, तो उन्होंने तय किया कि कुछ करना होगा. उन्होंने कहा कि ‘मैंने वही बचपन की सादगी लोगों की जिंदगी में वापस लाने की कोशिश की.’

Wellhub: वेलनेस को सबके लिए आसान बनाना
कार्वाल्हो ने अमेरिका में Wellhub लॉन्च किया, जो अब 26,000 कंपनियों को अपनी सेवाएं दे रहा है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए 2 करोड़ कर्मचारी 50,000 से ज्यादा जिम और फिटनेस सेंटर, 3,800 वर्चुअल ट्रेनर्स और 93 हेल्थ ऐप्स तक पहुंच पा रहे हैं. और सबसे दिलचस्प बात कि उनकी कंपनी में कोई ‘ऑफिस आओ’ का नियम नहीं. CEO खुद भी हफ्ते में सिर्फ 2-3 बार ऑफिस जाते हैं.

पैसा नहीं, उद्देश्य है असली जीत
सीजर के लिए सफलता सिर्फ पैसे में नहीं है. जब भी उनकी कंपनी कोई बड़ा टारगेट हासिल करती है, वो अपने चैरिटी ‘Instituto Acredite’ को बढ़ाते हैं. वे कहते हैं कि ‘दोस्तों और परिवार की अहमियत पैसों से कहीं ज्यादा है.’

Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

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