नौरादेही अभ्यारण्य (वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व ) को चीतों का नया ठिकाना बनाने के लिए एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) ने सेंट्रल कैंपा फंड से 4 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह पहली किस्त होगी। दूसरी किस्त के लिए एनटीसीए 3 करोड़ रुपए देगा
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नौरादेही की सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज को चीतों के सबसे बेस्ट माना गया। एनटीसीए की टीम जल्द इन तीनों रेंज का दौरा करेगी। सागर और दमोह जिलों में फैले नौरादेही के जंगलों में 4 क्वारैंटाइन बोमा और 1 सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किए जाएंगे। इसके लिए फेंसिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम जल्द शुरू होगा। सिंघपुर रेंज को क्वारैंटाइन बोमा साइट के रूप में चुना जा सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2026 में नौरादेही में चीतों को ले जाया जा सकता है। अगर अफ्रीका से चीते नहीं आते, तो कूनो में जन्मे शावक, जो अगले साल तक एडल्ट हो जाएंगे, उन्हें नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा। 1975 में अस्तित्व में आया यह अभ्यारण्य 50 से 70 चीतों को आश्रय दे सकता है।
13 गांव होंगे विस्थापित
चार महीने पहले दौरे पर आई एनटीसीए की टीम के वन उप महानिरीक्षक वैभव माथुर की मौजूदगी वाली निरीक्षण टीम जिन तीन रेंज मोहली, झापा और सिंगपुर को चीतों के रहवास के लिए उचित माना है, उसमें कुल 13 गांव हैं। जहां के लोगों का पुनर्वास किया जाएगा, यहां 30 किलोमीटर के क्षेत्र को बाड़ेबंदी भी की जाएगी। इन 13 गांवों के पुनर्वास के लिए 150 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मांगी गई है। अभयारण्य में रिक्त पदों को भरने के लिए नौरादेही में पशु चिकित्सकों की भी तैनाती की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार नौरादेही अभयारण्य में कुल 93 गांव थे, जिनमें से 44 को बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है। 49 गांव अभी भी अभयारण्य के भीतर हैं। वन विभाग वर्तमान में तीन और गांवों के लोगों के पुनर्वास का काम कर रहा है जबकि मोहली गांव सहित सात अन्य गांवों को इस साल के अंत में पुनर्वास के लिए चुना जाएगा।
2022-23 में कूनो में लाए गए हैं चीते
वर्ष 1952 में भारत में चीतों के विलुप्त होने के बाद सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीतों को लाया गया था। फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 12 चीतों को लाया गया। इन्हें भी कूनो में रखा गया जिससे भारत में चीतों की कुल संख्या 20 हो गई। पिछले दो वर्षों में इन चीतों ने कुल 26 शावकों को जन्म दिया, लेकिन केवल 19 ही जीवित बचे।
12 वयस्क और 19 शावकों के साथ, भारत में चीतों की कुल संख्या वर्तमान में 31 है। इस साल अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से दो वयस्क नर चीते, पवन और प्रभास को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया था जिसे देश में बड़ी बिल्लियों के लिए दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया है।
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