मध्यप्रदेश के खंडवा जिले सहित पूरे प्रदेश में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. जहां पहले किसान गेहूं, चना, सोयाबीन और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे. वहीं अब समय की मांग और बाजार के रुझान को देखते हुए नई-नई फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है महोगनी (Mahogany) की खेती एक ऐसा पौधा जो दिखने में साधारण है, लेकिन कमाई के मामले में किसी एटीएम मशीन से कम नहीं.
महोगनी एक विदेशी प्रजाति का पेड़ है, जिसकी लकड़ी की कीमत सागवान (टीक वुड) से भी ज्यादा होती है. इस लकड़ी की मांग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है. यह लकड़ी बेहद मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक रंग की होती है, जिसका उपयोग लक्जरी फर्नीचर, डेकोरेटिव आइटम्स, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स और भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है. यही कारण है कि इसे “रेड गोल्ड ट्री” (Red Gold Tree) भी कहा जाता है.
खंडवा जिले के किसान पुत्र बी. डी. सनखेरें, जो पर्यावरण प्रेमी भी हैं, बताते हैं कि महोगनी की लकड़ी सांगवान को भी मात देती है. इसकी डिमांड विदेशों में बहुत अधिक है. अगर किसान इसे सही तरीके से लगाएं तो 10 से 12 साल बाद लाखों रुपए की कमाई कर सकते हैं.
कैसे करें महोगनी की खेती
महोगनी की खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन दोमट या जल निकासी वाली भूमि इसके लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसे लगाने का सबसे अच्छा समय जून से अगस्त के बीच का होता है, जब मॉनसून की शुरुआत होती है. एक एकड़ खेत में लगभग 400 से 450 पौधे लगाए जा सकते है. इन पौधों के बीच 10 x 10 फीट की दूरी रखनी जरूरी है ताकि उन्हें पर्याप्त जगह और धूप मिल सके. पौधारोपण के बाद शुरुआती दो साल तक नियमित सिंचाई और निराई-गुड़ाई आवश्यक होती है. इसके बाद यह पौधा स्वयं ही मजबूत हो जाता है और पानी की जरूरत बहुत कम रह जाती है.
महोगनी की खेती में शुरुआती लागत लगभग 25 से 30 हजार रुपए प्रति एकड़ तक आती है, जिसमें पौधों की कीमत, मजदूरी और रखरखाव शामिल है. लेकिन इसका फायदा बेहद बड़ा होता है. करीब 10 से 12 साल में एक पेड़ 8 से 10 फीट तक मोटा हो जाता है और इससे मिलने वाली लकड़ी की कीमत 10 से 15 हजार रुपए प्रति पेड़ तक हो सकती है. यानी एक एकड़ में लगाए गए 400 पेड़ों से 40 से 50 लाख रुपए तक की कमाई संभव है. अगर किसान इसे इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती) के साथ करें जैसे कि अदरक, हल्दी या सब्जियां तो शुरुआती वर्षों में भी अतिरिक्त आमदनी हो सकती है.
पर्यावरण को भी लाभ
महोगनी केवल कमाई का जरिया ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है. यह पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वायुमंडल को स्वच्छ बनाता है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करता है. इसकी जड़ें भूमि को मजबूत बनाती हैं और कटाव से बचाती हैं. यही कारण है कि कई पर्यावरण संगठन किसानों को महोगनी लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.
बाजार और भविष्य की संभावनाएं
महोगनी की लकड़ी की मांग देश-विदेश के लकड़ी बाजारों में लगातार बढ़ रही है. भारत में इसकी आपूर्ति अभी बहुत कम है, इसलिए जो किसान आज से इसकी खेती शुरू करेंगे, आने वाले वर्षों में उन्हें बहुत बड़ा लाभ मिलेगा. निर्यातक कंपनियां भी अब भारतीय किसानों से सीधे संपर्क कर रही हैं ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण महोगनी मिल सके. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में महोगनी की कीमतें दोगुनी तक हो सकती हैं, क्योंकि इसका विकल्प बाजार में सीमित है और पर्यावरणीय दृष्टि से यह टिकाऊ विकल्प साबित हो रहा है.
किसान बीडी सनखेरें कहते हैं कि महोगनी कोई साधारण पेड़ नहीं, यह किसानों के लिए चलती-फिरती एटीएम मशीन है. बस थोड़ी समझदारी और धैर्य से लगाएं, तो हर पेड़ से बरसेंगे रुपए ही रुपए. कुल मिलाकर, यह खेती न सिर्फ आर्थिक रूप से बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी एक बड़ा कदम है. अब समय है कि किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ ऐसे विकल्पों की ओर भी बढ़ें जो भविष्य में उन्हें आत्मनिर्भर और समृद्ध बना सकें.
.