Vivah Muhurat 2025: हिंदू रीति रिवाज को मानने वाले लोग शादी, मुंडन, गृह प्रवेश, नया वाहन और मकान लेने तक के लिए शुभ दिन निर्धारित करवाते हैं. मान्यता है कि किसी शुभ मुहूर्त को देखकर ही कोई मांगलिक कार्य पूरा किया जाता है तभी शुभ फल की भी प्राप्ति होती है. चातुर्मास आरंभ हो जाने के बाद मांगलिक कार्य बंद हो जाता है लेकिन जैसे ही चातुर्मास खत्म होता है फिर से मांगलिक कार्य की शुरुआत हो जाती है. सनातन परंपरा में चातुर्मास खत्म होने के बाद जैसे ही देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह की पूजा संपन्न होती है, उसके बाद विवाह के उत्तम मुहूर्त मिलने प्रारंभ हो जाते हैं.
कब-कब रहेंगे शुभ मुहूर्त
नवंबर में विवाह का सिलसिला 15 दिनों का ही रहेगा. 2, 3, 5 (कार्तिक पूर्णिमा), 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 नवंबर को विवाह योग्य मुहूर्त रहेंगे.
दिसंबर में केवल 4, 5 दिसंबर और 6 दिसंबर को ही शुभदिन रहेंगे। फिर 16 दिसंबर से मलमास (अधिमास) की शुरुआत होगी, जो 14 जनवरी 2026 तक चलेगा. 12 दिसंबर से शुक्र अस्त हो जाएगा, 1 फरवरी 2026 को उदय होगा. इस दौरान 51 दिनों तक विवाह और अन्य मंगल कार्य स्थगित रहेंगे.
23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का अबूझ मुहूर्त रहेगा. इस दिन बिना पंचांग देखे भी विवाह व शुभ कार्य करना शुभ माना जाएगा.
धार्मिक और सामाजिक महत्व
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ सामाजिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण हैं. इस दिन से विवाह जैसे मांगलिक कार्य शुरू होते हैं, जिससे पूरे समाज में उत्सव का माहौल बनता है. हिंदू परिवारों में इसे नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.इस प्रकार साल 2025 में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह एक बार फिर शुभ कार्यों के द्वार खोलने जा रहे हैं, जो लोग शादी या अन्य मांगलिक कार्य करने की योजना बना रहे हैं, वे इन मुहूर्तों का ध्यान रखकर अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत कर सकते हैं.
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