Last Updated:
White Tiger: भारत में सबसे पहला सफेद बाघ मध्य प्रदेश के रीवा में पाया गया था. साल 1951 में गोविंदगढ़ के पास जंगलों में तब के महाराजा मार्तंड सिंह ने पहली बार सफेद बाघ देखा था. लेकिन, आज एशिया के कई देशों में करीब 8000 सफेद बाघ हैं, जो कैद में हैं. जानें क्यों…
भारत में सबसे पहला सफेद शेर मध्य प्रदेश के रीवा में पाया गया था. साल 1951 में गोविंदगढ़ के पास जंगलों में तब के महाराजा मार्तंड सिंह ने पहली बार सफेद बाघ देखा था. उसके बाद से सफेद शेरों की संख्या में इजाफा हुआ और अब यह देश ही नहीं विदेशों में भी हैं.

मध्य प्रदेश के रीवा को सफेद शेरों की नगरी कहा जाता है. साल 1951 में तत्कालीन माहाराजा मार्तंड सिंह ने रीवा के पास गोविंदगढ़ के जंगलों में इसे खोजा था. रीवा के मुकंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी भी है जहां सफेद बाघों को आराम फरमाते देखा जा सकता है.

सामान्य बाघों की तुलना में सफेद बाघ की आंखों का रंग अलग होता है. जहां पीले बाघों की आंखों का रंग काला होता है, वहीं सफेद बाघों की आंखों का रंग नीला होता है.

इस समय पूरे देश में सफेद बाघ मोहन के वंशज हैं. लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी कि 10,000 बाघों में से एक ही बाघ ऐसा होता है, जिसका रंग सफेद होता है.

आखिर बाघ का रंग सफेद कैसे होता है? यह जानना जरूरी है. असल में बाघ का सफेद कोट केवल एक जेनेटिक विसंगति का रिजल्ट है. सफेद बाघ कोई लुप्तप्राय प्रजाति नहीं है.

बाघ के माथे की धारियों को देखने पर यह एक चाइनीज अक्षर की तरह दिखाई पड़ती हैं, जिसमें लिखा होता है किंग या राजा.

सफेद बाघ सामान्य बाघ की तुलना में आकार में बड़े होते हैं. सफेद बाघ पीले बाघों की तुलना में जन्म और पूर्ण वयस्क होने पर दोनों ही समय आकार में बड़े होते हैं.

बाकी बाघों की तरह सफेद बाघ एख अच्छा तैराक होता है. यह 6 किलोमीटर तक तैर सकता है.

8000 से अधिक बाघ चिड़ियाघरों में रखे गए हैं. WWF के अनुसार, एशिया में विशेष रूप से चीन, लाओस, थाईलैंड और वियतनाम में 8000 से अधिक बाघ कैद में होने का अनुमान है.

सफेद बाघ दिखने में जितने खूबसूरत होते हैं, उनकी कहानी उतनी ही भावुक कर देने वाली है. WWF के अनुसार, सफेद बाघ शावकों सहित बंदी हैं, चिड़ियाघरों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण सफेद बाघ होते हैं. उनका अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य ही उनकी कैद का कारण है.
.