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Atipala Health Benefits: अतिपला शरीर और मन दोनों को ऊर्जा और स्फूर्ति प्रदान करता है. यह त्रिदोषनाशक पौधा थकान, आलस्य और कमजोरी को दूर करता है. जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द, गठिया और कमर दर्द में राहत देता है. इसके पत्तों का रस त्वचा रोगों और घाव भरने में फायदेमंद है. नियमित सेवन से पाचन, लीवर और रक्त शुद्धिकरण भी बेहतर होता है.
कुदरत ने इंसान को पौधों के रूप में कई कीमती उपहार दिए हैं. पौधे मानव शरीर और धर्म दोनों में विशेष महत्व रखते हैं. ऐसा ही एक औषधीय पौधा है अतिपला, लोग अक्सर इस पौधों की असली पहचान नहीं कर पाते हैं, कारण इसे खरपतवार समझ के उखाड़ कर फेक देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही साधारण सा दिखने वाला पौधा एक शक्तिशाली औषधीय जड़ी-बूटी है? यह शरीर को अंदर से ताकत देने, रोगों को दूर करने और मानसिक शांति प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है.

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में अतिपला का विशेष महत्व है. आयुर्वेदिक ग्रंथों में अतिपला का उल्लेख सैकड़ों वर्षों से मिलता है. ऋषि-मुनियों के अनुसार यह पौधा त्रिदोषनाशक (वात, पित्त, कफ को संतुलित करने वाला) है. यह शरीर में ऊर्जा प्रवाह को संतुलित रखता है और कमजोर तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार, यह ताकत बढ़ाने और शरीर की थकान मिटाने वाला पौधा है. इसे पारंपरिक घरेलू उपचार के रूप में पीढ़ियों से उपयोग किया जा रहा है.

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि अतिबला शरीर को शक्ति और स्फूर्ति देने वाला पौधा है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर और मन दोनों थक जाते हैं. अतिपला का सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से ऊर्जा, स्फूर्ति और मानसिक एकाग्रता प्रदान करता है. यह पौधा शरीर में रक्त प्रवाह को संतुलित करता है और कोशिकाओं को नया जीवन देता है. जिन लोगों को बार-बार थकान, आलस्य या कमजोरी महसूस होती है, उनके लिए यह पौधा किसी वरदान से कम नहीं है.

इसके साथ ही यह जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में चमत्कारी लाभ है. अतिपला के जड़ और पत्तों में पाए जाने वाले तत्व सूजन कम करने और दर्द शांत करने में मदद करते हैं. यह गठिया जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और मांसपेशियों की जकड़न में राहत देता है. बुजुर्गों को यदि रोज इसका काढ़ा पिलाया जाए तो धीरे-धीरे उनका दर्द और अकड़न कम होने लगती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाते हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, यह त्वचा और घाव भरने में बेहद फायदेमंद है. अतिपला के पत्तों का रस त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है. अगर किसी को जलन, खुजली, दाद या फोड़े-फुंसी की समस्या है, तो अतिपला का रस लगाने से त्वचा को ठंडक, नमी और राहत मिलती है.यह घाव भरने में भी मदद करता है, इसलिए पुराने समय में इसे प्राकृतिक मरहम के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.इसके नियमित उपयोग से त्वचा मुलायम, चमकदार और संक्रमणमुक्त बनी रहती है.

इसके साथ यह पाचन और लीवर को स्वस्थ रखता है. अतिपला का सेवन लीवर (यकृत) की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और भूख न लगना, गैस या अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है. इसके अलावा, यह रक्त शुद्ध करने में भी सहायक है, जिससे त्वचा की चमक और शरीर की ऊर्जा बनी रहती है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया कि अतिपला का काढ़ा बनाना बेहद आसान है और इसे रोजमर्रा की आदत में शामिल किया जा सकता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 4 से 5 ताजे या सूखे पत्ते लें. दो कप पानी में डालकर धीमी आंच पर उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए. अब इसे छानकर हल्का गुनगुना कर लें. इसके बाद इसमें चाहें तो एक चम्मच शहद या थोड़ा नींबू का रस मिला सकते हैं. इसे सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले लेना सबसे सही माना जाता है. यह काढ़ा शरीर को भीतर से शुद्ध करता है और पूरे दिन ऊर्जा से भर देता है.