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मोरक्को: नेपाल में तख्तापलट के बाद अब जेन-जी आंदोलन एक और देश में विकराल रुप ले रहा है. मोरक्को में 3 अक्टूबर से शुरू हुआ ये आंदोलन अब देश के प्रधानमंत्री के गिरेबान तक जा पहुंचा है. सरकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू ये प्रदर्शन अब हिंसक हो चुका है, मुठभेड़, मौतों और गिरफ्तारियों के बाद शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने मांगें दोहराई हैं और जेनरेशन जेड 212 के पिछले प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग भी की है।
Aziz Akhannouch पर क्यों फूटा जेन-जी का गुस्सा?
8 दिन बाद कैसे जाग गए प्रदर्शनकारी?
8 दिन तक बंद रहा ये विरोध प्रदर्शन संसद में राजा मोहम्मद VI के भाषण के बाद दोबारा शुरू हुआ है। जिसमें जेड 212 के विरोध प्रदर्शनों का सीधे तौर पर जिक्र नहीं था। स्पीच में उन्होंने ना तो अखन्नौच को बर्खास्त करने की मांगों पर बात की और ना ही 2030 फीफा विश्व कप के लिए बनाए जा रहे स्टेडियमों पर बवाल का जिक्र किया।
अपने भाषण में मोहम्मद VI ने कहा कि ‘प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं और सामाजिक कार्यक्रमों के बीच कोई विरोधाभास या प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दोनों का लक्ष्य एक ही है, जो कि देश का विकास करना और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना है’।
Gen Z की आखों में नजर आया डर
इस भाषण के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि वे आगामी अफ्रीकी कप ऑफ नेशंस का बहिष्कार करेंगे, जिसकी मेजबानी मोरक्को दिसंबर में करेगा। हालांकि, इस इंटरव्यू के दौरान प्रदर्शनकारियों में पिछले दिनों हुई गिरफ्तारियों का डर नजर साफ नजर आया, ज्यादातर प्रोटेस्टर्स ने अपनी पहचान कैमरे के सामने बताने से इनकार कर दिया।
8 महिलाओं की मौत पर गुस्सा कैसे बना आंदोलन?
मोरक्को में इस जेन-जी प्रदर्शन की प्रेरणा नेपाल जैसे देशों में इसी तरह के आंदोलनों से प्रेरणा ली गई है। इसकी शुरुआत राजधानी रबात से 477 किलोमीटर दूर शहर अगाडिर के एक सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान आठ महिलाओं की मौत की वजह से हुई थी। इस विरोध की एक लहर बढ़ते-बढ़ते आंदोलन बन गई और पूरे देश में फैल गई। फिर कुछ शहरों और छोटे कस्बों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। पुलिस बलों ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया, जो उनके अनुसार उनकी एक चौकी पर हमला करने की कोशिश में थे।
162 साल की सजा
स्थानीय मीडिया के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तोड़फोड़ के लिए मोरक्को भर में 400 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अगाडिर की एक अदालत ने तोड़फोड़ के लिए 17 प्रतिवादियों को कुल 162 साल की सजा सुनाई।
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