पुराने घाव, पाइल्स और कब्ज का प्राकृतिक इलाज, जो आपके घर में ही संभव है, जानिए

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उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में कनेर का पौधा सिर्फ सजावट या धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. भगवान शिव की पूजा में प्रिय इस पौधे के फूल और पत्तियों में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द, कब्ज, पाइल्स और हृदय से जुड़ी समस्याओं में राहत देने में मदद करते हैं. आसान तरीके से उगाया जा सकने वाला यह सदाबहार पौधा स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण है.

उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में लोग अक्सर अपने घर के आसपास कनेर के पौधे लगाते हैं. कनेर का फूल भगवान शिव को बहुत प्रिय माना जाता है, इसलिए हिंदू धर्म में पूजा-अर्चना के दौरान इसका उपयोग किया जाता है. कनेर के पौधे पर पीले, गुलाबी और सफेद रंग के फूल आते हैं. यह एक सदाबहार पौधा है और इसे आसानी से उगाया जा सकता है.

कनेर

कनेर के पौधे में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार बताते हैं कि कनेर एक खास किस्म का पौधा है, जिसका उपयोग औषधीय दवाओं के निर्माण में किया जाता है. दाद होने पर कनेर के पत्तों का लेप लगाने से खुजली और दाद में तुरंत आराम मिलता है.

कनेर

अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, तो कनेर के पत्तों का लेप तैयार कर लगा सकते हैं. जोड़ो के दर्द में यह लेप सबसे कारगर उपाय माना जाता है. इसके अलावा, पुराने घावों को ठीक करने में भी कनेर के पत्ते बहुत फायदेमंद होते हैं.

कनेर

अगर आप कब्ज की समस्या से परेशान हैं, तो पीले कनेर के पत्तों और छाल का काढ़ा बनाकर पीने से आराम मिल सकता है. खान-पान की गलत आदतें और सुस्त जीवनशैली अक्सर कब्ज की समस्या को बढ़ा देती हैं.

कनेर

अगर आप पाइल्स की समस्या से परेशान हैं, तो निजात पाने के लिए कनेर के फूल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए कनेर और नीम के पत्तों को एक साथ पीसकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को बवासीर के मस्सों पर दिन में तीन बार लगाएं, जिससे धीरे-धीरे आराम मिलेगा.

कनेर

कनेर के फूलों में हृदय टॉनिक गुण पाए जाते हैं, जो हृदय की नसों को मजबूत करते हैं और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. हृदय की सेहत सुधारने के लिए कनेर के फूलों का अर्क बनाकर पिया जा सकता है. इसके अलावा, कनेर की पत्तियों को उबालकर पीने से भी काफी लाभ होता है.

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