Success Story: गंदे टॉयलेट से पत्नी को झेलनी पड़ी थी गंभीर बीमारी! पति ने निकाला ऐसा हल, खड़ी कर दी 50 करोड़ की कंपनी

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Success Story: ट्रैवलिंग और नई-नई जगहें देखना, कौन नहीं पसंद करता? लेकिन जब महिलाओं की बात आती है तो पब्लिक टॉयलेट की गंदगी उन्हें परेशान कर देती है. हर जगह गंदे वॉशरूम, और उनसे होने वाली बीमारियां, ये सब एक बड़ी समस्या है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी गंदगी से एक शख्स ने 50 करोड़ रुपये का बिजनेस खड़ा कर दिया. जी हां, सुनकर हैरानी हो रही होगी, लेकिन यह सच है.

ट्रैवलिंग और अलग-अलग जगह घूमना-फिरना भला किसे नहीं पसंद होता है? लेकिन जब बात महिलाओं के पब्लिक टॉयलेट की आती है तो हर जगह गंदे वॉशरूम ही नजर आते हैं. ऐसे में अलग-अलग बीमारी होने का खतरा भी बना रहता है. लेकिन गंदे पब्लिक टॉयलेट और वॉशरूम से एक शख्स ने करोड़ों का बिजनेस खड़ा कर दिया है. अब आप सोच रहे होंगे कि भला वो कैसे?

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2013 में विकास बगारिया की पत्नी श्रीजना को ट्रैवलिंग के दौरान पब्लिक वॉशरूम यूज़ करने की वजह से यूटीआई (यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) हो गया. यह समस्या देखकर विकास ने रिसर्च की और पाया कि भारत में गंदे पब्लिक टॉयलेट्स की वजह से कई महिलाओं को यह परेशानी होती है. कई बार महिलाएं ट्रैवलिंग के दौरान वॉशरूम स्किप कर देती हैं, जो उनकी सेहत के लिए सही नहीं है. इस समस्या को सॉल्व करने के लिए विकास ने एक टॉयलेट सीट सैनिटाइजर डेवलप किया, जिसका नाम रखा गया पी सेफ (Pee Safe).

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पी सेफ की शुरुआत में दो बड़ी चुनौतियां थीं. पहली, लोगों को इसके बारे में जागरूक करना. भारत में मेंसुरल हाइजीन(पीरियड्स) और इंटमेट हाइजीन को लेकर लोग शर्माते हैं, इसलिए इस प्रोडक्ट को लोगों तक पहुंचाना मुश्किल था.

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दूसरी, बाजार में कंपटीशन. कोई भी कंपनी आसानी से टॉयलेट सीट सैनिटाइजर बना सकती थी, तो पी सेफ कैसे अलग बनेगा? विकास ने इन चुनौतियों को पार करने के लिए कई ऑनलाइन और ऑफलाइन कैंपेन्स चलाए. उन्होंने लोगों को बताया कि साफ-सुथरे वॉशरूम का इस्तेमाल कितना जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने ओमनी चैनल मॉडल अपनाया, जिससे प्रोडक्ट हर जगह पहुंचे.

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पी सेफ की सफलता के बाद विकास ने और भी प्रोडक्ट्स लॉन्च किए, जैसे जिम सेफ और मॉस्किटो सेफ. उन्होंने वुमेन पर्सनल केयर और सेक्सुअल वेलनेस की कैटेगरी में भी एक्सपेंड किया.

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आज पी सेफ 10 शहरों में 40 सदस्यों की टीम के साथ काम कर रहा है और टियर 2 और टियर 3 शहरों से भी 12 प्रतिशत रेवेन्यू आ रहा है. यह प्रोडक्ट न सिर्फ महिलाओं की सेहत में सुधार ला रहा है, बल्कि एक नई कैटेगरी भी बनाई है. आज यह प्रोडक्ट 57 करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना रेवेन्यू जनरेट कर रहा है.

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विकास की इस सोच ने दिखा दिया कि एक छोटी सी समस्या को सॉल्व करने से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. पी सेफ आज भारत ही नहीं, बल्कि मिडल ईस्ट और अफ्रीका में भी पहुंच रहा है और लगातार ग्रोथ कर रहा है.

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