खंडवा. अगर आप खेती में कुछ नया और मुनाफेदार करना चाहते हैं, तो अब समय आ गया है पारंपरिक खेती से एक कदम आगे बढ़ने का. धान, मूंग या सब्जी की जगह अगर आप शीशम की खेती करते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह आपकी जिंदगी बदल सकती है. शीशम को ‘भारत का रोजवुड’ कहा जाता है क्योंकि इसकी लकड़ी न सिर्फ मजबूत होती है बल्कि इसकी कीमत भी लाखों रुपये तक पहुंच जाती है. मध्य प्रदेश के खंडवा निवासी प्रकृति प्रेमी और किसान पुत्र बीडी सनखेरे लोकल 18 को बताते हैं कि शीशम की खेती आज के समय में किसानों के लिए एक लॉन्ग टर्म प्रॉफिट इन्वेस्टमेंट है. यह खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाती है बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी है. यह पेड़ हवा को शुद्ध करता है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी कम करता है.
खेती की विधि और देखभाल
शीशम की खेती के लिए मध्यम से गहरी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यह पौधा बहुत ज्यादा पानी नहीं मांगता लेकिन शुरुआती दो साल तक सिंचाई और देखभाल जरूरी होती है. पौधों के बीच कम से कम 10×10 फीट की दूरी रखनी चाहिए ताकि पेड़ को बढ़ने की पूरी जगह मिले. बरसात के मौसम में पौधारोपण करना सबसे अच्छा रहता है क्योंकि इस समय नमी पर्याप्त होती है और पौधे आसानी से जम जाते हैं. किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पौधारोपण के बाद पहले दो साल तक खरपतवार और दीमक नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें. साथ ही हर साल हल्की खाद डालने से पेड़ तेजी से बढ़ता है.
मुनाफे का गणित
अगर किसान एक एकड़ भूमि में 400 पौधे लगाते हैं और 10 साल बाद हर पेड़ औसतन 70 हजार रुपये में बिकता है, तो कुल मुनाफा करोड़ों तक पहुंच सकता है. खेती में खर्च बहुत कम है. शुरुआत में पौधों, सिंचाई और देखभाल के अलावा कोई बड़ा निवेश नहीं चाहिए. सबसे खास बात यह है कि शीशम की लकड़ी की मांग भारत के साथ-साथ विदेशों में भी काफी ज्यादा है. यही वजह है कि किसानों को खरीदार ढूंढने में कोई कठिनाई नहीं होती.
पर्यावरण और सामाजिक लाभ
शीशम के पेड़ मिट्टी को बांधते हैं, जिससे कटाव नहीं होता और भूमि की उर्वरता बढ़ती है. ये पेड़ नमी बनाए रखते हैं और आसपास के वातावरण को ठंडा रखते हैं. इसके अलावा अगर गांवों में किसान सामूहिक रूप से शीशम की खेती करें, तो यह एक ग्रीन रेवोल्यूशन बन सकता है, जो प्रकृति और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ पहुंचाएगा.
एक्सपर्ट की राय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि शीशम की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है. यह खेती कम पानी, कम मेहनत और लंबे समय में ज्यादा लाभ देने वाली है. बीडी सनखेरे कहते हैं, “अगर किसान धैर्य और योजना के साथ शीशम की खेती करें, तो हर खेत एक ग्रीन बैंक बन सकता है.” कुल मिलाकर आज के समय में जब पारंपरिक फसलों से ज्यादा लाभ नहीं मिल पा रहा, ऐसे में शीशम की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है. यह खेती न सिर्फ आपकी जेब भर देगी बल्कि धरती को भी हरियाली से भर देगी. तो अब वक्त है सोच बदलने का. बोएं शीशम और पाएं आने वाले कल में हरियाली के साथ खुशहाली.
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