Diwali Tips And Tricks: दिवाली का त्योहार आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ती है. हर कोई चाहता है कि घर में स्वादिष्ट रसगुल्ला, गुलाब जामुन, बरफी या रस मलाई जैसी मिठाइयां आएं. लेकिन, इस मीठे में एक कड़वी सच्चाई भी छिपी हो सकती है. बाजार में मिल रहे कई रसगुल्ले असली दूध से नहीं, बल्कि नकली या मिलावटी दूध से तैयार किए जा रहे हैं. यह न केवल स्वाद बिगाड़ सकते हैं, बल्कि सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं.
असली और नकली रसगुल्ला ऐसे पहचानें
1. रंग और चमक से पहचानें: असली दूध से बने रसगुल्ले का रंग हल्का क्रीम या ऑफ-व्हाइट होता है, जबकि नकली दूध से बना रसगुल्ला बहुत ज्यादा सफेद और कृत्रिम चमक वाला होता है.
2. दबाकर देखें: असली रसगुल्ला दबाने पर जल्दी से अपनी पुरानी आकृति में लौट आता है, क्योंकि उसमें प्राकृतिक लचक होती है. नकली रसगुल्ला दबाने पर टूट जाता है या सख्त रह जाता है.
3. सुगंध पर ध्यान दें: असली रसगुल्ले से हल्की दूधिया और मीठी खुशबू आती है. जबकि नकली या मिलावटी रसगुल्ले में केमिकल या कृत्रिम एसेंस की तेज गंध महसूस होती है.
4. स्वाद की जांच करें: असली दूध से बने रसगुल्ले का स्वाद हल्का, मीठा और मुलायम होता है. नकली रसगुल्ला खाते समय मुंह में हल्की जलन या कसैलापन महसूस हो सकता है.
5. पानी (चाशनी) की जांच करें: असली रसगुल्ले की चाशनी हल्की पारदर्शी और पतली होती है. अगर चाशनी बहुत गाढ़ी, चिपचिपी या हल्की पीली दिख रही है तो सतर्क रहें, इसमें मिलावट की संभावना है.
सेहत पर असर: नकली दूध या सिंथेटिक दूध से बने रसगुल्ले में यूरिया, डिटर्जेंट और स्टार्च जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. ये शरीर में जाकर लीवर और किडनी पर बुरा असर डालते हैं. लंबे समय तक ऐसे मिठाई का सेवन करने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, और यहां तक कि खाद्य विषाक्तता (Food Poisoning) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
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