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Aligarh News: शतावरी एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है. जो झाड़ी नुमा स्वरूप में पूरे उत्तर प्रदेश सहित भारत के अधिकांश हिस्सों में पाया जाता है.
अलीगढ़: आयुर्वेद की अनमोल जड़ी-बूटियों में शुमार शतावरी एक ऐसी औषधीय पौधा है, जिसे खास तौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए वरदान माना गया है. झाड़ी नुमा यह पौधा उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत में पाया जाता है और इसके अनेक औषधीय गुणों के कारण इसे आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त है. यह साधारण सा दिखने वाला पौधा किन किन बीमारियों मे आता है काम और कैसे महिलाओं के लिए है वरदान. जानते हैं आयुर्वैदिक डॉक्टर राजेश कुमार से.
जानकारी देते हुए आयुर्वैदिक डॉक्टर राजेश कुमार ने बताया कि शतावरी एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है. जो झाड़ी नुमा स्वरूप में पूरे उत्तर प्रदेश सहित भारत के अधिकांश हिस्सों में पाया जाता है. यह पौधा साल के 12 महीने बाज़ार मे जड़ी बूटी के रूप मे आसानी से मिल जाता है. वैसे यह पौधा जून से अगस्त के बीच अपनी अच्छी वृद्धि करता है और इसी समय इसकी खेती भी की जाती है. शतावरी को घर के बगीचे में भी उगाया जा सकता है, जबकि बड़े स्तर पर इसकी खेती खेतों में की जाती है.
क्या है शतावरी की खासियत
डॉ राजेश कुमार का कहना है कि आयुर्वेद में शतावरी को विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत लाभदायक माना गया है. यह महिलाओं की प्रजनन शक्ति को बढ़ाने में सहायक होती है. साथ ही यह लैक्टेटिंग मदर्स यानी स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी बेहद उपयोगी है, क्योंकि यह दूध की मात्रा को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में मदद करती है. इसके सेवन से बच्चे के भी शारीरिक विकास में भी सुधार होता है.
रामबाण औषधि
डॉ राजेश बतातें हैं कि शतावरी शारीरिक कमजोरी और बाँझपन जैसी समस्याओं में भी लाभकारी मानी जाती है. इसका लाभ लेने के लिए इसका सेवन सुबह चूर्ण के रूप में किया जाता है. लगभग तीन से पाँच ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध के साथ सुबह और शाम लिया जा सकता है. विशेष रूप से स्त्री रोगों में यह पौधा एक रामबाण औषधि की तरह कार्य करता है. यह न केवल शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में भी सहायक है. बाजार में शतावरी पूरे साल उपलब्ध रहती है, जिससे इसका उपयोग किसी भी समय किया जा सकता है.