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Winter Health Tips: ठंड की शुरुआत के साथ ही विंध्य के पुराने लोग दवा की जगह अदरक, तुलसी, नीम, हल्दी और अर्जुन जैसे पौधों से अपना इलाज शुरू कर देते करते हैं. आप भी जानें नुस्खा
Winter Health Tips: सर्दी की दस्तक के साथ जब पहाड़ों पर ओस जमने लगती है और खेतों में ठंडी हवाएं बहने लगती हैं, तब बघेलखंड के लोग अपने घरों में महंगी दवाओं की जगह रसोई में मौजूद और आंगन में उगे पौधों से इलाज शुरू कर देते हैं. सर्दियों में यह इलाका औषधीय परंपराओं का केंद्र रहा है. यहां के लोग प्रकृति पर भरोसा करते हैं. यही भरोसा उन्हें डॉक्टरों और दवा की जरूरत से बचाता है. स्थानीय बुज़ुर्ग कहते हैं कि पूर्वजों ने हर मौसम का इलाज धरती से ही ढूंढा. बस उसे पहचानने की जरूरत है.
अदरक को बघेलखंड में सर्दी की दवा कहा जाता है. इसकी गर्म तासीर शरीर को ठंड से बचाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है. स्थानीय महिलाएं इसे चाय में डालकर या काढ़ा बनाकर परिवार को पिलाती हैं. अदरक गले की खराश, खांसी, और सर्दी-जुकाम में बेहद असरदार है. उद्यानिकी विशेषज्ञ विष्णु तिवारी लोकल 18 से बताते हैं कि अदरक के रस में शहद मिलाकर लेने से सर्दी और गले के संक्रमण में त्वरित राहत मिलती है.
तुलसी: हर बीमारी की रामबाण जड़ी
तुलसी न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से पूजनीय है बल्कि इसका औषधीय महत्व भी अत्यधिक है. बघेलखंड के गांवों में हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा देखा जा सकता है. यह पौधा अपने एंटीसेप्टिक और एंटीवायरल गुणों के लिए जाना जाता है. तुलसी का रस शहद के साथ लेने से खांसी, सर्दी और गले की सूजन में आराम मिलता है. साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है जिससे ठंड का असर कम होता है.
नीम: सर्दियों का नैचुरल सेनेटाइज़र
नीम को बघेलखंड में औषधियों का राजा कहा जाता है. इसकी पत्तियां, छाल और फल सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. नीम का सेवन खून को शुद्ध करता है, त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करता है और शरीर को संक्रमणों से बचाता है. गाँवों में लोग आज भी नीम की पत्तियों का रस निकालकर बुखार और वायरल संक्रमण में पीते हैं.
हल्दी: सोने सी कीमती जड़ी
हल्दी हर रसोई की शान है लेकिन बघेलखंड में यह दवा के रूप में भी जानी जाती है. यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है. ठंड में हल्दी वाला दूध शरीर को गर्म रखता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और सर्दी-जुकाम से बचाता है. बुज़ुर्ग महिलाएं हल्दी को घी या सरसों के तेल में मिलाकर चोट या सूजन पर भी लगाती हैं.
अर्जुन की छाल: दिल के लिए औषधीय कवच
विष्णु तिवारी ने कहा की अर्जुन का पेड़ आयुर्वेद का अभिन्न हिस्सा है. बघेलखंड में लोग इसकी छाल को सुखाकर चूर्ण बनाते हैं और चाय में मिलाकर पीते हैं. यह चाय दिल की बीमारियों जैसे ब्लॉकेज, हाई बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है. अर्जुन की छाल का सेवन शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और सर्दियों में ऊर्जा देता है.
बघेलखंड की परंपरा, आधुनिक सेहत का राज
इन पांच पौधों का समुचित उपयोग आज भी बघेलखंड के गाँवों में जीवित है. स्थानीय लोग मानते हैं कि अगर सर्दियों में अदरक, तुलसी, नीम, हल्दी और अर्जुन को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो डॉक्टर के पास जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. ये पौधे न सिर्फ सर्दी-जुकाम से बचाते हैं बल्कि शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.