पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाएं आज करवा चौथ का वृत कर रही हैं। ऐसे में उज्जैन के जीवनखेड़ी में स्थित करवा माता के इकलौते मंदिर में महिलाओं की भीड़ लगी है। मंदिर में चौथ माता के साथ देवी पार्वती, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और संतोषी माता भी विराजमान
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ये मंदिर उन्हेल बायपास पर स्थित है। इसका निर्माण करीब 20 वर्ष पहले हुआ है। दावा है कि ये प्रदेश का चौथ माता का इकलौता मंदिर है और इसे श्रद्धालुओं के लिए वर्ष में एक ही बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को खोला जाता है। मंदिर के पुजारी डॉ. कैलाशचंद्र ने बताया यह मंदिर साल में एक बार खुलता है। यहां मां कामाख्या का सिंदूर, नेपाल का सिक्का और रुद्राक्ष सभी माताओं-बहनों को निःशुल्क प्रसाद के रूप में देते हैं।
मंदिर में पूजा-अर्चना करती हुई महिलाएं।
तीन रूप में दर्शन देती है प्रतिमा
डॉ. कैलाशचंद्र ने कहा कि इस सामग्री को घर में रखने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव धन संपत्ति बढ़ती है। देवी का आशीर्वाद बना रहता है। देवी मां की ये प्रतिमा सुबह बाल रूप में, दोपहर में किशोरी और शाम में वृद्ध रूप में दर्शन देती है। लगभग 20 हजार महिलाएं यहां करवा चौथ पर दर्शन करने को पहुंचती हैं। इस वर्ष कथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
देवी के तीन श्रृंगार किए जाते हैं
उन्होंने बताया कि देवी का विधि अनुसार पूजन होता है। उन्हें श्रृंगार भेंट कर आरती-पूजन किया जाता है। तीन अलग-अलग श्रृंगार होते हैं। सुहागिन महिलाएं ही नहीं, युवतियां भी अच्छे वर की कामना लेकर मंदिर पहुंचती हैं। मंदिर के लिए अभी पक्का रास्ता नहीं होने के बाद भी बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु पहुंच कर करवा माता के दर्शन का लाभ ले रही हैं।
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