छत्तीसगढ़. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के पहाड़ी इलाकों में किसान तिलहन फसल में ज्यादातर जटगी यानी रामतिल कि बड़े पैमाने पर खेती करते हैं. राम तिल की खेती किसानो के लिए न सिर्फ आय का एक साधन बना हुआ है, बल्कि इसके कई औषधीय गुण भी हैं, जो ग्रामीण स्वास्थ्य का प्राकृतिक सहारा भी है. रामतील जिसे गूंजा के नाम से भी जाना जाता है, जिसका उपयोग घर के रसोई में भी किया जा सकता है. राम तिल कि खेती करने के लिए एक्सपर्ट टिप्स एंड ट्रिक्स जानिए.
कृषि एक्सपर्ट संजय यादव ने लोकल 18 को बताया कि जटगी की खेती दो प्रमुख मौसमों में की जाती है खरीफ और रबी
खरीफ सीजन: बुवाई जुलाई के अंतिम पखवाड़े में की जाती है और फसल 90–95 दिनों में तैयार हो जाती है.
जबकि रबी सीजन: बुवाई सितंबर के पहले सप्ताह में होती है.यह फसल उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी बढ़ती है, जहाँ तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है.
खिलते हैं पीले फूल, कटाई होती है मुरझाने पर
कृषि एक्सपर्ट ने लोकल 18 को बताया कि जब जटगी का पौधा फूलने की अवस्था में पहुँचता है, तो उस पर पीले रंग के आकर्षक फूल खिलते हैं. ये फूल खेतों की सुंदरता बढ़ाते हैं. कटाई का सही समय तब होता है जब फूल मुरझाने लगें और दाने काले पड़ जाएं. इसी अवस्था में किसान फसल की हार्वेस्टिंग करते हैं.
औषधीय और पौष्टिक गुणों से भरपूर तेल
कृषि एक्सपर्ट ने बताया कि जटगी एक तिलहन फसल है जिससे अत्यंत गुणकारी तेल निकाला जाता है. यह तेल शरीर के तापमान को संतुलित रखता है, ऑक्सीडेंट्स को बाहर निकालता है और मेटाबॉलिज़्म को सक्रिय रखता है.
ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग औषधीय तेल के रूप में भी किया जाता है. इसलिए इसे औषधीय पौधा भी कहा जाता है. दीपावली जैसे त्योहारों में भी इसके तेल से स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं.
खेती के लिए उपयुक्त भूमि
खेती के लिए भुरभुरी, दोमट और जलनिकासी वाली भूमि सबसे उपयुक्त होती है.
कृषि एक्सपर्ट बताते है कि बीज दर: प्रति एकड़ 2.5 से 3 किलोग्राम खाद: प्रति एकड़ 1–2 ट्रॉली गोबर की खाद या जैविक खाद पर्याप्त
उर्वरक: प्रति एकड़ नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की एक-एक बोरी देना उचित रहता है.यह फसल ढलान या पहाड़ी इलाकों में बेहतर होती है, जहाँ पानी ठहरता नहीं.
खेतों में खिलते फूलों से बढ़ता है सौंदर्य
संजय ने बताया कि जब खेतों में जटगी के पीले फूल खिलते हैं तो दृश्य बेहद मनमोहक लगता है. ग्रामीण इलाकों में यह फसल न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है, बल्कि पर्यटकों को आकर्षित करने वाली प्राकृतिक सुंदरता का भी प्रतीक बन गई है.
रसोई से सेहत तक-हर जगह उपयोगी होती हैं जटगी
जटगी का तेल हल्का, पौष्टिक और सुगंधित होता है. ग्रामीण इलाकों में इसका प्रयोग रसोई से लेकर औषधीय उपचार तक होता है. यह पारंपरिक तेल अब फिर से लोकप्रियता हासिल कर रहा है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य और स्वाद दोनों का संगम है.