Chitrakoot Famous Peda: चित्रकूट का फेमस पेड़ा! स्वाद और परंपरा का संगम, जानें खासियत

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Chitrakoot Famous Peda: धर्म नगरी चित्रकूट अपने धार्मिक स्थलों के अलावा अपने खास खान-पान के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां की खोही परिक्रमा में देसी अंदाज में तैयार किया जाने वाला पेड़ा बेहद लोकप्रिय है और यह मिठाई यहां आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को खूब भाती है.

धर्म नगरी चित्रकूट केवल भक्ति और दर्शन का केंद्र ही नहीं, बल्कि स्वाद का भी तीर्थ बन गया है. यहां की स्थानीय मिठाइयों, खासकर सत्यनारायण स्वीट हाउस के पेड़े की मिठास श्रद्धालुओं की थकान मिटा देती है और यादों में बस जाती है.

मंदाकिनी घाट से कुछ दूरी पर परिक्रमा मार्ग के खोही क्षेत्र में स्थित सत्यनारायण स्वीट हाउस आज चित्रकूट की पहचान बन चुका है. यहां बनने वाला पेड़ा अपनी लाजवाब खुशबू, देसी स्वाद और मुलायम बनावट के कारण पूरे बुंदेलखंड में मशहूर है.

मंदाकिनी घाट से कुछ दूरी पर परिक्रमा मार्ग के खोही क्षेत्र में स्थित सत्यनारायण स्वीट हाउस आज चित्रकूट की पहचान बन चुका है. यहां बनने वाला पेड़ा अपनी लाजवाब खुशबू, देसी स्वाद और मुलायम बनावट के कारण पूरे बुंदेलखंड में मशहूर है.

बता दे कि इस दुकान पर सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की पेड़ लेने और खाने की भीड़ लगी रहती है. कोई दर्शन के बाद प्रसाद के रूप में लेता है तो कोई घर लौटते समय अपने प्रियजनों के लिए पैक करवा लेता है.

बता दे कि इस दुकान पर सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की पेड़ लेने और खाने की भीड़ लगी रहती है. कोई दर्शन के बाद प्रसाद के रूप में लेता है तो कोई घर लौटते समय अपने प्रियजनों के लिए पैक करवा लेता है.

दुकान के संचालक सत्यनारायण शर्मा बताते हैं कि इस मिठाई की असली पहचान उसकी शुद्धता और परंपरा में छिपी है। वे खुद रोजाना ताजा दूध से खोवा तैयार करते हैं और फिर उसमें देसी चीनी, इलायची पाउडर व एक खास घरेलू मिश्रण डालते हैं.

दुकान के संचालक सत्यनारायण शर्मा बताते है कि इस मिठाई की असली पहचान उसकी शुद्धता और परंपरा में छिपी है. वे खुद रोजाना ताजा दूध से खोवा तैयार करते हैं और फिर उसमें देसी चीनी, इलायची पाउडर व एक खास घरेलू मिश्रण डालते हैं.

उनका कहना है कि हम पेड़े को बनाने में मशीन या केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते. हर पेड़ा हाथ से बनाया जाता है, इसलिए इसमें वही मिठास और सुगंध रहती है, जो पुराने जमाने की मिठाइयों में हुआ करती थी.

उनका कहना है कि हम पेड़े को बनाने में मशीन या केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते. हर पेड़ा हाथ से बनाया जाता है, इसलिए इसमें वही मिठास और सुगंध रहती है, जो पुराने जमाने की मिठाइयों में हुआ करती थी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्यनारायण स्वीट हाउस का पेड़ा न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि लंबे समय तक ताजा भी रहता है, यही वजह है कि दूर-दराज से आने वाले यात्री इसे पैक कर अपने घर ले जाते हैं.जिले के कई अधिकारी, साधु-संत और पर्यटक भी जब चित्रकूट आते हैं तो इस दुकान पर पेड़ा जरूर खाते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्यनारायण स्वीट हाउस का पेड़ा न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि लंबे समय तक ताजा भी रहता है, यही वजह है कि दूर-दराज से आने वाले यात्री इसे पैक कर अपने घर ले जाते हैं. जिले के कई अधिकारी, साधु-संत और पर्यटक भी जब चित्रकूट आते हैं तो इस दुकान पर पेड़ा जरूर खाते हैं.

सत्यनारायण बताते हैं कि उनकी दुकान पर रोजाना करीब 15 से 20 किलो तक पेड़ा बिकता है, इसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो है, बावजूद इसके ग्राहक बिना मोलभाव के खुशी-खुशी खरीदते हैं.त्योहारी सीजन या रामनवमी, दीवाली, सावन जैसे महीनों में तो यह बिक्री दोगुनी हो जाती है.

सत्यनारायण बताते हैं कि उनकी दुकान पर रोजाना करीब 15 से 20 किलो तक पेड़ा बिकता है, इसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो है, बावजूद इसके ग्राहक बिना मोलभाव के खुशी-खुशी खरीदते हैं. त्योहारी सीजन या रामनवमी, दीवाली, सावन जैसे महीनों में तो यह बिक्री दोगुनी हो जाती है.

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