Home Hacks: फेस्टिवल सीजन में दुर्गंध को कहें अलविदा, अब कन्नौज के देसी इत्र से बदलिए घर का माहौल, कम दाम में मिलेगी लंबी महक

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Home Hacks: दीवाली की सफाई के साथ-साथ अब घरों को महकाने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है. इत्र नगरी कन्नौज के इत्र व्यापारी इस बार लेवेंडर, लिली और जैस्मीन जैसी प्राकृतिक खुशबू वाले इत्र लेकर आए हैं, जो न केवल दुर्गंध को खत्म करते हैं बल्कि पूजा-पाठ और घर के हर कोने को ताजगी से भर देते हैं.

कन्नौज: इत्र नगरी कन्नौज एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह है घरों की दुर्गंध मिटाने वाला खास देसी इत्र. दीपावली से पहले जहां लोग अपने घरों की सफाई में जुटे हैं, वहीं कन्नौज के इत्र व्यापारी बाजार में लेकर आए हैं लेवेंडर, लिली और जैस्मीन सुगंध वाले प्राकृतिक इत्र, जो न सिर्फ माहौल को खुशबूदार बनाएंगे, बल्कि दुर्गंध को पूरी तरह खत्म कर देंगे. इस बार त्योहार में यह इत्र लगाएंगे चार चांद. घर में पूजा-पाठ का माहौल और भी शानदार बन जाएगा, जब पूरा घर प्राकृतिक इत्र की महक से भर जाएगा.

क्या है खास?
इत्र व्यापारियों के अनुसार, ये इत्र पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों से तैयार किए गए हैं, जिनमें किसी प्रकार के रासायनिक पदार्थ नहीं मिलाए जाते. लेवेंडर की खुशबू तनाव को दूर करती है और कमरे में शांति का अनुभव कराती है. लिली की मीठी सुगंध वातावरण को ताजगी से भर देती है. जैस्मीन इत्र को खासतौर पर पूजा-पाठ और बेडरूम के लिए उपयोगी माना जा रहा है, क्योंकि इसकी महक लंबे समय तक बनी रहती है.

क्या बोले इत्र व्यापारी?
इत्र निर्माता निशीष तिवारी बताते हैं कि इन इत्रों का प्रयोग करना बेहद आसान है. इन्हें कमरे के कोनों, पर्दों या सोफे पर हल्के स्प्रे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा, अरोमा डिफ्यूज़र या कपड़े के नैपकिन पर कुछ बूंदें डाल देने से ही पूरा घर महक उठता है. त्योहारों के सीजन में कन्नौज के बाजारों में इन इत्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

लोग अब कमरे के केमिकल फ्रेशनर की जगह देसी इत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि ये सस्ते, टिकाऊ और पूरी तरह प्राकृतिक हैं. कन्नौज के ये इत्र अब सिर्फ एक खुशबू नहीं, बल्कि हर घर की पहचान बनते जा रहे हैं.

राहुल गोयल

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्‍थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्‍थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें

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दुर्गंध को कहें अलविदा, अब कन्नौज के देसी इत्र से बदलिए घर का माहौल

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